पूरी दुनिया को हैं भारत से काफी उम्मीदेंः डियाना मिस्कैरिचीने

- आईआईएमटी पहुंची लिथुआनिया की राजदूत डियाना मिस्कैरिचीने, भारत के साथ गहराते रिश्तों पर जताया गर्व

मेरठ। यूरोप के खूबसूरत देश लिथुआनिया की राजदूत डियाना मिस्केरिचीने ने आईआईएमटी विश्वविद्यालय पहुंचकर छात्रों से संवाद किया।। मेरठ का जिक्र करते हुए डियाना ने बताया कि वो इतिहास की छात्रा रही हैं और पूरी दुनिया में भारत की आजादी की पहली लड़ाई के तौर पर 1857 की क्रांति में मेरठ का जिक्र किया जाता है। मेरठ में छात्रों से मुलाकात के बाद उन्होंने मेरठ के सभी ऐतिहासिक स्थलों को देखने की भी ख्वाहिश जताई। लिथुआनिया की राजदूत होने के अलावा डियाना कई भाषाओं की जानकार, इतिहासकार, ऐतिहासिक स्थलों की शौकीन सैलानी और कई किताबों की लेखक भी रही हैं।

सोमवार को लिथुआनिया की राजदूत डियाना मिस्केरिचीने का आईआईएमटी विश्वविद्यालय में आगमन हुआ। विश्वविद्यालय की कुलपति डॉ0 दीपा शर्मा ने राजदूत महोदया का स्वागत किया। आईआईएमटी विश्वविद्यालय के मुख्य सभागार में आयोजित कार्यक्रम में पहुंची राजदूत डियाना मिस्केरिचीने का स्वागत रेडियो डायरेक्टर डॉ0 सुगंधा श्रोतिया व आईआईएमटी इंजीनियरिंग कॉलेज के डायरेक्टर डॉ संजीव माहेश्वरी ने किया। कार्यक्रम का संचालन कर रहीं एकता शर्मा ने राजदूत डियाना मिस्केरिचीने का जीवन परिचय दिया।

छात्रों को संबोधित करते हुए राजदूत डियाना मिस्केरिचीने ने बताया कि भारत में आकर उन्हें बहुत अच्छा लगता है बचपन से ही भारत में आना और यहां काम करना उनका सपना रहा है। मार्च में 1990 में रशिया से स्वतंत्र होने से पहले से ही उनके देश में भारत को आदर्श माना जाता था। राजदूत होने से पहले भी कई बार वो भारत में आ चुकी हैं। 

अपने देश लिथुआनिया के बारे में जानकारी देते हुए राजदूत महोदया ने बताया कि सिर्फ 30 लाख की आबादी वाले लिथुआनिया का आकार भारत के हिमाचल प्रदेश जैसा ही है। मगर वहां स्पोर्ट्स खासकर बॉलीवॉल और तैराकी को बहुत पसंद किया जाता है। हर बार ओलंपिक में कम से कम 5 पदक तो उनके देश में आ ही जाते हैं। इसके अलावा टेनिस और बाकी खेलों को भी लिथुआनिया में बेहद पसंद किया जाता है। बाल्टिक रीजन में बसे लिथुआनिया में ज्यादा गर्मी नहीं पड़ती और गर्मियों में अधिकतम तापमान 20 से 25 डिग्री ही पहुंच पाता है। मार्च 1990 में सोवियत रूस से मुक्त होने के बाद से लुथियानिया ने विज्ञान प्रोद्योगिकी के क्षेत्र में काफी तरक्की की है। 

भारत से पहले चीन में लिथुआनिया की राजदूत रह चुकी डियाना ने बताया कि रशिया और चीन की ओर से साइबर क्राइम लगातार बढ़ते जा रहे हैं। मगर अब साइबर क्राइम से लड़ने के लिए उनका देश दुनिया के छठें सबसे ताकतवर देश के तौर पर जाना जाता है। छात्रों ने डियाना से लुथिआनिया और वहां की संस्कृति के बारे में खुलकर सवाल किए। एक सवाल के जवाब में उन्होंने बताया कि यूरोप के बाकी देशों के मुकाबले उनके देश में कॉस्ट ऑफ लिविंग काफी कम है इसलिए इंजीनियरिंग के अलावा बाकी विषयों को पढ़ने के लिए भी काफी संख्या में छात्र लुथिआनिया में आते रहते हैं। लुथिआनिया के विश्वविद्यालय में मेडिकल साइंस में आयुर्वेद की भी पढ़ाई की जाती है। वहीं सौ से ज्यादा स्कूलों और स्टूडियो में योग शिक्षा दी जाती है। 

कार्यक्रम के समापन पर आईआईएमटी विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार राकेश कुमार ने स्मृति चिन्ह देकर उनका सम्मान किया। आईआईएमटी इंजीनियरिंग कॉलेज के डायरेक्टर डॉ संजीव माहेश्वरी ने उनका आभार जताया। कार्यक्रम की मुख्य संयोजिका डॉ0 सुगंधा श्रोतिया ने राजदूत महोदया से पुनः विश्वविद्यालय आगमन का आग्रह किया।

 कार्यक्रम का संचालन डॉ एकता शर्मा ने किया। इस मौके पर निदेशक प्रशासन डॉ0 संदीप कुमार, कॉमर्स विभाग के डीन डॉ सतीश कुमार सिंह, पत्रकारिता विभाग के डिप्टी डीन संजीब मिश्रा व सभी विभागों के शिक्षक और छात्र भारी संख्या में मौजूद रहे।

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