समय से पहले जन्में नवजातों की आंखों के लिए आशाओं को किया जागरूक
25 आशा को आरओपी जांच के बारे में जानकारी नहीं
मेरठ। सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र परीक्षितगढ में आरुण्या फाउंडेशन द्वारा “नन्हीं आंखें” के अंतर्गत समय से पहले जन्मे शिशुओं की आंखों की रेटिना जांच (ROP स्क्रीनिंग) और रोग के प्रति जागरूकता अभियान लगातार चलाया जा रहा है। इसी क्रम में पिलाखनी, परीक्षितगढ़ में आशा वर्कर्स के लिए विशेष प्रशिक्षण एवं जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। जिसमें आरओपी जांच के बारे में बताया गया ।
कार्यक्रम में एमओआईसी , बीसीपीएम, एक आशा संगिनी और 27 आशा वर्कर्स ने भाग लिया। डा. प्रीति जैन ने सर्वेक्षण में पाया गया कि 27 में से केवल 5 आशा वर्कर्स को इस बीमारी के बारे में जानकारी थी, लेकिन अब तक किसी भी बच्चे की ROP जांच नहीं कराई गई थी और न ही यह स्पष्ट था कि ऐसे बच्चों को किस विशेषज्ञ को दिखाना है।प्रशिक्षण सत्र में आशा वर्कर्स को बताया गया कि समय से पहले जन्मे और कम वजन वाले शिशुओं की आंखों का परदा (रेटिना) जन्म के बाद 15 से 30 दिनों के भीतर जांचना अत्यंत जरूरी है। यह बीमारी समय पर पहचान और उपचार से 80% तक रोकी जा सकती है, लेकिन वर्तमान में केवल 30% तक ही जांच सेवाएं पहुंच पाती हैं।आशा वर्कर्स ने इस अंधेपन को रोकने के लिए पूरी प्रतिबद्धता से सहयोग देने का संकल्प लिया। साथ ही, अब स्थानीय स्वास्थ्य केंद्र में गर्भवती महिलाओं के ओपीडी से लेकर डिलीवरी वार्ड तक और जहां माताएं Kangaroo Mother Care कराती हैं) तक, ROP जांच एवं जानकारी संबंधी पोस्टर लगाए गए हैं, ताकि अधिक से अधिक लोग जागरूक हो सकें।



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