जलवायु परिवर्तन और बुजुर्ग


  इलमा अज़ीम 
जलवायु परिवर्तन दुनिया भर के लोगों के लिए एक गंभीर चिंता का विषय बन गया है, और इसके प्रभाव विभिन्न क्षेत्रों और विभिन्न समूहों, जिनमें वृद्ध लोग भी शामिल हैं, पर पड़ रहे हैं। भारत में, वृद्ध लोग विभिन्न कारणों से जलवायु परिवर्तन के प्रभावों के प्रति विशेष रूप से संवेदनशील हैं। जलवायु परिवर्तन से उपजी चुनौतियों का असर बुजुर्गों पर ज्यादा पड़ रहा है। जिसकी पुष्टि संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम यानी यूएनइपी की ताजा रिपोर्ट करती है। चौंकाने वाली रिपोर्ट बताती है कि बीती सदी में नब्बे के दशक के बाद से लेकर अब तक भीषण गर्मी से बुजुर्गों की मौत में पिच्चासी फीसदी की वृद्धि हुई है।
 ऐसे में जलवायु परिवर्तन के प्रभावों से जूझ रहे देशों को बुजुर्गों को सामाजिक सुरक्षा देने के साथ ही स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार करना चाहिए। दरअसल, पर्यावरण प्रदूषण इस संकट को और गहरा कर रहा है। खासकर शहरों में स्थिति ज्यादा विकट है, जहां बुजुर्ग बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं के प्रलोभन में आ बसते हैं। फलत: मरीजों के दबाव से स्वास्थ्य सेवाएं भी चरमराने लगती हैं। जिसकी कीमत बुजुर्गों को चुकानी पड़ती है। सेवानिवृत्ति के बाद व्यक्ति की आय कम हो जाती है, फलत: शारीरिक क्षमता में गिरावट के बाद बढ़ती उम्र के रोगों का इलाज करा पाना उनके लिए मुश्किल हो जाता है।


 ऐसे में यदि उनके बच्चे उनका साथ नहीं देते तो उनके लिए संकट और गहरा जाता है। निस्संदेह, बुनियादी ढांचे को मजबूत करके स्वास्थ्य सेवाओं को सस्ती व सर्व सुलभ बनाने की भी जरूरत है। जिससे संवेदनशील वर्ग के संकट के समाधान में मदद मिल सके। ऐसे में बुजुर्गों की भागीदारी सामाजिक कार्यक्रमों व आय के साधन जुटाने में बढ़ाई जानी चाहिए। जिससे शारीरिक गतिशीलता से उनके स्वास्थ्य में सुधार हो सके। दरअसल,बढ़ती उम्र व बीमारियां उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता को कम करती हैं।


 निस्संदेह, यदि वैश्विक तापमान में और वृद्धि होती है, तो बुजुर्गों के लिये ग्लोबल वार्मिंग के प्रभावों के घातक परिणाम हो सकते हैं। जलवायु परिवर्तन के कारण वरिष्ठ नागरिकों को अनोखी चुनौतियों का सामना करना पड़ता है, क्योंकि सीमित गतिशीलता, दीर्घकालिक स्वास्थ्य समस्याओं और संसाधनों तक कम पहुँच के कारण वे अक्सर अधिक असुरक्षित होते हैं। उन्हें जिस सुरक्षा की आवश्यकता होती है, वह स्थान के अनुसार अलग-अलग होती है, लेकिन आम तौर पर इसमें स्वच्छ हवा, सुरक्षित पेयजल, विश्वसनीय ऊर्जा स्रोतों तक पहुँच शामिल है।

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