कॉपीराइट कैसे फाइल करे पर व्याख्यान का आयोजन

 मेरठ। सरदार पटेल सुभारती इंस्टीट्यूट ऑफ लॉ, स्वामी विवेकानन्द सुभारती विश्वविद्यालय द्वारा ‘‘कॉपीराइट कैसे फाइल करें’’ विषय पर  एक व्याख्यान का आयोजन सुभारती लॉ कॉलेज के निदेशक, राजेश चन्द्रा (पूर्व न्यायमूर्ति  उच्च न्यायालय, प्रयागराज) के मार्ग दर्शन में तथा प्रो. डॉ. वैभव गोयल भारतीय, संकायाध्यक्ष एवं प्रधानाचार्य, सुभारती विधि संस्थान के संरक्षण में किया गया ।

किस प्रकार साहित्यिक, कला, गीत, संगीत आदि पर विशिष्ट अधिकार द्वारा सुरक्षित किया जा सकता है, एवं उसके लिए किन-किन बातों को ध्यान में रखना चाहिए व क्या आवश्यक कागज चाहिए के विषय में बताते हुए आफरीन अल्मास ने बताया कि आप अपने साहित्यिक कार्य, आडियो विजुअल कंटेंट, गीत संगीत, पेंटिंग, पोस्टर, वीडियो गेम आदि के लिए आप कॉपीराइट ले सकते हैं। कॉपीराइट का मालिकाना हक रखने वाले व्यक्ति के पास इस कॉन्टेस्ट के इस्तेमाल करने का खास अधिकार होता है। उन्होने बताया कि कॉपीराइट एक विशेष कानूनी अधिकार है जो किसी निश्चित कार्य की सीमित समय के लिए नकल करने की अनुमति देता है या उस पर रोक लगाता है। उन्होने बताया कि अलग-अलग कार्य के लिए शुल्क दर भी अलग-अलग हैं। लेकिन साहित्यिक प्रतिलिप्यधिकार के लिए 500/-शुल्क जमा करना होता है। उन्होने बताया की विश्वविद्यालय परिसर स्थित बौद्धिक सम्पदा पंजीकरण कार्यालय से आप इस विषय में विस्तृत जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। इसके लिए आपको अपना कार्य विभाग को ईमेल के जरिए भेज देना है, वहीं से ईफाइलिंग की जाएगी। आपका प्रार्थना-पत्र मिलने के बाद रजिस्टर प्रार्थी को एक डायरी नम्बर जारी करता है, जिसके बाद 30 दिन का समय आपके लिए दिया जाता है। यदि आपत्ति नहीं आती है, तो स्क्रूटनी के बाद प्रमाण -पत्र जारी कर देता है। प्रतिलिप्यधिकार का लाभ व्यक्ति के जीवन पर्यन्त तथा मृत्यु के उपरान्त भी 60 वर्ष तक लगातार चलता रहता है।

कितने समय में हमें अपने कार्य के लिए कॉपीराइट मिल जाता हैं, इस प्रश्न के जवाब में उन्होंने स्वयम् का उदाहरण देते हुए कहा कि उन्होंने जुलाई 2024 में आवेदन किया था, और सितम्बर-2024 के अन्त तक उन्हें उनका पंजीकरण प्रमाण-पत्र मिल गया है।

क्या हमारा साहित्यिक कार्य प्रकाशित होगा तभी हम प्रतिलिप्यधिकार के लिए आवेदन कर सकते है, के जवाब में उन्होंने कहा कि प्रतिलिप्याधिकार प्राप्त करने के लिए यहीं जरूरी नहीं की आपका कार्य प्रकाशित ही हो। आप अप्रकाशित कार्य के लिए भी आप आवेदन कर सकते हैं।. डॉ वैभव गोयल भारतीय ने उन्हें शुभकामनाएं देते हुए अन्य शिक्षक-शिक्षिकाओं को भी उनके साहित्यिक, गीत-संगीत आदि को प्रतिलिप्याधिकार द्वारा संरक्षित करने के लिए प्रेरित किया।

कार्यक्रम में प्रो० (डॉ०) रीना बिश्नोई, डॉ० सारिका त्यागी, डॉ० प्रेमचन्द्र, डॉ० अजय राज सिंह, एना सिसोदिया, सोनल जैन, अरशद आलम,शालिनी गोयल, आशुतोष देशवाल तथा हर्षित आदि शिक्षक-शिक्षिकाएं उपस्थित रहे।

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