विरोध के बीच चुनाव आयोग एक्टिव, SIR के बाद 20 राज्यों में शुरू हुआ स्पेशल ड्राइव
छूटे पात्र मतदाताओं के नाम जोड़ने की कवायद, BLO को घर-घर जाकर सत्यापन के निर्देश; फॉर्म-6 से दोबारा पंजीकरण की सुविधा
नई दिल्ली। विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर विपक्ष के विरोध के बीच चुनाव आयोग ने 20 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में मतदाता सूची को दुरुस्त करने के लिए विशेष अभियान शुरू किया है। अभियान का उद्देश्य SIR प्रक्रिया के दौरान छूट गए पात्र मतदाताओं और अनुपस्थित, स्थानांतरित, मृत या हटाए गए (ASDD) श्रेणी में दर्ज लोगों में से पात्र मतदाताओं के नाम दोबारा जोड़ना है।
सामान्य फॉर्म-6 से जुड़ सकेंगे नाम
चुनाव आयोग के अनुसार, जिन 20 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में SIR की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है, वहां नए मतदाता पंजीकरण के लिए सामान्य फॉर्म-6 का इस्तेमाल किया जा सकेगा। आयोग ने स्पष्ट किया है कि SIR के दौरान लागू अतिरिक्त घोषणा पत्र की जरूरत इन राज्यों में नहीं होगी। पात्र नागरिक सामान्य प्रक्रिया के तहत फॉर्म-6 भरकर मतदाता सूची में अपना नाम शामिल कराने के लिए आवेदन कर सकते हैं।
आयोग ने मुख्य निर्वाचन अधिकारियों, जिला निर्वाचन अधिकारियों और निर्वाचक पंजीकरण अधिकारियों को SIR से पहले और बाद की मतदाता सूचियों का मिलान करने के निर्देश दिए हैं। अधिकारियों को ऐसे पात्र लोगों की पहचान कर उनके घर तक पहुंचने और नाम जोड़ने की प्रक्रिया में मदद करने को कहा गया है।
गोवा में 97 मतदाताओं की पहचान
गोवा में बूथ लेवल अधिकारियों को उन 97 पात्र मतदाताओं के घर भेजा गया, जिनके नाम अंतिम मतदाता सूची में शामिल नहीं हो पाए थे। आयोग के अनुसार, इनमें से 81 लोगों ने फॉर्म-6 के जरिए दोबारा पंजीकरण के लिए आवेदन कर दिया है।
पश्चिम बंगाल में भी मुख्य निर्वाचन अधिकारी की वेबसाइट पर ASDD सूची सार्वजनिक की गई है। आयोग के अनुसार, सूची में नाम नहीं होने वाला पात्र नागरिक BLO के माध्यम से अथवा ऑनलाइन फॉर्म-6 भरकर अपना नाम जुड़वाने के लिए आवेदन कर सकता है।
पूर्व सीईसी ने उठाए कानूनी सवाल
आयोग की इस कवायद को लेकर पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त एसवाई कुरैशी ने प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि फॉर्म-6 मूल रूप से पहली बार मतदाता बनने वाले नागरिकों के लिए है। ऐसे में पहले से मतदाता रहे और गलती से सूची से बाहर हुए लोगों से इसी फॉर्म के जरिए घोषणा लेना कानूनी रूप से उचित नहीं है।
कुरैशी ने सुझाव दिया कि ऐसे मामलों के लिए अलग बहाली फॉर्म की व्यवस्था की जानी चाहिए थी। उन्होंने गलत घोषणा से जुड़े कानूनी प्रावधानों का भी उल्लेख किया।
विपक्ष का प्रदर्शन, आयोग ने प्रक्रिया जारी रखी
SIR को लेकर विपक्षी दल चुनाव आयोग पर लगातार सवाल उठा रहे हैं। विपक्षी नेताओं की ओर से मतदाता सूची में नाम हटाए जाने और प्रक्रिया में पारदर्शिता को लेकर आरोप लगाए जा रहे हैं। दूसरी ओर, चुनाव आयोग का कहना है कि शेष राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही देश में मतदाताओं की अंतिम और सटीक संख्या सामने आएगी।
ऐसे में 20 राज्यों में शुरू किया गया विशेष अभियान मतदाता सूची में छूटे पात्र लोगों को दोबारा शामिल करने की प्रशासनिक कवायद के रूप में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।


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