दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन
मेरठ । प्राचीन भारतीय इतिहास लेखन में ही नहीं बल्कि सम्पूर्ण इतिहास में स्त्रियों का एक उच्च एवं महान स्थान है। भारतवर्ष में मध्य युग में जब बाहरी आक्रमणकारी आए तब नारी की स्थिति निम्न हुई। कुछ कुत्सित इतिहासकारों ने हमारे धर्म तथा संस्कृति को धूमिल करने का प्रयत्न किया उक्त बातें चौधरी चरण विवि के इतिहास विभाग में दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी में कुलपति प्रो एन के तनेजा ने कही।
दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी प्रथम सत्र में बोलते हुए कुलपति ने नारी सशक्तिकरण के दृष्टिकोण से नारी की स्थिति पर अतीत में एवं वर्तमान में चर्चा करते हुए कहा कि प्राचीन भारतीय इतिहास लेखन में ही नहीं बल्कि सम्पूर्ण इतिहास में स्त्रियों का एक उच्च एवं महान स्थान है। भारतवर्ष में मध्य युग में जब बाहरी आक्रमणकारी आए तब नारी की स्थिति निम्न हुई। कुछ कुत्सित इतिहासकारों ने हमारे धर्म तथा संस्कृति को धूमिल करने का प्रयत्न किया। भारत की स्त्रियों की तुलना विदेशों की स्त्रियों से करते हुए उन्होंने कहा कि विदेशों में महिलाओं की जो स्थिति है वहाँ की तुलना में भारत की स्त्रियों का स्थान अधिक ऊँचा है जैसे संयुक्त राज्य अमेरिका तथा यूके में आज तक महिला प्रधानमंत्री नहीं हुई जबकि वे विकसित देश हैं किन्तु भारत में आज से लगभग 47 वर्ष पूर्व एक महिला ही प्रधानमंत्री थी। सरकार को स्त्रियों को सुविधाएं देकर प्रोत्साहित करना चाहिए।
डॉ बाल मुकुन्द पाण्डेय, राष्ट्रीय संगठन सचिव, अखिल भारतीय इतिहास संकलन योजना, नई दिल्ली ने कहा कि इतिहास में ही नही बल्कि वर्तमान परिप्रेक्ष्य में भी नारी की प्रास्थिति अतुलनीय है। एक माँ हमें सब कुछ देती है इसलिए ही कहा गया है किमातृ देवो भव: रामायण तथा महाभारत की अनेक स्त्री चरित्र जैसे सीता, उर्मिला, माण्ड़वी, द्रौपदी, कुन्ती आदि ने राष्ट्र की सांस्कृतिक तथा अन्य क्षेत्रों के निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।
प्रो कुमार रत्नम, सदस्य सचिव, आईसीएचआर, नई दिल्ली ने अपना व्याख्यान भारत माता को नमन करते हुए प्रारम्भ किया। उन्होंने कहा कि राष्ट्र के निर्माण में स्त्रियों का अनन्य महत्व है। विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों को चाहिए कि वे इतिहास में विलुप्त हुई स्त्रियों को खोज निकालें तथा एक नवीन इतिहास की रचना करें। स्त्री ही संसार की जननी है तो किसी से कम कैसे हो सकती है।
प्रो0 अजय विजय कौर, विभागाध्क्ष, इतिहास विभाग ने अतिथि परिचय कराते हुए विषय के बारे में बताया कि भारतीय इतिहास, भारतीय नारी के उत्थान व पतन की विभिन्न स्थितियों को स्वयं में समेटे हुए है। आजादी के बाद 1950 में संविधान लागू होने के बाद स्त्रियों को स्वतन्त्रता, समानता एवं विभिन्न दशाओं में सुरक्षा के अधिकार मिले।


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