उत्तराखंड से लेकर  एनसीआर तक ड्रोन का खौफ , अफवाहों की 'सुनामी' से ग्रामीण दशहत में 

कितने अजनबी लोगों को पीट-पीट कर उतारा जा रहा मौत के घाट 

 नीली लाइन की दहशत ऐसी  पूरी रात जागकर गांव वाले गश्‍त कर रहे

 मेरठ।  मेरठ समेत पश्चिमी उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और अब एनसीआर के गांवों तक रात में उड़ते ड्रोन कैमरों का खौफ छा गया है। 1500 से ज्यादा गांवों में लोग लाठी-डंडों और लाइसेंसी हथियारों के साथ जागते हुए पहरा दे रहे हैं। यहां अफवाह फैली है कि चोर पहले ड्रोन से रेकी करते हैं और फिर चोरी की वारदात को अंजाम देते हैं। इसका नतीजा यह हुआ कि आएदिन गांव वाले अजनबियों को पीट रहे हैं। यूट्यूबर और आम लोग भीड़ का शिकार हो रहे हैं। पुलिस को सैकड़ों झूठी सूचनाएं मिल रही हैं।

इस डर की शुरुआत जून के पहले हफ्ते में अमरोहा जिले के नौगावां इलाके से हुई, जब 'कच्छा-बनियान गैंग' नामक एक चोरी की वारदात का वीडियो सामने आया। वीडियो में कुछ चोर सिर्फ अंडरवियर पहने हुए दिखे, जिससे अफवाह फैली कि वे शरीर पर तेल लगाकर खुद को पकड़ने से बचाते हैं और अपने साथ सीढ़ियां भी रखते हैं। कुछ दिनों बाद नया डर पैदा हुआ कि ये गैंग अब ड्रोन के जरिए रेकी कर रहा है। रात के समय उड़ते ड्रोन के कुछ वीडियो वायरल हुए और फिर यह खौफ धीरे-धीरे मुरादाबाद, संभल, बरेली, बिजनौर, मेरठ होते हुए पूरे पश्चिमी यूपी और उत्तराखंड में फैल गया।प्रत्येक थाने पर रात में पुलिस की गश्त टीम लगाई गई है। ग्राम प्रधानों और सुरक्षा समितियों के साथ बैठकें की जा रही हैं। ड्रोन रजिस्टर तैयार किया जा रहा है, जिसमें ड्रोन रखने वालों की जानकारी दर्ज की जा रही है।

ड्रोन की दहशत का आलम यह है कि ग्रामीण रात 11 बजे से सुबह 3 बजे तक हथियारों के साथ गश्त कर रहे हैं। जहां अजनबी दिखाई देता है, वहां पिटाई हो जाती है। कई निर्दोष लोग भीड़ के गुस्से का शिकार हो चुके हैं। बुलंदशहर के औरंगाबाद में एक युवक को संदिग्ध समझकर नंगा करके पीटा गया, बाद में पता चला वह नशे में था।  अमरोहा में रास्ता भूलने पर पांच युवकों की पिटाई हुई, एफआईआर दर्ज की गयी। बरेली में प्रेमिका से मिलने आए युवक को 'ड्रोन चोर' समझकर पीटा गया।मेरठ में  हिंडन नदी किनारे ड्रोन से हरियाली का सर्वे कर रही टीम को पीटकर पुलिस के हवाले किया गया, जबकि उनके पास वैध अनुमति थी।हापुड़में  एक युवती को भीड़ ने चोर समझकर पीटा, वीडियो वायरल हुआ।

पुलिस की चुनौती: अफवाह बनाम सच्चाई

पिछले 15 दिनों में सैकड़ों कॉल्स ड्रोन या संदिग्ध गतिविधियों को लेकर पुलिस को मिली हैं। मगर जांच में अब तक कोई संगठित ड्रोन-गैंग सामने नहीं आया है।

क्या कहते हैं पुलिस अधिकारी

डीआईजी कलानिधि नैथानी ने कहा, 'ड्रोन की अधिकतर उड़ानें सरकारी सर्वे कार्यों से जुड़ी हैं। अब रात के समय ड्रोन उड़ाने पर रोक लगा दी गई है। सिर्फ दिन में ड्रोन उड़ाए जाएंगे और वह भी अधिकृत कार्यों के लिए।'

कहां-कहां फैला डर?

ड्रोन अफवाहों का डर यूपी के 12 जिलों और उत्तराखंड के कई इलाकों तक पहुंच चुका है । जिसमें बिजनौर, अमरोहा, मुरादाबाद, मेरठ, बरेली, बुलंदशहर, हापुड़, संभल, सहारनपुर, गाजियाबाद, मुजफ्फरनगर, पीलीभीत, उत्तराखंड के काशीपुर, बाजपुर, किच्छा, रुद्रपुर, खटीमा आदि जिले शामिल है। ड्रोन की अधिकतर उड़ानें सरकारी सर्वे कार्यों से जुड़ी हैं। अब रात के समय ड्रोन उड़ाने पर रोक लगा दी गई है। सिर्फ दिन में ड्रोन उड़ाए जाएंगे और वह भी अधिकृत कार्यों के लिए।

असली सवाल: अफवाहें फैला कौन रहा है?

ड्रोन की उड़ानों से जुड़ी कुछ घटनाएं सच जरूर हैं, लेकिन अब तक किसी भी संगठित गिरोह या गैंग का कोई पुख्ता सबूत नहीं मिला है। सवाल है, ये अफवाहें कौन फैला रहा है और क्यों? कहीं ये किसी शरारती तत्व की साजिश तो नहीं, जो समाज में भय और भ्रम का वातावरण पैदा करना चाहता है?

सावधानी जरूरी, लेकिन सतर्कता के साथ

ड्रोन का डर अब कानून व्यवस्था का मुद्दा बन चुका है। आम नागरिकों की सतर्कता जरूरी है, लेकिन अफवाहों में आकर निर्दोषों की पिटाई करना समाज को हिंसक और अविश्वासी बना सकता है। पुलिस-प्रशासन की पहल सराहनीय है, लेकिन अब ग्रामीणों को भी समझदारी और संयम दिखाने की ज़रूरत है।



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