बौद्धिक संपदा अधिकार से बचाएं अपनी दिमागी मेहनत की कमाई

-नेशनल टेक्नोलॉजी डे पर आईआईएमटी विवि और सेल फ़ॉर आईपीआर प्रोमोशन एंड मैनेजमेंट के संयुक्त तत्वावधान में राष्ट्रीय सेमिनार का आयोजन
- विशेषज्ञों ने दिए पेटेंट के टिप्स
मेरठ। अगर आप लेखक हैं, संगीत बनाते हैं, गाने लिखते हैं कविताएं सुनाते हैं या फिर सिर्फ आईटी सेक्टर में नई खोज करने में जुटे हैं तो आपकी मेहनत पर अधिकार भी सिर्फ आपका ही होता है। किसी को भी आपके लेखन या रचना का कोई अवैध इस्तेमाल करने की इजाजत नहीं हो सकती। आपके इसी बौद्धिक संपदा अधिकार की सुरक्षा के लिए आईपीआर कानून आपको कई सारी सुरक्षा मुहैय्या कराते हैं। इसी अधिकार के बारे में जानकारी देने के लिए आईआईएमटी विवि के  स्कूल ऑफ मीडिया, फ़िल्म एंड टेलीविजन स्टडीज और सीआईपीएएम  (डीपीआईआईटी), मिनिस्ट्री ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री के संयुक्त तत्वावधान में ऑनलाइन सेमिनार आयोजित हुई। देश भर के सैंकड़ों प्रतिभागियों ने ऑनलाइन सेमिनार में शिरकत करते हुए अपने सवाल भी रखे। लगभग 30 रिसर्च पेपर भी सेमिनार में प्रस्तुत किये गए।
नेशनल टेक्नोलॉजी डे पर आयोजित सेमिनार का शुभारंभ प्रति कुलपति डॉ. एसडी शर्मा ने विषय की प्रस्तावना रखकर किया। सेमिनार में पेटेंट, औद्योगिक डिजाइन, ट्रेडमार्क, कॉपीराइट, भौगोलिक संकेत, व्यापार रहस्य, राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय आईपी कानून, पंजीकरण की प्रक्रिया, औद्योगिक हस्तांतरण की बुनियादी बातें, पेटेंट और पेटेंट कानून आदि जैसे उपकरणों के परिचय पर विस्तृत रूप से चर्चा की गई।
सेमिनार को संबोधित करते हुए सीआईपीएएम, डीपीआईआईटी की मैनेजर चारु ने  ‘रजिस्ट्रेशन ऑफ ट्रेडमार्क एंड एडवांटेज ऑफ आईपीआर इन क्रिएटिव वर्क्स’ विषय पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने विस्तार के साथ बौद्धिक संपदा अधिकार या इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी राइट्स को समझाया।  
‘पेटेंट ड्राफ्टिंग एंड द फिलिंग प्रोसेज़ ऑफ आईपीआर’ विषय पर विचार रखते हुए मैनेजर रुचिता सिंह ने बताया कि किसी भी संपत्ति की तरह ही बौद्धिक संपदा पर भी अधिकार होता है। अपने मालिकाना अधिकार की रक्षा करने के लिए जरूरी कदम उठाने जरूरी होते हैं। इसी अधिकार की रक्षा करने के लिए आईपीआर का गठन किया गया था।
‘इंट्रोडक्शन टू कॉपीराइट, केस लॉज़,  रजिस्ट्रेशन प्रोसेज़ एंड क्रिएटिव फील्ड’ विषय पर असिस्टेंट मैनेजर काजोल ने खोज की नकल और दुरुपयोग को रोकने के बारे में बताया। अलग-अलग कानूनों और नियमों के बारे में जानकारी देते हुए उन्होंने पेटेंट के लिए अप्लाई करने की महत्ता और ट्रेड मार्क को नियमित करवाने के बारे में बताया।
सेमिनार के अंत में स्कूल ऑफ मीडिया, फ़िल्म एंड टेलीविजन स्टडीज के डीन डॉ. रविन्द्र प्रताप राणा ने अतिथियों का आभार जताते हुए सेमिनार को प्रतिभागियों के लिए उपयोगी बताया। उन्होंने कहा कि डिजिटल दौर में बौद्धिक संपदा अधिकारों के प्रति जागरूकता पर इस तरह के उपयोगी आयोजन अति महत्वपूर्ण हैं।
इस वर्चुअल सेमिनार को सफल बनाने में कॉर्डिनेटर डॉ. पृथ्वी सेंगर का विशेष योगदान रहा। संचालन विभोर गौड़ ने किया। इस दौरान सीनियर प्रोफेसर डॉ. एनके मिश्रा, विभागाध्यक्ष विशाल शर्मा, डॉ. विवेक सिंह, सचिन गोस्वामी, अमित राय, निशांत सागर और मीडिया प्रभारी सुनील शर्मा समेत अन्य शिक्षक एवं सैकड़ों विद्यार्थी शामिल हुए।

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