ऋतु चक्र की अनिश्चितता

 इलमा अज़ीम 
भारी बारिश के बाद अचानक आई बाढ़ में मध्य प्रदेश के एक गांव के चाचा और भतीजे की खेत में ही डूब ककर मौत हो गई। गुरुवार सुबह दोनों के शव एक-दूसरे से लिपटे मिले। यह किसी त्रासदी से कम नहीं है। दोनों के फोटो देखकर मन विचलित हो जाता है। दरअसल, यह सब बारिश की अनिश्चितता का नतीजा है। जब से ऋतुचक्र बिगड़ा है तब से वर्षा का वर्षण भी अनिश्चित हो चुका है। इसी वर्षा ऋतु से पहले चारों ओर अतिवृष्टि के कारण आई बाढ़ ने जनजीवन के लिए मृत्यु से लेकर अनेक अन्य संकट उत्पन्न कर दिए हैं। 
अत्यधिक वर्षा के कारण देश के अधिसंख्य प्रांत ही नहीं बल्कि अन्य देशों के कई प्रांतों में भी बाढ़ की स्थितियां-परिस्थितियां निर्मित हुई हैं। मई के अंत से लेकर पूरे जून माह तक राजधानी दिल्ली सहित उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, कर्नाटक, महाराष्ट्र, राजस्थान, गुजरात, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, बिहार, असम में अनिश्चित, अनियंत्रित तथा उथल-पुथल मचाने वाली वर्षा ने जनजीवन को संकट में डाल दिया था। और जुलाई के पहले पंद्रह दिनों में भी राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखंड, बिहार, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, पूर्वोत्तर राज्यों में अधिक वर्षा के कारण बाढ़ से ग्रस्त क्षेत्रों के लोगों का जीवन नारकीय हो गया। अप्रैल के बाद अब सावन के आगमन तक देश में बादल फटने, बिजली गिरने तथा अतिवृष्टि के कारण आई बाढ़ से हजारों लोग मारे जा चुके हैं।
 

भारत ही नहीं, बल्कि पाकिस्तान, दक्षिण कोरिया इत्यादि देशों में भी अत्यधिक वर्षा के कारण आई जलप्रलय में कई सौ लोग मारे गए हैं। लाखों-करोड़ों रुपए मूल्य की व्यक्तिगत तथा सार्वजनिक संपत्तियां-परिसंपत्तियां नष्ट हो चुकी हैं। यह परिस्थिति प्राकृतिक प्रतिकूलताओं तथा जलवायु असंतुलन की पुनरावृत्ति के कारण गत तीस-चालीस वर्षों से हरेक वर्ष अधिक भयंकर रूप में उत्पन्न हो रही है। बाढ़ के बहते हुए पानी तथा विशाल क्षेत्र में ठहरे हुए कीचड़-गाद-गंदगी से युक्त पानी के कारण अकल्पनीय समस्याएं होती हैं।
 प्रकार-प्रकार के रोग उत्पन्न होते हैं। रहन-सहन, भोजन, पेयजल, आजीविका, विद्यालय, शिक्षा, काम-धंधे, व्यवसाय, नौकरी, सब कुछ अस्त-व्यस्त हो जाता है। अतिवृष्टि तथा बाढ़ के उपरांत निरंतर आकार लेने वाली जलजनित समस्याओं का निदान कुछ दिनों, सप्ताहों अथवा माहों में नहीं हो पाता। ऐसी समस्याएं वर्षोंवर्ष बनी रहती हैं तथा समस्याग्रस्त लोगों के जीवन को अकल्पनीय बुराइयों के अधीन करके भयंकर ढंग से असुरक्षित कर देती हैं।जिस देश की जनसंख्या सबसे अधिक है, वहां अतिवृष्टि की बाढ़ द्वारा सामान्य लोगों का जीवन किस सीमा तक प्रभावित होता होगा, इसका आभास बाढ़ से घिरे सामान्य लोगों के साथ रहकर ही हो सकता है। 

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