विधायकों की भी जिम्मेदारी सुनिश्चित करे सरकार !
- डॉ. अजय कुमार मिश्रा
लोकतंत्र की सबसे प्रभावशाली खूबसूरती यही है की जनता सरकार चुनती है और चुनी हुई सरकार जनता के लिए कार्य करती है। देश में संविधान लागू होने के पश्चात् से यह व्यवस्था चल रही है। देश और प्रदेश की संरचना के अनुरूप कार्यो, नियमों और योजनाओं का संचालन किया जाता रहा है। प्रत्येक पांच वर्ष पश्चात् सरकार के कार्यों का मूल्यांकन होता है और पुनः सत्ता में लाने या न लाने का कार्य जनता करती है। समस्या और समाधान दोनों एक ही सिक्के के दो पहलू हैं।




आज के आधुनिकतम व्यवस्था में जहां परम्परागत समस्याओं का समाधान तेजी से हुआ है वही नयी समस्याओं ने कई रूपों में जन्म भी लिया है जिसकी चर्चा परिचर्चा सभी जगह पर हो रही है। उत्तर प्रदेश जनसँख्या की दृष्टि से देश का न केवल सबसे बड़ा राज्य है बल्कि देश के विकास में इसकी अति महत्वपूर्ण भूमिका हमेशा से रही है। तभी तो देश को सबसे अधिक प्रधानमंत्री देने वाला प्रदेश यही है। तकरीबन 20 करोड़ से अधिक आबादी का प्रदेश जिसकी स्थापना या यूँ कहें अस्तित्व का स्वरुप 24 जनवरी 1952 में आया, आज भी कई जमीनी आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए संघर्षरत है । 75 जिलें 351 से अधिक तहसीलों के माध्यम से विकास की बात हमेशा होती रही है। इतिहास इस बात का गवाह रहा है की यहाँ की जनता ने उसे ही चुन कर सत्ता में भेजा जिसने उनका भरोसा जीता और विकास की एक उम्मीद दिखाई साथ ही जमीनी रूप से कार्य भी किया। यदि हम सिर्फ 15 वर्ष पूर्व की बात करें तो प्रदेश में राजनैतिक अस्थिरता रही थी। 2007 में बहुजन समाजवादी पार्टी, 2012 में समाजवादी पार्टी, 2017 में भारतीय जनता पार्टी पर विश्वास करके जनता ने अपेक्षित परिणाम को पूरा करने की उम्मीद लगा रखी थी, परन्तु बहुजन समाजवादी पार्टी और समाजवादी पार्टी को दोबारा सत्ता में न लाने का सीधा सन्देश यही गया की जनता उनसे खुश नहीं है | वही भारतीय जनता पार्टी को पुनः सत्ता में ला कर के जनता ने यह प्रमाणित किया की उनकी उम्मीदे, आशाएँ और आकांक्षाएं पूरी हो रही है।
किसी भी उपलब्धि के लिए परिश्रम, संगठन और लोग करते है पर उसके लाभ हानि की जिम्मेदारी सीधे नेतृत्व करने वाले व्यक्ति पर जाती है।
ठीक वैसे ही उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में पुनः भारतीय जनता पार्टी को सत्ता में जनता द्वारा ले आना योगी आदित्यनाथ में जनता का भरोसा और गहरा विश्वास प्रदर्शित करता है।
योगी आदित्यनाथ के पूर्व 20 लोग अलग – अलग अवधि में प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे हैं। प्रदेश में सर्वाधिक समयावधि तक शासन कांग्रेस पार्टी ने किया है, पर प्रदेश की छवि जिस तरह से अन्य प्रदेशो और वैश्विक स्तर पर थी वह किसी से छिपी नहीं है। योगी के शासनकाल में न केवल छवि परिवर्तित हुई है बल्कि विकास की प्रतिबद्धता चारों तरफ दिखाई पड़ रही है। प्रदेश के किसी भी निवासी को शायद ही योगी के परिश्रम और कार्यो पर तनिक मात्र संदेह हों, पर इस बात से भी इंकार नही किया जा सकता है की लाख खूबियाँ होने के बावजूद योगी आदित्यनाथ के पास इतना समय नहीं की सभी जिलों के विकास का नियमित मूल्यांकन कर सकें। ऐसे में आवश्यकता इस बात की है कि प्रत्येक विधानसभा से निर्वाचित विधायक को उनके विधानसभा क्षेत्र के लोगों के विकास के लिए जिम्मेदार बनाया जाये और मूल्यांकित करने की एक प्रक्रिया भी बनायीं जाए।
प्रदेश के अब तक के सबसे सशक्त प्रभावशाली, परिश्रमी, नीति नियमों को बनाने और लागू करने में अग्रसर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ है और जिस तरह से कई भूमिकाओं में लगे हुए है वह वास्तव में न केवल सराहनीय है बल्कि प्रशंसा के पात्र भी है, परन्तु क्या सभी विधायक अपने नैतिक दायित्वों का इन्ही के अनुरूप निर्वहन कर रहें है ? इसका जबाब कुछ लिखने की अपेक्षा स्वयं समझने में है। अब जरूरत इस बात की है की प्रदेश के मुखियां सभी विधायकों के लिए यह सुनिश्चित करें की जनता से जुड़े सभी समस्याओं का निस्तारण अविलम्ब करें, योजनाओं को जन जन तक पहुंचाए और सबका साथ, सबका विकास की बातों को अधिक से अधिक अपने विधानसभा क्षेत्र में चरितार्थ करें। योगी आदित्यनाथ विधायक के रूप में गोरखपुर क्षेत्र की जनता का विकास जिस तरह से कर रहें है प्रदेश की प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र की चाहत उसी विकास की है और यह तभी संभव हो पायेगा जब प्रतिबद्धता के साथ सभी विधायक अपने क्षेत्र के लिए नियमित कार्य करेगें।  दूसरी बार सत्ता मिलने के पीछे जहाँ कारण जनता का विश्वास होता है वही चुनौतियाँ भी अत्यधिक होती है क्योंकि शासन के पांच वर्ष व्यतीत होने के पश्चात लोगों की अपेक्षाएं भी बढ़ जाती है।
प्रदेश के विकास के लिए, आम जन के विकास के लिए सरकार ढेरों कार्य कर रही है और नियमित नीति और नियम भी बना रही है पर कुछ बातें और आवश्यकताएँ ऐसी है जिनपर सरकार को पुनः विचार करना चाहिए और कार्य करना चाहिए। उदहारण के तौर पर रोजगार के नए अवसरों का सृजन करना, राज्य सरकार के अधीन खाली पदों पर पारदर्शी तरीके से अविलम्ब भर्तियाँ करना, महंगाई पर नियंत्रण लाने के लिए प्रयास करना, सामाजिक लाभ एवं जन उपयोगी योजनाओं को विधायकों के माध्यम से घर-घर पंहुचाने के लिए उन्हें जिम्मेदार बनाया जाना, स्वास्थ्य सेवाओं में विगत पांच वर्षो में सुधार हुआ है पर अभी भी बड़े सुधार की जरुरत है उस पर त्वरित रूप से कार्य करना, लंबित जनसँख्या नियम लाना और प्रत्येक विधायकों के कार्यो का वार्षिक मूल्यांकन जनता द्वारा करवाया जाना चाहिए, जिससे प्रदेश के विकास को न केवल गति मिलेगी बल्कि जनता और सरकार में पारदर्शिता के साथ-साथ विश्वास भी बढ़ेगा। यह इसलिए और अधिक महत्वपूर्ण है क्योंकि सत्ता में बने रहने के लिए जनता का विश्वास एक दो बार नहीं बल्कि लगातार जितने की जरूरत होती है।

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