बढ़ता हिंसा का नासूर

 इलमा अजीम 
मणिपुर में मई से शुरू हुआ हिंसा-आगजनी का तांडव थमने का नाम नहीं ले रहा है। पिछले कुछ दिनों की स्थिति देखकर लग रहा था कि राज्य शांति की तरफ बढ़ेगा, लेकिन इंफाल में नये सिरे से हिंसा बढ़ गई है। सरकारी सूचना के मुताबिक उपद्रवियों ने दो घर जला दिए। इससे लगता नहीं है कि हिंसा को थामने में कोई कदम मददगार हो रहा है। मैतेई समुदाय के दो छात्रों के अपहरण व हत्या के बाद शुरू हुई हिंसा में पुलिस से टकराव में डेढ़ सौ के करीब छात्र घायल हो चुके हैं। हालांकि, कूकी बहुल पहाड़ी इलाकों में अफस्पा लगाने और मैतेई बहुल इलाकों को अफस्पा से मुक्त रखने को लेकर भी सवाल उठाये जा रहे हैं। विपक्षी दलों का कहना है कि कानून व्यवस्था में तभी सुधार संभव है जब पूरे राज्य में अफस्पा लागू हो। उनका मानना है कि यह फैसला रणनीतिक कम व राजनीतिक ज्यादा है। दरअसल, स्थानीय सुरक्षा तंत्र द्वारा गृह मंत्रालय को अवगत कराया गया है कि राज्य में सक्रिय कई प्रतिबंधित उग्रवादी संगठन कैडर, हथियार व गोला-बारूद जुटा रहे हैं। यहां तक कि ये संगठन म्यांमार से अपने मददगारों के संपर्क में हैं और राज्य में अपना आधार मजबूत कर रहे हैं।


 जिनके तार चीन तक जुड़ते हैं।निश्चित रूप से फिलहाल मणिपुर में विभिन्न संगठनों द्वारा जिस तरह हथियार व गोला बारूद जुटाया जा रहा है, उससे नहीं लगता कि यह संघर्ष जल्दी थमेगा। इस संघर्ष में विदेशी फेक्टर का शामिल होना, जैसे कि राज्य सरकार भी कह रही है, बेहद चिंता की बात है। जाहिर है राज्य में तीन मई के बाद भड़की हिंसा के बाद जो शांति स्थापित करने की कोशिश हो रही थी, उसे हालिया हिंसा से फिर झटका लगा है। राज्य में हिंसा में बड़ी संख्या में लोगों का मरना और हजारों का बेघर होना, ऐसे जख्म दे गया है, जिन्हें जल्दी से भरना कठिन होगा। फिलवक्त हाल ये है कि राज्य में हिंसा की घटनाओं का क्रम जारी है। सबसे बड़ी चिंता की बात यह है कि एक समुदाय में पुलिस-प्रशासन को लेकर अविश्वास का संकट बना हुआ है। जिसके चलते ही सुप्रीम कोर्ट ने मामले की निगरानी के लिये पूर्व महिला जजों की एक समिति बनायी थी। जिसका दायित्व राहत व पुनर्वास के काम की निगरानी करना था। पुलिस के प्रति अविश्वास के चलते ही निगरानी के लिये बाहरी राज्यों के पुलिस अधिकारियों की राज्य में तैनाती के आदेश अदालत ने दिये थे। यह चिंताजनक बात है कि लोग पुलिस-प्रशासन के प्रति अविश्वास जताएं। बहरहाल, इस संकट के समाधान को केंद्र-राज्य के साझे प्रयासों की सख्त जरूरत है।

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