सिवालखास में टिकट की जंग तेज, सपा के संपर्क में भाजपा के दो दावेदार!

विधानसभा चुनाव से पहले सियासी हलचल बढ़ी, रालोद के खाते में सीट जाने की आशंका के बीच दूसरे विकल्प तलाश रहे नेता

मेरठ। विधानसभा चुनाव से पहले सिवालखास सीट पर सियासी सरगर्मी तेज होने लगी है। टिकट की दावेदारी को लेकर भाजपा और रालोद में कई चेहरे सक्रिय हैं। इसी बीच चर्चा है कि भाजपा के दो बड़े दावेदार समाजवादी पार्टी के नेताओं के संपर्क में हैं। बताया जा रहा है कि दोनों नेताओं ने अलग-अलग समय पर सपा के वरिष्ठ नेता बलराम यादव सहित अन्य नेताओं से मुलाकात की है। हालांकि, इन मुलाकातों और संभावित दल-बदल को लेकर अभी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

जाट बाहुल्य सिवालखास विधानसभा सीट बागपत लोकसभा क्षेत्र में आती है। भाजपा और रालोद के गठबंधन के कारण यहां टिकट को लेकर दावेदारों के सामने सियासी समीकरण साधने की चुनौती है। चर्चा है कि यदि गठबंधन में टिकट नहीं मिला तो कुछ नेता सपा से अपनी दावेदारी पेश कर सकते हैं।

गुलाम मोहम्मद के सामने भी सियासी चुनौती

सिवालखास सीट पर जातीय समीकरण हमेशा अहम रहे हैं। भाजपा, बसपा, कांग्रेस और रालोद यहां जाट नेताओं को मैदान में उतारते रहे हैं, जबकि गुलाम मोहम्मद दो बार विधायक चुने गए। उन्होंने 2012 में सपा के टिकट पर जीत दर्ज की थी। वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में सपा-रालोद गठबंधन के तहत वह रालोद के चुनाव चिह्न पर मैदान में उतरे और जीत हासिल की।

सपा और रालोद के बीच गठबंधन टूटने तथा रालोद के एनडीए में शामिल होने के बाद गुलाम मोहम्मद के राजनीतिक समीकरणों को लेकर चर्चाएं तेज हुई हैं। उनकी आगे की रणनीति और संभावित राजनीतिक ठिकाने पर भी निगाहें लगी हैं।

भाजपा और रालोद में दावेदारों की लंबी सूची

भाजपा ने 2017 के विधानसभा चुनाव में सिवालखास सीट पर जीत हासिल की थी। उस चुनाव में जितेंद्र सतवाई विधायक बने थे। वर्ष 2022 में पार्टी ने मनिंदर पाल सिंह को प्रत्याशी बनाया, लेकिन उन्हें हार का सामना करना पड़ा।

इस बार भाजपा की ओर से मनिंदर पाल सिंह, गौरव चौधरी, पूर्व विधायक जितेंद्र सतवाई, डॉ. मीनाक्षी भराला और अंकुर राणा समेत कई नाम टिकट की दौड़ में बताए जा रहे हैं। वहीं रालोद की ओर से सुनील रोहटा, रणवीर दहिया, विवेक बाफर और डॉ. जितेंद्र चिकारा सहित कई नेता दावेदारी कर रहे हैं।

राजनीतिक हलकों में केसी त्यागी के बेटे के लिए भी मेरठ की किठौर या सिवालखास सीट से टिकट की संभावनाओं को लेकर चर्चा है। ऐसे में गठबंधन के भीतर टिकट का फैसला कई दावेदारों की चुनावी रणनीति तय कर सकता है।

टिकट नहीं मिला तो बदल सकते हैं पाला

भाजपा के दो दावेदारों की सपा नेताओं से मुलाकात की चर्चा ने सिवालखास की राजनीति में नई अटकलों को जन्म दिया है। माना जा रहा है कि गठबंधन में सीट रालोद के खाते में जाने की स्थिति में कुछ नेता दूसरे दलों से चुनाव लड़ने का विकल्प तलाश सकते हैं। हालांकि, अभी यह स्पष्ट नहीं है कि इनमें से कोई नेता पार्टी छोड़ने या सपा में शामिल होने का औपचारिक निर्णय ले चुका है या नहीं।

सिवालखास में बदलते रहे राजनीतिक समीकरण

सिवालखास सीट पर अलग-अलग चुनावों में कांग्रेस, जनता पार्टी, जनता दल, बसपा, सपा, भाजपा और रालोद के उम्मीदवार जीत दर्ज कर चुके हैं। वर्ष 2012 में गुलाम मोहम्मद सपा के टिकट पर विधायक बने, जबकि 2022 में उन्होंने रालोद के चुनाव चिह्न पर जीत हासिल की। अब आगामी विधानसभा चुनाव से पहले टिकट की दावेदारी और गठबंधन का गणित इस सीट की सियासत को फिर चर्चा में ले आया है।

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