- पीएम ने की सुरक्षा यूएनएससी की परिचर्चा बैठक की अध्यक्षता

नई दिल्ली (एजेंसी)। संयुक्‍त राष्‍ट्र सुरक्षा परिषद की बैठक की अध्यक्षता करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि  समुद्री विवाद का समाधान शांतिपूर्ण और अंतरराष्ट्रीय क़ानून के आधार पर होना चाहिए। हमें समंदर से उत्पन्न प्राकृतिक आपदाओं से उत्पन चुनौतियां का मिलकर सामना करना चाहिए। इस विषय पर क्षेत्रिय सहयोग बढ़ाने पर भारत ने कई कदम उठाए हैं।

पीएम मोदी वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) की एक उच्चस्तरीय खुली परिचर्चा की अध्यक्षता कर रहे थे। इस कार्यक्रम का संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की वेबसाइट पर सीधा प्रसारण हुआ। इस बैठक में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के सदस्य देशों के राष्ट्राध्यक्षों, सरकार के प्रमुखों और संयुक्त राष्ट्र प्रणाली एवं प्रमुख क्षेत्रीय संगठनों के उच्च स्तरीय विशेषज्ञों के भाग लिया। इस बैठक में रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन भी भाग लिया।
पीएम मोदी ने कहा, हम सागर (क्षेत्र में सभी के लिए सुरक्षा और विकास) के दृष्टिकोण के आधार पर अपने क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा पर एक समावेशी ढांचा बनाना चाहते हैं। यह दृष्टि एक सुरक्षित, सुदृढ़ और स्थिर समुद्री क्षेत्र के लिए है। हमें समुद्री व्यापार में आने वाली परेशानियों को दूर करना चाहिए। समुद्री व्यापार के सक्रिय प्रवाह पर हमारी समृद्धि निर्भर करती है और इस रास्ते में आने वाली बाधाएं पूरी वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए एक चुनौती बन सकती हैं। मुक्त समुद्री व्यापार अनादि काल से भारत की संस्कृति से जुड़ा है।
पीएम मोदी ने कहा, समुद्री सुरक्षा के लिए मैं 5 बुनियादी सिद्धांतों को सामने रखना चाहूंगा। पहला- वैध व्यापार स्थापित करने के लिए बाधाओं को दूर किया जाना चाहिए। दूसरा - समुद्री विवादों का निपटारा शांतिपूर्ण और अंतरराष्ट्रीय कानून के आधार पर ही होना चाहिए। पीएम ने कहा, आज आतंकी घटना और समुद्री लुटेरों के लिए समंदर के रास्तों का इस्तेमाल हो रहा है, इसलिए हम इस विषय को सुरक्षा परिषद के पास लेकर आए हैं। पीएम मोदी ने कहा, महासागर हमारी साझा विरासत हैं और हमारे समुद्री मार्ग अंतरराष्ट्रीय व्यापार की जीवन रेखा हैं। ये महासागर हमारे ग्रह के भविष्य के लिए बहुत महत्वपूर्ण हैं।

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