बिना नक्शे तैयार हो रहे निगम  के नये कार्यालय के लिए आवास विकास को  हाइकोर्ट ने भेजा नोटिस 

 अन्य अवैध निर्माण 25 मार्च तक मांगा जवाब 

मेरठ। अवैध सैंट्रल मार्किट प्रकरण के बाद आवास एवं विकास परिषद के अधिकारियों की भ्रष्टाचार की परतें लगातार खुलती जा रही हैं। बड़े बड़े अवैध निर्माणों पर अब हाईकोर्ट से लेकर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई जारी है और दोनों अदालतों की ओर सख्ती भी होती दिख रही है। इसी के मद्देनजर परिषद समेत दो को हाईकोर्ट का नोटिस भेजा गया। 25 मार्च 2026 तक इस नोटिस का जवाब देने को कहा गया है। 

हाई कोर्ट द्वारा दिए गए नोटिस में बिना नक्शे के तैयार हो रहे निगम के कार्यालय, चाणक्यापुरी स्थित ग्रीन बैल्ट में बने अवैध कॉम्प्लैक्स तथा के-ब्लॉक स्थित देवराना रेस्टोरेन्ट को लेकर भेजा गया है। इन तीनों अवैध निर्माणों के खिलाफ राहुल ठाकुर द्वारा हाईकोर्ट में रिट दायर की गई थी। जिसकी सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने सख्ती दिखाई और 17 दिसंबर 2024 को आए सुप्रीम कोर्ट के आदेश का हवाला देते हुए मार्च तक जवाब मांगा है।  सन् 2023 से नई सड़क पर बन रहे नगर निगम के कार्यालय का नक्शा परिषद को आज तक नहीं मिल सका। जुलाई से नवंबर तक परिषद निगम से नक्शे दिखाने के लिए पत्र भेजता रहा लेकिन आज तक कोई जवाब नहीं दिया। मौके पर नगर निगम का दफ्तर लगभग तैयार होने की स्थित में है।  बताया जा रहा है कि निगम की ओर से करीब 50 करोड़ की लागत से इस बिल्डिंग का निर्माण कराया जा रहा है।  

परिषद् को हैंडओवर होनी थी जमीन 

वैसे ये मामला लैंड हैंड ओवर से भी जुड़ा है क्योंकि ये कार्यालय परिषद की जमीन पर बनाया जा रहा था। बता दें कि आवास विकास जब कोई सरकारी जमीन लेता है तो वह जमीन बिना भुगतान के ही लेकर बदले में सहमति के बाद दूसरी जमीन हैंडओवर कर देता है। क्योंकि सन् 2010 से पहले ही परिषद ने इस जमीन को निगम से अपनी ओर करते हुए बदले में करीब 10 हैक्टेयर जमीन जागृति विहार एक्सटेंशन योजना की ग्रीन बैल्ट में दे दी थी। जहां निगम सीवर ट्रीटमेंट प्लांट के लिए निर्माण भी कर चुका है। नई सड़क वाली भूमि आवास विकास को हैंडओवर होनी थी। बता दें कि ये मामला दोनों विभागों के विवाद के चलते हाईकोर्ट तक पहुंचा। कोर्ट ने नगर विकास और आवास एवं शहरी नियोजन के प्रमुख सचिवों को स्वयं निर्णय के लेने लिए कहा। इस पर अब तक निर्णय तो नहीं हुआ। इस आदेश के बाद लोकेश खुरादा ने आरटीआई लगाई तो परिषद ने जुलाई 2025 में निगम को चिट्टी लिखी।

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