विश्व हेपेटाइटिस दिवस के अवसर पर सीएमई कार्यक्रम का आयोजन

 मेरठ। मेडिकल कॉलेज, में National Viral Hepatitis Control Programme (NVHCP) के अंतर्गत विश्व हेपेटाइटिस दिवस के अवसर पर मेडिसिन विभाग द्वारा एक सीएमई (CME) कार्यक्रम का आयोजन किया गया।

कार्यक्रम की शुरुआत यूजी एमबीबीएस छात्रों के लिए पोस्टर प्रतियोगिता के आयोजन से हुई। प्रतियोगिता में छात्रों ने चिकित्सा विज्ञान से संबंधित विभिन्न विषयों पर अपने विचार प्रस्तुत किए। प्रतियोगिता में हर्ष सैनी और हिमांशी शर्मा ने प्रथम स्थान,कोमल शर्मा और मोहम्मद तालिब ने द्वितीय स्थान तथा विवेक और शिवानी गुप्ता को तृतीय स्थान प्राप्त हुआ।

इसके अतिरिक्त, मेडिसिन, पीडियाट्रिक्स, स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग (OBGY) और हेपेटाइटिस क्लिनिक की ओपीडी में जन-जागरूकता कार्यक्रम का भी आयोजन किया गया। जिसमें आमजन को हेपेटाइटिस की रोकथाम और उपचार संबंधी विस्तृत जानकारी दी गई।

सीएमई कार्यक्रम में डॉ. अरविंद कुमार (प्रोफेसर, मेडिसिन एवं नोडल अधिकारी, हेपेटाइटिस क्लिनिक), डॉ. स्नेहलता वर्मा (एसोसिएट प्रोफेसर, मेडिसिन) एवं डॉ. रचना सेमवाल (असिस्टेंट प्रोफेसर, मेडिसिन) द्वारा हेपेटाइटिस प्रबंधन एवं इम्युनोग्लोब्युलिन्स पर महत्वपूर्ण जानकारियाँ दी गईं।

इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में प्रमुख अधीक्षक डॉ. धीरज राज बालियान उपस्थित रहे। कार्यक्रम में डॉ. योगिता सिंह (आचार्य एवं विभागाध्यक्ष, मेडिसिन विभाग), डॉ. आभा गुप्ता (आचार्य, मेडिसिन), डॉ. संध्या गौतम (आचार्य, मेडिसिन), डॉ. श्वेता शर्मा (आचार्य, मेडिसिन), डॉ. शकुन सिंह (आचार्य एवं विभागाध्यक्ष, स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग), डॉ. अनुपमा वर्मा (आचार्य एवं विभागाध्यक्ष, पीडियाट्रिक्स), डॉ. प्रीति सिंह (आचार्य), एवं डॉ. नेहा सिंह (आचार्य एवं विभागाध्यक्ष, ब्लड ट्रांसफ्यूज़न एवं इम्यूनोलॉजी विभाग) की गरिमामयी उपस्थिति रही।कार्यक्रम का उद्देश्य हेपेटाइटिस के प्रति जागरूकता फैलाना और इसके रोकथाम व प्रभावी प्रबंधन पर प्रकाश डालना था।जन-जागरूकता कार्यक्रम में मुख्य रूप से हेपेटाइटिस के 4 प्रकारों पर जानकारी दी गई।

1. हेपेटाइटिस A

संक्रमण के स्रोत: दूषित खाना और पानी (मुख के रास्ते, मल-मूत्र के संक्रमण द्वारा)।

लक्षण: बुखार, कमजोरी, पीतल (त्वचा/आंखों का पीला पड़ना), उल्टी।

रोकथाम: वैक्सीन उपलब्ध है; खाना खाने से पहले और शौच के बाद अच्छे से हाथ धोएं।

2. हेपेटाइटिस B

संक्रमण के स्रोत: संक्रमित रक्त या शरीर के तरल पदार्थ (वीर्य, योनि स्राव) से संपर्क। यह असुरक्षित यौन संबंध, इंजेक्शन की सुई/ब्लेड शेयर करने, संक्रमित मां से शिशु में हो सकता है।

यह दीर्घकालिक संक्रमण (क्रॉनिक) का रूप ले सकता है — सिरोसिस, लिवर कैंसर का खतरा।

रोकथाम: जन्म के तुरंत बाद और विशेष परिस्थितियों में बच्चों को 12 घंटे के अंदर HBIG (हेपेटाइटिस बी इम्युनोग्लोब्युलिन) दिया जाता है।

3. हेपेटाइटिस C

संक्रमित खून के संपर्क से फैलता है। सुई/ब्लेड शेयर करना, असुरक्षित चिकित्सा प्रक्रियाओं से खतरा।

कोई वैक्सीन उपलब्ध नहीं है, लेकिन नई दवाओं (DAA) के जरिए 12 सप्ताह में 95% मरीजों का इलाज संभव है ।

4. हेपेटाइटिस E

दूषित खाना और पानी से फैलता है (हेपेटाइटिस A की तरह)।

गर्भवती महिलाओं में गंभीर रूप ले सकता है।

लक्षण: कमजोरी, बुखार, उल्टी, पीतल आदि।

रोकथाम: साफ-सफाई, शुद्ध जल, ताजा भोजन का सेवन।

अन्य महत्वपूर्ण बिंदु:

लाला लाजपत राय मेडिकल कॉलेज के हेपेटाइटिस क्लिनिक में समय पर स्क्रीनिंग और इलाज से रोग पूरी तरह ठीक किया जा सकता है।

संक्रमित माताओं से शिशु को जन्म के 12 घंटे के भीतर HBIG देना आवश्यक है जिससे आजीवन संक्रमण से बचाव होता है।

हेपेटाइटिस बी की रोकथाम के लिए नवजात को तुरंत टीका लगवाएं।

नियमित जांच करवाएं, विशेषकर यदि फैमिली हिस्ट्री हो।

हेपेटाइटिस C के लिए अब 95% इलाज संभव है।


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