लोग क्या कहेगे?
सुनो.. इतना मत सोचो,
वो लोग क्या ही कहेंगे?
जो भी होगा उनका मन,
लोगों का काम है कहना।
सुनो.. इतना मत सहमो,
वो लोग क्या ही कहेंगे?
कर्तव्य गांठ तुम बांध लो,
संघर्ष पथ की ज्वाला पर,
तुम्हे अकेले ही है चलना।
सुनो.. तुम डरो नहीं,
वो साये जो मन को घेरें?
लक्ष्य के पीछे भागो तुम,
तुम्हे ही है स्वयं को संवारना।
क्या फर्क पड़ता है दुनिया से?
दुनिया का काम तो है ही कहना।
हार कभी तुम मत मानना,
हर चोट तुम्हें ये सिखाएगी,
कैसे है तुम्हे स्वयं संभलना।
सुनो... अब तुम मत सोचो,
लोगो का तो काम ही है हंसना।
ये सफर सिर्फ तुम्हारा है,
लिख दो तुम अपनी कहानी।
सुनो... अब आगे बढ़ते जाओ,
अपने पथ पर अडिग रहो तुम,
वो लोग तो पल संग बदलेंगे,
सुख में साथी सौ जन्मे लेते,
दुख के तुम हो स्वयं सारथी।
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- अम्बिका कुशवाहा अम्बी, पटना-1।
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