अब भारत-ब्रिटेन में व्यापार का नया दौर

- डा. जयंतीलाल भंडारी
हाल ही में 24 जुलाई को भारत और ब्रिटेन (यूके) के बीच मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ब्रिटेन के प्रधानमंत्री किएर स्टार्मर की मौजूदगी में हस्ताक्षर हुए हैं। इसे आधिकारिक तौर पर सीईटीए (व्यापक आर्थिक और व्यापार समझौता) के नाम से जाना जाएगा। यह महत्वपूर्ण है कि भारत में 22 जुलाई को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने एफटीए को मंजूरी दे दी है, अब ब्रिटेन के द्वारा संसद की मंजूरी ली जाएगी। पूरी दुनिया की निगाहें इस समझौते पर इसलिए लगी रही, क्योंकि भारत बढ़ते भूराजनीतिक ध्रुवीकरण के बीच अमेरिका और यूरोपीय संघ के साथ भी एफटीए की अंतिम कवायद में लगा है। गौरतलब है कि भारत-ब्रिटेन का यह एफटीए इसी वर्ष दुनिया की चौथी बड़ी अर्थव्यवस्था बन रहे भारत और छठी बड़ी अर्थव्यवस्था ब्रिटेन के बीच न्यायसंगत और महत्त्वाकांक्षी व्यापार के लिए नए मापदंड स्थापित करते हुए दिखाई दे रहा है। भारत का ब्रिटेन के साथ यह अब तक का सबसे व्यापक ऐसा ऐतिहासिक एफटीए है, जो दुनिया के प्रमुख देशों के लिए भारत के साथ तत्परता से मुक्त व्यापार समझौतों की डगर पर आगे बढऩे की नजीर बनते हुए दिखाई दे रहा है। इस एफटीए से भारत और ब्रिटेन के बीच वर्ष 2030 तक व्यापार दोगुना होकर 120 अरब डॉलर की ऊंचाई पर पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि यह एफटीए भारत और ब्रिटेन दोनों देशों के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि है। इससे दोनों अर्थव्यवस्थाओं में व्यापार, निवेश, विकास, रोजगार सृजन और नवाचार को बढ़ावा मिलेगा।
यहां यह भी महत्वपूर्ण है कि हाल ही में जब अमेरिका-चीन में नई सुलह के बाद अमेरिका ने चीन के उत्पादों पर आयात शुल्क घटा दिए हैं, तब भारत के द्वारा दुनिया के विभिन्न देशों के साथ मुक्त व्यापार समझौतों की डगर पर तेजी से बढऩा लाभप्रद दिखाई दे रहा है। उल्लेखनीय है कि इस एफटीए से ब्रिटेन के बाजारों में भारत को लगभग 99 फीसदी उत्पादों पर शून्य टैरिफ का लाभ मिलेगा और भारतीय वस्तुओं के लिए ब्रिटेन के बाजार में चीनी उत्पादों और अन्य देशों के उत्पादों के मुकाबले प्रतिस्पर्धा में मदद मिलेगी। भारत को ब्रिटेन में कई कृषि उत्पादों जैसे फल, सब्जियां, अनाज, हल्दी, काली मिर्च, इलायची तथा प्रसंस्कृत उत्पाद जैसे रेडी-टू-ईट खाद्य, आम का पल्प (मैंगो पल्प), अचार और दालों तक शुल्क मुक्त पहुंच मिलेगी। एफटीए उभरते उत्पादों, जैसे कटहल, बाजरा और जैविक जड़ी-बूटियों के लिए नए बाजार तक पहुंच बनाता है, जिससे किसानों को घरेलू मूल्य अस्थिरता के खिलाफ विविधता लाने में मदद मिलेगी है। खास बात यह है कि भारत संवेदनशील क्षेत्रों- डेयरी उत्पाद, सेब, जई और खाद्य तेलों पर कोई टैरिफ रियायत नहीं दे रहा है। एफटीए के टैरिफ उन्मूलन से विशेष रूप से झींगा, टूना, मछली आहार और आहार में तीव्र वृद्धि होने की उम्मीद है। 



इसी तरह एफटीए के स्वच्छता और पादप स्वच्छता (एसपीएस) उपायों से भारतीय निर्यातकों को आसानी से ब्रिटेन के मानकों को पूरा करने में मदद मिलेगी। एफटीए, मूल्यवर्धित मसालों, चाय और कॉफी उत्पादों, विशेषकर भारतीय इंस्टेंट कॉफी का ब्रिटेन को निर्यात बढ़ाने के लिए एक सशक्त मंच तैयार करेगा। कम टैरिफ और सुव्यवस्थित प्रक्रियाओं के साथ, भारतीय तिलहन निर्यातक ब्रिटेन के बाजार में अधिक प्रतिस्पर्धी बन सकते हैं, जिससे संभावित रूप से निर्यात में वृद्धि हो सकती है। वस्त्र व परिधान क्षेत्र के लिए शून्य शुल्क के साथ बाजार पहुंच भारत को बांग्लादेश, पाकिस्तान और कंबोडिया की तुलना में शुल्क संबंधी नुकसान का सामना करना पड़ रहा है, क्योंकि इन देशों को ब्रिटेन के बाजार में शुल्क मुक्त पहुंच प्राप्त थी। मुक्त व्यापार समझौते के तहत भारत से कपड़ा आयात पर शुल्क समाप्त कर दिया गया है, जिससे भारत की प्रतिस्पर्धा करने की क्षमता बढ़ गई है। यह बात भी महत्वपूर्ण है कि एफटीए के तहत टैरिफ उन्मूलन के साथ, ब्रिटेन को इंजीनियरिंग निर्यात अगले पांच वर्षों में लगभग दोगुना हो सकता है।

शून्य-शुल्क पहुंच से इलेक्ट्रॉनिक उत्पादों के निर्यात में तेजी आने की उम्मीद है, साथ ही स्मार्टफोन, ऑप्टिकल फाइबर केबल और इनवर्टर के कारण ब्रिटेन के बाजार में भारत की स्थिति मजबूत होगी। सॉफ्टवेयर और आईटी-सक्षम सेवाओं के लिए ब्रिटेन की महत्वाकांक्षी प्रतिबद्धताएं, नए बाजारों को खोलने, रोजगार सृजन को बढ़ावा देने और भारतीय सॉफ्टवेयर फर्मों के लिए निर्यात क्षमता को बढ़ाएगी। एफटीए के तहत शून्य टैरिफ प्रावधानों से ब्रिटेन के बाजार में भारतीय जेनेरिक दवाओं की प्रतिस्पर्धात्मकता में उल्लेखनीय वृद्धि होने की उम्मीद है, जो यूरोप में भारत का सबसे बड़ा दवा निर्यात गंतव्य बना हुआ है। शुल्क मुक्त पहुंच से प्लास्टिक, फिल्म, शीट, पाइप, पैकेजिंग, टेबलवेयर और किचनवेयर के लिए ब्रिटेन की मजबूत मांग का लाभ उठाने का अवसर मिलेगा। ये ऐसे क्षेत्र हैं जहां भारत ने विनिर्माण क्षमता सिद्ध कर ली है। शुल्क मुक्त पहुंच से भारत को ब्रिटेन के प्रमुख आयात स्रोतों जैसे जर्मनी, चीन, संयुक्त राज्य अमेरिका, नीदरलैंड, बेल्जियम और फ्रांस के साथ बेहतर प्रतिस्पर्धा करने में मदद मिलेगी। यह भी उल्लेखनीय है कि एफटीए के साथ ही दोनों देशों ने दोहरे अंशदान समझौते या सामाजिक सुरक्षा समझौते पर भी मुहर लगाई है। इस समझौते से ब्रिटेन में काम करने वाले भारतीय कर्मचारियों को सामाजिक सुरक्षा भुगतान से तीन साल की छूट मिलेगी। इस करार से ब्रिटेन में न केवल कुशल, पेशेवर श्रमिकों के हितों की रक्षा होगी बल्कि भारतीय सेवा प्रदाताओं को बहुआयामी वित्तीय लाभ भी होंगे। चूंकि भारत और ब्रिटेन पहले ही विश्व के अग्रणी देश हैं और ऐसे में दोनों देश विभिन्न क्षेत्रों में आदर्श साझेदार बन सकते हैं और तमाम ब्रिटिश व भारतीय कारोबारियों को तकनीक और ग्रीनटेक में साथ मिलकर काम करने का मौका मिलेगा। नि:संदेह ब्रिटेन के लिए भारत में करीब 90 फीसदी उत्पादों पर शुल्क में कमी के प्रावधान ब्रिटेन को भी लाभान्वित करेंगे। खासतौर से ब्रिटेन के लिए भारत में व्हिस्की, कार व अन्य उत्पाद निर्यात करना आसान हो जाएंगे। ब्रिटेन ने ब्रिटिश उत्पादों खास तौर से खाने के सामान से लेकर पेय पदार्थ के लिए भारत की उपभोक्ता प्रधान अर्थव्यवस्था और 140 करोड़ से अधिक ग्राहकों के बड़े बाजार तक सरल पहुंच निश्चित की है।



इसमें कोई दो मत नहीं हैं कि अमेरिका द्वारा लागू की जा रही संरक्षणवादी व्यापार नीतियों के कारण वैश्विक व्यापार में उथल-पुथल को देखते हुए भारत और ब्रिटेन ने मुक्त व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने में तत्परता दिखाई है। स्पष्ट दिखाई दे रहा है कि भारत-ब्रिटेन भारत के साथ एफटीए दोनों देशों के कारोबार को बढ़ाने के लिए एक ऐतिहासिक अवसर है। यह भारत के साथ ब्रिटेन की रणनीतिक और आर्थिक साझेदारी को मजबूत करने के ब्रिटेन के महत्वाकांक्षी एजेंडे का हिस्सा भी है। इस एजेंडे के तहत ब्रिटेन भारत को विश्व के महाशक्ति देशों के बीच अहम स्थान प्रदान करता है। उम्मीद करें कि 24 जुलाई को भारत के द्वारा ब्रिटेन के साथ किया गया मुक्त व्यापार समझौता दोनों देशों के द्विपक्षीय कारोबार के लक्ष्य के मद्देनजर मील का पत्थर साबित होगा। इससे देश से निर्यात बढ़ेंगे और बड़े पैमाने पर रोजगार के नए अवसरों का निर्माण होगा। उम्मीद करें कि ब्रिटेन के साथ भारत का एफटीए अमेरिका और यूरोपीय संघ जैसे बड़े देशों के साथ चल रही एफटीए वार्ताओं में एक मॉडल के रूप में काम करेगा और भारत के द्वारा ओमान, कनाडा, दक्षिण अफ्रीका, इजराइल, भारत गल्फ कंट्रीज काउंसिल सहित अन्य प्रमुख देशों के साथ भी एफटीए को शीघ्रतापूर्वक अंतिम रूप दिया जा सकेगा। इस तरह भारत के सामने अपना व्यापार बढ़ाने का नया मौका है।

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