कृषि विवि और हैदराबाद संस्थान में एमओयू

 बाजरा-चना-मूंग की बेहतर किस्मों पर होगा अंतरराष्ट्रीय स्तर का शोध

  मेरठ । सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय में सोमवार को कृषि शोध के क्षेत्र में बड़ा कदम उठाते हुए अंतरराष्ट्रीय अर्ध शुष्क उष्णकटिबंधीय फसल अनुसंधान संस्थान हैदराबाद के साथ समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए। इसका उद्देश्य बाजरा, चना, मूंग समेत कई प्रमुख फसलों की उन्नत किस्मों के विकास को गति देना है।

कुलपति डॉ. केके सिंह और आईसीआरआईएसएटी के महानिदेशक डॉ. हिमांशु पाठक ने एमओयू पर हस्ताक्षर कर शोध सहयोग की नई शुरुआत की। कुलपति ने कहा कि यह साझेदारी विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों और छात्रों के लिए अंतरराष्ट्रीय मंच पर शोध के नए अवसर खोलेगी। उन्होंने बताया कि अब विवि के शोधार्थी हैदराबाद स्थित विश्वस्तरीय संस्थान में जाकर उच्चस्तरीय प्रशिक्षण व शोध कार्य कर सकेंगे। साथ ही, दोनों संस्थानों के वैज्ञानिक मिलकर बाजरा, चना, मूंग, उड़द, सोयाबीन जैसी महत्वपूर्ण फसलों की अधिक उत्पादक व जलवायु अनुकूल किस्में विकसित करेंगे। छोटे और सीमांत किसानों के लिए कम लागत वाली तकनीक तैयार करना भी इस साझेदारी का प्रमुख लक्ष्य है। कुलपति ने बताया कि आईसीआरआईएसएटी का उद्देश्य गरीबी व भूख कम करने के साथ ही जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए कृषि को मजबूत बनाना है। एमओयू से कृषि प्रणाली को सुदृढ़ बनाने की दिशा में विवि की कार्यप्रणाली और तेज होगी। निदेशक शोध डॉ. कमल खिलाड़ी ने बताया कि विश्वविद्यालय नई प्रजातियों के विकास और नई परियोजनाओं पर तेजी से काम कर रहा है। प्रो. आरएस सेंगर ने कहा कि यह अनुबंध शोध व शिक्षण कार्यों को नई दिशा देगा और अंतरराष्ट्रीय स्तर की तकनीक सीधे मेरठ तक पहुंच सकेगी।

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