राज्य सूचना आयुक्त ने दिया अफसरों को निर्देश
मांगी गयी सूचना आवेदक को उपलब्ध कराएंभदोही।
राज्य सूचना आयुक्त प्रमोद कुमार तिवारी मंगलवार ने गेस्ट हाउस ज्ञानपुर पहुंचकर जिलाधिकारी गौरांग राठी व पुलिस अधीक्षक डॉ अनिल कुमार के साथ राज्य सूचना आयोग में लंबित प्रकरणों की समीक्षा किया।
राज्य सूचना आयुक्त ने इस स्थिति पर संतोष व्यक्त किया तथा उन्होंने निर्देश दिया कि सभी प्रकरणों का समयांतर्गत निस्तारण सुनिश्चित करें। मांगी गई सूचना के सही तथ्यों की जानकारी दें। उन्होंने बताया कि सूचना अधिनियम 2005 में सूचना दिए जाने का अधिकार प्रदान किया गया है। सादे कागज पर दिए गए आवेदन पत्र के साथ रूपये 10 का पोस्टल ऑर्डर लगाना अनिवार्य होगा। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि वे समय से सूचना प्रदान कर अधिनियम के निर्देशों का कड़ाई से पालन करें। इसमें किसी प्रकार की शिथिलता या लापरवाही नहीं होनी चाहिए।
उन्होंने निर्देश दिया कि प्रत्येक कार्यालय में सूचना अधिकार अधिनियम के तहत प्राप्त आवेदन पत्रों का रजिस्टर रखा जाए । उस रजिस्टर में आवेदन पत्र प्राप्त करने की तिथि, निस्तारण की तिथि तथा अन्य सूचनाएं क्रम से दर्ज की जाए। जिला स्तरीय अधिकारी, जन सूचना अधिकारी नियमित रूप से रजिस्टर का निरीक्षण करते रहें तथा प्राप्त मामलों का समय बद्ध निस्तारण करें।
राज्य सूचना आयुक्त प्रमोद कुमार तिवारी ने बताया कि सूचना का अधिकार एक महत्वपूर्ण एवं पवित्र अधिकार है। भारत की संसद ने आम नागरिकों के सशक्तिकरण के लिए इस क़ानून को पारित किया है।आम नागरिकों को यह अधिकार देता है कि वह किसी भी लोक प्राधिकारी व उसके अधीन अधिकारी से सूचना मांगे जाने पर 30 दिन के अंदर जानकारी देना जरूरी होता है।
उन्होंने कहा कि यदि जनसूचना अधिकारी निर्धारित अवधि में मांगी गयी सूचना देने में असमर्थ रहता है तो वादी प्रथम अपीलीय अधिकारी के यहां अपील कर सकता है।


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