मुख्यमंत्री ने लखनऊ से किया लैब का ऑनलाइन शुभांरभ
जिला अस्पताल में डिजिटल एक्सरे मशीन भी लगी
मेरठ। विश्व क्षय रोग दिवस पर बुधवार को मेरठ को दो-दो सौगात मिली। एलपीए लाइन प्रोव ऐसे लैब और डिजिटल एक्सरे मशीन मिलने से जनपद और आसपास के इलाकों के टीबी रोगियों के उपचार में मदद मिलेगी। मेरठ के लाला लाजपत राय मेडिकल कालेज के माइक्रोबॉयलॉजी विभाग में स्थापित एलपीए लैब का शुभारंभ मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ ने लखनऊ से ऑनलाइन किया, वहीं जिला अस्पताल के क्षय रोग विभाग में लगी डिजिटल एक्सरे मशीन का शुभारंभ मुख्य चिकित्सा अधिकारी सीएमओ ने किया। इस दौरान जिला अस्पताल में टीबी से ग्रसित 18 साल से कम उम्र के बच्चों को पोषाहार वितरित करते हुए बच्चों को पौष्टिक आहार व मास्क पहनने की सलाह दी गयी।
मेडिकल कालेज में एलपीए लैब का शुभारंभ करते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि टीबी अब लाइलाज बीमारी नहीं रह गयी है। समय रहते इसका उपचार संभव है। देश को 2025 तक टीबी से मुक्त करने के लिये प्रदेश सरकार टीबी उन्मूलन कार्येक्रम चला रही है, जिसमें स्वास्थ्य विभाग को काफी सफलता मिल रही है। जहां पहले लोग टीबी की बीमारी को छिपाते थे, अब टीबी के प्रति जागरूक होने लगे हैं।
इस अवसर पर मेरठ दक्षिण के विधायक डा सोमेन्द्र तोमर व मेडिकल कालेज के प्राचार्य डा. ज्ञानेन्द्र कुमार ने कहा कि टीबी मरीजों को आधुनिक मशीन के माध्यम से उपचार मिल सके इसके लिए प्रयास किये जा रहे थे। इसी का नतीजा है कि यहां यह मशीन लगायी गयी है। पहले आगरा में टीबी के सैंपल जांच के लिये भेजे जाते थेए इस कारण रिपोर्ट आने में एक माह का समय लगता था। अब मेरठ में लैब स्थापित होने से जांच रिपोर्ट 72 घंटे में मरीजों को मिल जाएगी।

जिला क्षय रोग अधिकारी डाण् एमएस फौजदार ने बताया 80 प्रतिशत टीबी फेफड़ों से संबंधित होती हैए जबकि 20 प्रतिशत में स्किन टीबीएब्रेन टीबी और अन्य अंगों की टीबी होती है। आमतौर पर हल्का बुखार रहनाए अचानक वजन कम होना और 15 दिन से ज्यादा खांसी रहना टीबी रोग के लक्षण हैं। यदि इस प्रकार के लक्षण हों तो टीबी की जांच अवश्य कराएं। टीबी की जांच और उपचार स्वास्थ्य विभाग निशुल्क उपलब्ध कराता है। टीबी का एक बहुत बड़ा कारण कुपोषण भी है। बेहतर पोषण के लिए शासन टीबी के रोगियों को हर माह पांच सौ रुपए उपलब्ध कराता है।
उन्होंने बताया निजी क्षेत्र में टीबी का उपचार करने वाले चिकित्सकों को भी नोटिफिकेशन पर शासन की ओर से पांच सौ रुपए की राशि दी जाती है। यदि प्राइवेट चिकित्सक को ऐसा कोई मरीज मिलता है जो दवा पर पैसा खर्च करने की स्थिति में नहीं है तो उसे सरकारी अस्पताल भेजें ताकि वह निशुल्क उपचार पा सके। लगातार उपचार के बाद टीबी को पूरी तरह से ठीक किया जा सकता है। टीबी की दवा बीच में न छोड़ें। क्योंकि दोबारा दवा शुरू करने पर उपचार और लंबा व मुश्किल हो जाता है।
पोषाहार पाकर टीबी से ग्रसित बच्चों के चहरे खिले
जिला अस्पताल के क्षयरोग विभाग में डिजिटल एक्सरे मशीन का शुभारंभ करने के बाद मुख्य चिकित्सा अधिकारी डा. अखिलेश मोहन ने 18 साल से कम उम्र के टीबी ग्रसित बच्चों को पोषाहार वितरित किया। पोषाहार पाकर ग्रसित बच्चों के चेहरे खिल उठे। पोषाहार का वितरण करते हुए उन्होंने बच्चों को पौष्टिक आहार लेने व घर से बाहर निकलते समय मास्क का प्रयोग करने की सलाह दी।
पुलिस कर्मियों को टीबी के प्रति किया जागरूक
विश्व क्षय रोग दिवस के अवसर पर नगरीय प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र यूपीएचसी पुलिस लाइन में जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गयाए जिसमें उप क्षय रोग अधिकारी गुलशन राय, जिला कार्यक्रम समन्वयक नेहा सक्सेना, जिला पीपीएम कोर्डिनेटर शबाना बेगम, जिला एसटीएलएस दीपक कुमार ने वहां मौजूद पुलिसकर्मियों को टीबी के प्रति जागरूक किया। इस मौके पर फार्मासिस्ट अंजु गुप्ता, बीसीजी टेक्नीशियन अमित कुमार, रजनीश आदि मौजूद रहे।
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