हीमोफिलिया विशेष 

आज मनाया जाएगा हीमोफिलिया दिवस आज 

 सही समय पर उपचार मिलने से इस बीमारी से मिल सकता है छूटकारा 

 मेडिकल कालेज में 250 से ज्यादा मरीज

मेरठ।  हर साल आज यानी 17 अप्रैल को विश्व हीमोफिलिया दिवस मनाया जाता है। यह हीमोफिलिया और अन्य रक्तस्राव जैसी गंभीर समस्या के प्रति जागरूकता फैलाने का दिन है।

हिमोफीलिया एक आनुवंशिक रक्त विकार है। इससे ग्रसित व्यक्ति के खून का थक्का बनने की सामान्य प्रक्रिया प्रभावित होती है जिसके परिणामस्वरुप पीड़ित व्यक्ति के जोड़ों व मांसपेशियों में स्वत:  आंतरिक रक्तस्राव होने लगता है तथा कई बार असहनीय दर्द भी होता है। यह असाध्य रोग है अर्थात इसका कोई स्थाई इलाज नहीं है। इसका उचित उपचार की सहायता से केवल रोक थाम किया जा सकता है जिससे पीड़ित व्यक्ति सामान्य जीवन जी सकें। हिमोफीलिया के उपचार में पीड़ित व्यक्ति के रक्त में अनुपस्थित आवश्यक अवयव की कमी को कृत्रिम रूप से तैयार अवयव (फैक्टर) द्वारा पूरा किया जाता है। इस प्रक्रिया को "फैक्टर रिप्लेसमेंट थैरेपी" के नाम से जाना जाता है। प्रत्येक बिल्डिंग एपिसोड के बाद इसकी आवश्यकता होती है। हिमोफीलिया के दो प्रकार हैं: हिमोफीलिया A व हिमोफीलिया B, जिसमें उपचार के लिए क्रमस: फैक्टर 8 व फैक्टर 9 की आवश्यकता पड़ती है। हीमोफीलिया A इसका सर्वाधिक पाया जाने वाला प्रकार है।

राजन चौधरी ने बताया की मेडिकल कॉलेज, मेरठ में फ्री इंजेक्शन मिल रहा है और संस्था के प्रयास से मेडिकल प्रशासन के साथ मिलकर वो लगातार बेहतर करने के लिए कार्य कर रहे है, वो चाहते है की मेडिकल कालेज में 250 से ज्यादा मरीज है जो की बहुत बड़ी संख्या है, मरीजों के लिए एक अलग हीमोफीलिया सेंटर बने जिसकी डिमांड वो पिछले 2 वर्षो से लगातार कर भी रहे है। साथ ही पत्रकार बंधुओ से अनुरोध भी किया की वो साथ आए और जागरूकता अभियान से जुड़ कर समय समय पर अखबार के माध्यम से हीमोफीलिया के बारे में खबर निकालते रहे जिससे हर किसी को इसकी जानकारी हो सके।

राजन चौधरी (सांस्थापक व राष्ट्रीय अध्यक्ष) वो खुद भी हीमोफिलिक है उन्होंने बताया की आई ड्रीम टू  ट्रस्ट की स्थापना 2018 में की गई थी संस्था सम्पूर्ण भारत में कार्यरत है। संस्था उत्तर भारत के लगभग हर क्षेत्र में हीमोफीलिया पीड़ितों की हर संभव मदद कर रही है, फिर चाहे वो समय समय पर पीड़ितों के लिए निशुल्क जांच शिविर का आयोजन करना हो या उन्हें निशुल्क दवाई दिलवाना, इसी दिशा में काम करने के लिए "आई ड्रीम टू ट्रस्ट" की स्थापना की गई है, जो पीड़ित व्यक्तियों को निशुल्क सहायता प्रदान करने हेतु तत्पर है। संस्था के कुछ सदस्य किसी न किसी लाइलाज बीमारी से पीड़ित है और वो इस दर्द को बखूबी समझते और महसूस करते हैं।

संस्था लगातार शहर से गांव तक जमीनी स्तर पर जागरूकता अभियान चला कर इस बीमारी के प्रति अधिक से अधिक लोगो को जागरूक कर रही है।

संस्था संस्थापक राजन चौधरी जी ने इस विश्व हीमोफीलिया दिवस पर अपने हीमोफिलिक भाईयो के लिए एक संदेश दिया है उन्होंने बताया की कुछ साल पहले बहुत दिक्कतें होती थी, कही भी फ्री इंजेक्शन नही मिलते थे, दिल्ली से भी खरीद कर इंजेक्शन (फैक्टर) लगवाने पड़ते थे जो की आम इंसान की पहुंच से बहार है क्योंकि हीमोफीलिया में लगने वाले एक इंजेक्शन की कीमत दस हजार से ज्यादा है फिर भी उन्होंने हिम्मत नही हारी अपनी पढ़ाई (मास्टर डिग्री) पूरी की उन्होंने कहा अब समय बदल चुका है मरीजों को फ्री फैक्टर (इंजेक्शन) कुछ हॉस्पिटल में लग जाते है, जागरूकता के लिए काफी संस्थाएं काम कर रही है देश के विभिन्न हिस्सों में व्हाट्सऐप ग्रुप है जहां सभी एक साथ जुड़े हुए है। उन्होंने हीमोफिलिक और उनके परिवार से आग्रह किया । 



No comments:

Post a Comment

Popular Posts