फोन पर मिली मनहूस खबर
साथी की गोलियों से बिहार के तीन जवानों की मौत
बिहार:- छत्तीसगढ़ के सकुमा में रविवार की रात सीआरपीएफ कैंप में साथी जवान ने ही तीन की जान ले ली। मरने वाले तीनों जवान बिहार के भोजपुर, कैमूर व रोहतास के रहने वाले थे और मारने वाला जवान भी जहानाबाद (बिहार) का है। जहानाबाद के साथी जवान रितेश रंजन की ओर से की गयी फायरिंग में भोजपुर के राजमणि यादव, कैमूर के धनजी सिंह और रोहतास के धमेंद्र सिंह की मौत जान चली गई। घटना की सूचना मिलते ही परिजनों में कोहराम मच गया। आर/जगदीशपुर के अनुसार राजमणि यादव बिहिया थाना क्षेत्र के समरदह गांव निवासी स्व. रामजी सिंह के पुत्र थे। उनका परिवार पिछले कुछ सालों से जगदीशपुर थाना क्षेत्र के दुल्हिनगंज बाजार में रहता है। सोमवार की तड़के करीब तीन बजे मोबाइल की घंटी बजते ही जवान राजमणि यादव के घर में कोहराम मच गया। अचानक महिलाओं की चीत्कार से मोहल्ले के लोगों की नींद खुली, तो घटना की जानकारी मिली। इसके बाद भोजपुर के दुल्हिनगंज से समरदह और बक्सर जिले के मनिछपरा गांव तक शोक की लहर दौड़ गयी। छठ महापर्व की तैयारी के बीच सोमवार को पौ फटने से पहले मनहूस खबर मिलने से गांव का पूरा माहौल गमगीन हो उठा। वहीं नुआंव (कैमूर) एसं के अनुसार सातो एंवती के नईकोट टोला के लाल धनजी सिंह की मौत खबर मिलते ही गांव में मातम छा गया। ग्रामीणों ने बताया कि धनजी सिंह 2012 में सीआरपीएफ में भर्ती हुए थे। पत्नी रूपा देवी रोते रोते बेहोश हो जा रही हैं। पिता महेंद्र सिंह, मां सरस्वती देवी, छोटे भाई दितिन सिंह को धनजी की मौत की खबर पर विश्वास ही नहीं हो रहा। धनजी सिंह की छह वर्ष पहले ही शादी हुई थी। धनजी को दो वर्षीय बेटा ओम व तीन वर्ष की बेटी लक्ष्मी, यही दो संताने हैं। दोनों मासूम पिता की मौत की खबर से अनजान हैं। उन्हें कुछ समझ में ही नहीं आ रहा कि घर के सभी लोग क्यों रोए जा रहे। इधर सासाराम/संझौली हिटी के अनुसार संझौली के गरुणा गांव के सीआरपीएफ जवान की साथी ने ही गोली मार कर जान ले ली। धर्मेंद्र सिंह की मौत इलाज के दौरान अस्पताल में हो गई। इसकी सूचना परिजनों को मिलने के बाद पत्नी सुनीता देवी का रो-रोकर बुरा हाल हो गया। सूचना के बाद मृतक के घर ग्रामीण पहुंचकर पत्नी व पिता राम बच्चन सिंह को ढाढ़स बंधाने लगे। पिता कुछ बोलने की स्थिति में नहीं थे। उन्होंने बताया कि अस्पताल में उनकी मौत की सूचना कैम्प में अधिकारियों ने दी है। दिवंगत जवान के तीन संतान जिनमें दो बेटियां हैं। तीनो 10 वर्ष से नीचे हैं। पिता का छाया सर से उठने के बाद इनके पालन-पोषण को लेकर मां परेशान है। किसके सहारे इनका पालन होगा यह कहकर अचेत हो जा रही थी। दूसरी तरफ खूनी संघर्ष का आरोपित जवान रितेश रंजन के गांव के लोग हक्का-बक्का हैं। आरोपित जवान के संबंध में कुछ भी बोलने से लोगों ने इंकार कर दिया। ग्रामीणों ने दबी जुबान में बताया कि रितेश रंजन के पिता को अभी तक घटना की जानकारी नहीं है। उसकी पत्नी जो वर्तमान में जहानाबाद जिले के कसवां गांव स्थित मायके में रह रही है, को मामले की जानकारी मिल गई है। जवान की पत्नी से फोन पर बात की गई, लेकिन उसने कुछ भी बताने से इंकार कर दिया। ग्रामीण सूत्रों के अनुसार रितेश रंजन की बहाली सीआरपीएफ मैं कॉन्स्टेबल के पद पर वर्ष 2011 में हुई थी। छुट्टी में घर लौटने के बाद काफी दिनों तक उसने पोस्ट पर योगदान नहीं किया था।
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