अधिकारियों के साथ बैठक में दिये दिशा निर्देश


मेरठ।   आगामी 26 अप्रैल को मेरठ में होने वाले पंचायत चुनाव के लिये  सामान्य पर्यवेक्षक अधर किशोर मिश्र शुक्रवार रात में मेरठ पहुंच गए। उन्होंने सर्किट हाउस में पुलिस प्रशासन के अफसरों के साथ बैठक करके आवश्यक दिशा निर्देश दिए। इस दौरान उन्होंने स्पष्ट कहा कि चुनाव को पूर्ण रूप से निष्पक्ष और सुचिता से कराया जाएगा। मतदाताओं को प्रलोभन देने वाले प्रत्याशी अथवा समर्थक के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की जाएगी। राज्य निर्वाचन आयोग ने कानपुर मंडल के अपर आयुक्त अधर किशोर मिश्र को मेरठ जनपद का सामान्य पर्यवेक्षक नियुक्त किया है।
 अधिकारियों के साथ बैठक में उन्होंने इस दौरान स्पष्ट कहा कि चुनाव पारदर्शी होगा। शांतिपूर्ण होगा तथा सुचिता से होगा।किसी भी मतदाता को न तो मतदान से वंचित रहने दिया जाएगा तथा न ही किसी को प्रलोभन का सहारा लेकर चुनाव प्रभावित करने दिया जाएगा। ऐसा प्रयास करने वाले व्यक्ति के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि किसी मतदाताए आमजन या प्रत्याशी को निर्वाचन के संदर्भ में यदि कोई शिकायत या सुझाव है तो वह उनके मोबाइल नंबर या कार्यालय के नंबर पर संपर्क करके दर्ज करा सकता है। इस दौरान नगर मजिस्ट्रेट सत्येंद्र कुमार सिंह, डिप्टी कलेक्टर एमडीए मनोज कुमार सिंह, जिला आबकारी अधिकारी आलोक कुमार आदि अधिकारी मौजूद रहे।
पोलिंग पार्टियों में फैला कोरोना संक्रमण बिगाड़ न दे गणित
कोरोना से जिला प्रशासन की पंचायत चुनाव की तैयारियों का गणित भी प्रभावित हो रहा है। तमाम कारणों के चलते ड्यूटी कटवाने के दो हजार से ज्यादा आवेदनों के बीच कोरोना संक्रमण तेजी से मतदान कर्मिकों को शिकार बना रहा है। रोजाना दर्जनों कर्मचारियों के स्वजन कोरोना संक्रमण की रिपोर्ट लेकर विकास भवन पहुंच रहे हैं। इन सभी को पोलिंग पार्टियों से हटाना होगा। लेकिन यह कार्य पोलिंग पार्टियों की रवानगी के समय पर ही किया जाएगा।
लिहाजा सभी को पोलिंग पार्टियों के रवानगी स्थल पर ही बुलाया जा रहा है। इन हालात में पोलिंग पार्टियों की संख्या पूरी करना भी जिला प्रशासन के सामने चुनौती बना है। पंचायत चुनाव के लिए जनपद के ग्रामीण क्षेत्रों में कुल 2346 बूथ बनाए गए हैं। इनमें मतदान के लिए दस फीसद रिजर्व पार्टियों समेत लगभग 2600 पोलिंग पार्टियों की जरूरत होगी। इस संख्या के तहत कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई है लेकिन ड्यूटी पत्र मिलते ही बड़ी संख्या में कर्मचारियों ने तमाम कारण बताते हुए चुनाव ड्यूटी से मुक्त करने की मांग कर डाली।

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