नई सदी का भारत है, ये 62 वाला दौर नहीं।हम भी दुनिया के दादा हैं, दिल्ली है, लाहौर नहीं।। -- कवि हरिओम पंवार
मेरठ ।मेरठ कॉलेज, मेरठ के ऐतिहासिक सभागार में गणतंत्र दिवस के अवसर पर एक भव्य एवं गरिमामय कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के मुख्य आकर्षण उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा “उत्तर प्रदेश गौरव” से सम्मानित प्रख्यात कवि एवं विचारक डॉ. हरिओम पंवार रहे, जिनकी ओजस्वी व राष्ट्र प्रेरक काव्य-प्रस्तुति ने उपस्थित जनसमूह को गहरे तक प्रभावित किया।
डॉ. हरिओम पंवार ने अपने काव्य-पाठ की शुरुआत उपरोक्त पंक्तियों से करते हुए कहा कि आज का भारत आत्मविश्वास से भरा हुआ, सशक्त और वैश्विक मंच पर निर्णायक भूमिका निभाने वाला राष्ट्र है। उनकी लगभग पंद्रह मिनट से अधिक चली कविता में देश के विभाजन, बंगाल विभाजन तथा 1971 में बांग्लादेश के निर्माण जैसी ऐतिहासिक घटनाओं का सजीव चित्रण किया गया। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि विभाजन की पीड़ा ने देश को कमजोर किया, जबकि एकता ही भारत की सबसे बड़ी शक्ति रही है। उनके वक्तव्य और काव्य-पाठ पर सभागार तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा।
डॉ युद्धवीर सिंह ने कहा कि राष्ट्र एक है, उसे बांटने वाले अनेक हो सकते हैं, लेकिन समय की मांग है कि सभी शक्तियां एकजुट होकर देश की मजबूती के लिए कार्य करें। उन्होंने राष्ट्रीय एकता और सामाजिक समरसता पर विशेष बल दिया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता मेरठ कॉलेज प्रबंध समिति के अध्यक्ष डॉ. ओपी अग्रवाल ने की। उन्होंने अपने अध्यक्षीय संबोधन में गणतंत्र दिवस के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि संविधान हमें अधिकारों के साथ कर्तव्यों का भी बोध कराता है। कॉलेज के सचिव श्री विवेक कुमार गर्ग ने सभी अतिथियों का स्वागत करते हुए मेरठ कॉलेज की गौरवशाली परंपरा और शैक्षणिक योगदान की चर्चा की। उन्होंने डॉ. हरिओम पवार को युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत बताया।
कार्यक्रम का संचालन इतिहास विभाग की प्रोफेसर अर्चना सिंह ने प्रभावशाली ढंग से किया। कॉलेज के प्राचार्य प्रो. युद्धवीर सिंह ने मेरठ कॉलेज की शैक्षणिक, सांस्कृतिक एवं राष्ट्रीय उपलब्धियों पर प्रकाश डाला। एनसीसी अधिकारी डॉ. अवधेश कुमार के नेतृत्व में एनसीसी परेड एवं गार्ड ऑफ ऑनर प्रस्तुत किया गया, जिसने कार्यक्रम की गरिमा को और बढ़ाया।
इस अवसर पर लगभग 600 छात्र-छात्राएं, शिक्षक एवं गैर-शिक्षक कर्मचारी उपस्थित रहे। कार्यक्रम को सफल बनाने में डॉ. चंद्रशेखर भारद्वाज, एडवोकेट प्रभात शर्मा, डॉ. कपिल शर्मा, प्रो. पंजाब सिंह मलिक, डॉ. सीमा पवार, डॉ. अर्चना सिंह, डॉ. अनिल राठी एवं डॉ. नीरज कुमार का विशेष योगदान रहा।


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