उत्कृष्ट स्वदेशी
राजीव त्यागी
विश्व के किसी भी राष्ट्र की महत्ता जिन शक्तिशाली संसाधनों के आधार पर निर्धारित होती है, उनमें युद्धक अस्त्र-शस्त्र प्रथम हैं। भारत के संदर्भ में विचार किया जाए तो विगत करीब साढ़े आठ दशकों से इस दिशा में यहां उत्तरोत्तर प्रगति होती रही। भारत की स्वदेशी रक्षा प्रणाली पिछले एक दशक में ‘आयात निर्भरता’ से ‘आत्मनिर्भरता’ की ओर तीव्रतापूर्वक बढ़ी है। सन 2026 तक भारत ने रक्षा क्षेत्र में न केवल अपनी तकनीकी व प्रौद्योगिकीय क्षमता को सिद्ध किया है, बल्कि हमारा देश वैश्विक स्तर पर एक प्रमुख रक्षा निर्यातक के रूप में भी उभरा है।
विश्व के किसी भी राष्ट्र की महत्ता जिन शक्तिशाली संसाधनों के आधार पर निर्धारित होती है, उनमें युद्धक अस्त्र-शस्त्र प्रथम हैं। भारत के संदर्भ में विचार किया जाए तो विगत करीब साढ़े आठ दशकों से इस दिशा में यहां उत्तरोत्तर प्रगति होती रही। भारत की स्वदेशी रक्षा प्रणाली पिछले एक दशक में ‘आयात निर्भरता’ से ‘आत्मनिर्भरता’ की ओर तीव्रतापूर्वक बढ़ी है। सन 2026 तक भारत ने रक्षा क्षेत्र में न केवल अपनी तकनीकी व प्रौद्योगिकीय क्षमता को सिद्ध किया है, बल्कि हमारा देश वैश्विक स्तर पर एक प्रमुख रक्षा निर्यातक के रूप में भी उभरा है।
आज यहां आधुनिक अस्त्र-शस्त्रों का बड़े पैमाने पर नवोन्नत ढंग से निर्माण हो रहा है। नित नवीन स्वदेशी रक्षा प्रणालियां विकसित की जा रही हैं। इस क्षेत्र में मित्र देशों के साथ खोज से लेकर उत्पादन तक उपयोगी साझेदारियां भी की जा रही हैं। वर्तमान में देश की आधुनिक प्रक्षेपास्त्र (मिसाइल) प्रणाली एक बड़ी उपलब्धि है। यह प्रक्षेपास्त्रीय तकनीक विश्व की सबसे उन्नत प्रणालियों में से एक है। इस उन्नतिकरण में ‘इंटीग्रेटेड गाइडेड मिसाइल डेवलपमेंट प्रोग्राम’ की विशाल भूमिका रही है। इसके अंतर्गत अग्नि-5 और अग्नि-6 अति उल्लेखनीय है। इस वर्ष तक भारत की अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइल क्षमता अत्यधिक परिष्कृत हो चुकी है।
रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) द्वारा विकसित अग्नि-5 की मारक क्षमता 5000 किलोमीटर से अधिक है। इस प्रयास से प्रेरित होकर अब अग्नि-6 का निर्माण हो रहा है, जो मल्टीपल इंडिपेंडेंटली टार्गेटेबल रीएंट्री व्हीकल तकनीक से युक्त है। गत वर्ष मई माह में ऑपरेशन सिंदूर में पाकिस्तान के साथ हुए अल्पावधि के युद्ध में देशवासियों ने ब्रह्मोस प्रक्षेपास्त्र का युद्धक प्रदर्शन देखा ही था, कि कैसे इस वायु अस्त्र ने शत्रु देश के चिन्हित ठिकानों को ध्वस्त किया था। राष्ट्र की वायु रक्षा प्रणाली भी प्रशंसनीय है। शत्रु के वायु मार्गीय आक्रमणों को वायुक्षेत्र में ही नष्ट करने के लिए भारत ने एक बहुस्तरीय सुरक्षा कवच तैयार किया है। इसके अंतर्गत पहले वर्णन आता है आकाश का। यह कम दूरी की सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल है, जिसके नए संस्करण ‘आकाश प्राइम’ में स्वदेशी एक्टिव रेडियो फ्रीक्वेंसी सीकर लगा है।
भारतीय वायु सेना मेक इन इंडिया के अंतर्गत विकसित विमानों पर अधिक भरोसा कर रही है। इस श्रृंखला का महत्त्वपूर्ण अंग है तेजस। आईएनएस विक्रांत के सफल संचालन के बाद भारत अब दूसरे स्वदेशी विमान वाहक आईएसी-2 की योजना पर काम कर रहा है। उत्तर प्रदेश और तमिलनाडु में बन रहे दो रक्षा उत्पादन केंद्रों ने निजी और सरकारी क्षेत्र के निर्माण को गति दी है। भारत ने वित्त वर्ष 2024-25 में रुपए 21083 करोड़ का ऐतिहासिक रक्षा निर्यात किया, जो गत वर्ष की तुलना में 32.5 प्रतिशत अधिक है। भारत अब 80 से अधिक देशों को रक्षा उपकरण निर्यात कर रहा है। इस क्षेत्र में हम आगे बढ़ रहे हैं।




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