जश्न-ए-आजादी

तिरंगे की मांग बढ़ी पर खादी बहुत पीछे खड़ी

मेरठ। स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर देशभक्ति की बयार बह रही है। हर घर तिरंगा लगाने पर जोर है। तिरंगे की मांग भी बढ़ी है। लेकिन स्वदेशी के बाजार में सन्नाटा है। मेरठ के गांधी आश्रम व व गांधी आश्रम की रिटेल पहले के मुकाबले अपेक्षाकृत बिक्री कम हुई। इसका कारण सामाजिक संस्थानो व स्वंय सहायता समूह अन्य कारण है। 

खादी सिर्फ एक उत्पाद नहीं, विचार है। आत्मनिर्भरता की पहचान है। लेकिन बाजार में इसकी कोई पूछ नहीं। जश्न-ए-आजादी के मौके पर सरकार की ओर से भी इसे आगे बढ़ाने का कोई प्रयास नहीं किया गया। महंगाई ने इसे आम जनता से दूर कर दिया।

 गांधी आश्रम क्षेत्रीय कार्यालय के प्रबंधक पृथवी सिंह रावत ने बताया आश्रम में फरवरी मार्च व अक्टूबर व नम्बबर में खादी के तिरंगे तैयार किए जाते है। जिनके साईज  1 x 1.5 ,2x 3 ,3x 4.5, 2 x 6 है। जिसके रेट 75,400,5000,1100 है । उन्होंने बताया कि गांधी आश्रम के खादी के झंडो की 3x 4.5, 2 x 6  की मांग सबसे अधिक है।  उन्होंने बताया सरकारी कार्यालयों , सरकारी स्कूल , प्राइवेज सस्थानों में खादी के लगाए जाते है। लेकिन अब तिंरगे को स्वंय सहायता समूह ,सामाजिक संस्थान, एनजीओ आदि बनवा रहे है। इस कारण खादी के तिंरगे की मांग कम  हो गयी है। है। फिर भी चार से पांच हजार झंडे प्रतिदन बेचे जा रहे है।  उन्होंने बताया कुछ आर्डर बाहरी जिलों से सरकारी विभागों से आए थे जिन्हें पूरा कर दिया गया है। 



 उन्होंने बताया कि इस साल माेदी सरकार के हर तिरंगा के कारण शहर में चल रहे स्वंयसेवी संस्थाओं को आर्डर मिले है। जिले में  48 स्वयं सहायता समूहों को तिरंगा बनाने का ऑर्डर मिला है। इन समूहोंं को तीन लाख दो हजार तिरंगा बनाना था। केवल 10 फीसदी तिरंगा बनाना ही शेष बचा हैं। स्वयं सहायता समूह की महिलाओं के मुताबिक, ज्यादातर झंडे साटन के बने हैं।। समूह तिरंगा बनाने के लिए कॉटन के अलावा टेरीकॉट, रोटो व साटन का प्रयोग कर रहे हैं।

 दुकानों पर 10  रूपये से लेकर 350 का बिक रहा तिरंगा 

 शहर के बाजारों बुढाना गेट, सुभाष बाजार, इंन्द्रा चौक, हापुड अडडे , शास्त्री नगर , बेगमपुल, आबलेन आदि स्थानों पर दुकानों व ठेले पर दस रूपये से लेकर साढे तीन रूपये तक साटन व पालियस्टर का तिरंगा बेचा जा रहा है। 

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