मुंगेर : रोशनी के त्योहार के रूप में मनाए जाने वाले दिवाली पर जरा-सी लापरवाही के कारण हर साल हजारों लोग पटाखों से घायल होकर अस्पताल पहुंचते हैं।
 रिपोर्ट बताता है कि दिवाली के दिन घायल होने वाले 95 प्रतिशत लोग पटाखा जलाने में की जाने वाली लापरवाही के कारण दुर्घटना का शिकार होते हैं। इनमें भी बच्चों की संख्या सबसे ज्यादा होती है। त्वचा रोग विशेषज्ञों का कहना है कि छोटे से पटाखे की चिगारी से जख्मी होकर अस्पताल पहुंचने वाले कई लोग हमेशा के लिए अपने त्वचा की खूबसूरती खो देते हैं। वही कइयों को सर्जरी के बाद आराम मिलता है। चर्म रोग विशेषज्ञ डा. एससी विश्वकर्मा ने कहा पटाखों से जलने के बाद अक्सर लोग बर्फ का इस्तेमाल करते हैं जबकि ऐसा नहीं करना चाहिए। इससे रक्त का थक्का बन सकता है जिससे रक्त संचार प्रभावित होता है। फफोले पड़ने पर फोड़े नहीं। इससे संक्रमण होने का खतरा बढ़ जाता है। जले हुए अंग पर ठंडा पानी ही डालें। ठंडा पानी डालने से दर्द में राहत मिलती है, जलन कम होती है और जली हुई कोशिकाओं का तापमान कम होता है। जलने वाले भाग पर ठंडे पानी की कपड़े की पट्टी रखें रुई या काटन का इस्तेमाल करने से बचना चाहिए, क्योंकि रुई जली हुई जगह पर चिपक सकती है जिससे जलन कम होने की बजाय और बढ़ जाती है। जली हुई त्वचा पर कपड़ा चिपक जाए तो अलग करने की कोशिश न करें। डॉक्टर से संपर्क तुरंत करें। सदर अस्पताल में अलग से नही है वर्ण वार्ड झुलसे हुए मरीज का इलाज सामान्य वार्ड में किया जाता है।  अस्पताल में अलग से बर्न वार्ड नही है आग से झुलसने वाले मरीजो का इलाज सर्जिकल वार्ड में किया जाता है इस तरह के रोगी के इलाज के लिए फिजिशियन और सर्जन उपलब्ध है। तौसिफ हसनैन , अस्पाल प्रबंधक , सदर अस्पताल मुंगेर 24 घंटे तैयार रहेंगें अग्निशमन वाहन होमगार्ड डीएसपी आमीर इसरार ने बताया कि दिवाली को लेकर सभी पंडालों में अग्निशमन यंत्र लगाने को कहा गया है। बालू से भरे बाल्टी पास में रखें। शहरी इलाके के लिए दो बड़ी एक छोटे वाहन को तैनात किया गया है। सभी वाहनों पर चालक मौजूद रहेंगे। दिवाली के दिन बाटा चौक स्थित अग्निशमन के वाहन रहेगा। सभी प्रखंडों और थाना में अग्निशमन वाहन उपलब्ध है। शहर के लिए नए वाहनों की उपलब्धता को लेकर डीएम को पत्र दिया गया है।

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