मैक्स ने विशेष ओपीडी की शुरूआत की
मेरठ। लाखों लोगों में इंटरस्टिशियल फेफड़ा रोग आईएलडी की डायग्नोसिस हो रही है जो फेफड़े संबंधी बीमारियों के बढ़ते मामलों का प्रत्यक्ष प्रमाण है। ट्यूबरकुलोसिस यानी क्षयरोग का बचाव और इलाज संभव है।इसमे किसी भी तरह की असावधानी आप पर भारी पड सकती है। बढ़ते मामलों पर काबू पाने और जान पर खतरा बनने वाले इस रोग के बचाव के लिए जागरूकता बढ़ाना ही सबसे महत्वपूर्ण उपाय है। इसी को ध्यान में रखते हुए मैक्स सुपर स्पेशियल्टी हॉस्पिटल ने मेरठ में अपनी विशेष ओपीडी सेवा का शुभारंभ कर वहां के लोगों तक अपनी सेवा का विस्तार किया है।
कंसल्टेंट डॉ. शरद जोशी ने कहा ओपीडी सेवा मेरठ के श्री डायग्नोस्टिक्स स्थित मैक्स पेशेंट असिस्टेंस सेंटर में हर महीने के पहले और तीसरे गुरुवार को उपलब्ध रहेगी जहां पल्मोनरी संबंधी बीमारियों की टर्शियरी देखभाल और थोरैसिस सर्जरी पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। टर्शियरी केयर संबंधी परामर्श देने के लिए मैक्स हॉस्पिटल के डॉक्टर यहीं उपलब्ध रहेंगे क्योंकि महामारी और लॉकडाउन के कारण ज्यादातर मरीज दूरदराज जाकर विशेषज्ञों की राय लेना टाल देते हैं। उन्होने बताया एक अनुमान के मुताबिक, वैश्विक स्तर पर 2019 में एक लाख लोग टीबी की चपेट में आ गए और इससे लगभग 12 लाख लोगों की मौत हो गई। इसके अलावा एचआईवीकृटीबी के दोहरे संक्रमण से दो लाख लोगों की मौत हुई। दुनियाभर में टीबी के मामलों का 25 फ ीसदी भारत में ही है और एमडीआर-आरकृआर टीबी के सभी मामलों में से 27 फीसदी मामले हमारे देश में ही हैं। उन्होने बताया टीबी का इलाज और बचाव संभव हैए बशर्ते कि इसकी शुरुआती पहचान करा ली जाए और उचित इलाज शुरू किया जाए। इससे कई लोगों की जान भी बच सकती है और परिवारों का खर्च भी बच सकता है। कई सारी प्रतिकूल परिस्थितियों के बावजूद सरकार जन स्वास्थ्य लक्ष्य पाने के लिए प्रतिबद्ध है और सभी डॉट्स सेंटरों, डॉट्स प्लस सेंटरों तथा सरकारी अस्पतालों में निरूशुल्क इलाज मुहैया करा रही है।इस मौके पर डा पुनीत गुप्ता व डा भूषण दिनकर थेाम्बेरे मौजूद रहे।
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