मिलेट्स से कॉस्मेटिक उत्पाद बना रहीं मेरठ की मीनाक्षी, अब वेस्टेज से पैकेजिंग बनाने की तैयारी

23 महीने के शोध के बाद तैयार की प्राकृतिक हेयर, स्किन और बॉडी केयर उत्पादों की रेंज

कोदो और सांवा जैसे मोटे अनाज का इस्तेमाल, ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए देशभर में पहुंच रहे उत्पाद

मेरठ। मोटे अनाज यानी मिलेट्स का इस्तेमाल अब केवल खानपान तक सीमित नहीं रह गया है। मेरठ के कंकरखेड़ा निवासी मीनाक्षी वर्मा ने कोदो और सांवा जैसे मिलेट्स को सौंदर्य प्रसाधनों से जोड़कर नवाचार की नई पहल की है। करीब 23 महीने तक शोध और प्रयोग करने के बाद उन्होंने अपनी कंपनी ‘विमोरा नेचुरल सॉल्यूशन’ के तहत प्राकृतिक हेयर, स्किन और बॉडी केयर उत्पादों की रेंज तैयार की है। अब उनका लक्ष्य मिलेट्स के प्रसंस्करण से निकलने वाले अपशिष्ट का इस्तेमाल कर पर्यावरण के अनुकूल पैकेजिंग विकसित करना है।

प्रदेश में उद्यमिता, नवाचार और स्थानीय उत्पादों को बाजार उपलब्ध कराने की पहल के बीच मीनाक्षी का यह प्रयास महिला उद्यमिता की एक नई मिसाल पेश कर रहा है। यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो जैसे मंचों के माध्यम से भी उन्हें अपने उत्पादों को प्रदर्शित करने और कारोबार के नए अवसर तलाशने का मौका मिला है।



तीन श्रेणियों में तैयार किए उत्पाद

मीनाक्षी ने विमोरा नेचुरल सॉल्यूशन के तहत हेयर केयर, स्किन केयर और बॉडी केयर की तीन श्रेणियों में उत्पाद तैयार किए हैं। हेयर केयर रेंज में शैंपू, कंडीशनर और हेयर सीरम शामिल हैं। स्किन केयर में फेसवॉश, फेस सीरम, डे क्रीम, सनस्क्रीन और नाइट क्रीम उपलब्ध हैं। उनके अनुसार, नाइट क्रीम के फॉर्मूलेशन में अश्वगंधा और मिलेट का इस्तेमाल किया गया है। वहीं, बॉडी केयर श्रेणी में डिटैन साबुन, एप्सम साल्ट के विभिन्न वेरिएंट, मुल्तानी मिट्टी आधारित उत्पाद, गुलाबी मुल्तानी मिट्टी और डेड सी मड जैसे विकल्प शामिल हैं।

मीनाक्षी का कहना है कि उत्पादों के फॉर्मूलेशन तैयार करने के दौरान उनकी स्थिरता, शेल्फ लाइफ और संभावित त्वचा प्रतिक्रिया की जांच पर विशेष ध्यान दिया गया। उत्पादों के फॉर्मूलेशन और गुणवत्ता की जांच के लिए प्रयोगशाला परीक्षण भी कराए गए हैं। फिलहाल कंपनी थर्ड पार्टी मैन्युफैक्चरिंग के जरिए उत्पाद तैयार करा रही है, जबकि उनके फॉर्मूलेशन स्वयं विकसित किए गए हैं। इन्हें पेटेंट कराने की प्रक्रिया शुरू करने की भी तैयारी है।



प्रशिक्षण के बाद शुरू किया नवाचार

मीनाक्षी ने बताया कि वह वर्ष 2023 तक भोपाल के एक मैनेजमेंट कॉलेज में असिस्टेंट प्रोफेसर और एडमिनिस्ट्रेशन हेड के रूप में कार्यरत थीं। बिजनेस कम्युनिकेशन के क्षेत्र में करीब दस वर्ष का अनुभव रखने वाली मीनाक्षी को वर्ष 2023 में मिलेट्स को बढ़ावा देने के राष्ट्रीय अभियान से इस क्षेत्र में काम करने की प्रेरणा मिली। इसके बाद उन्होंने मोटे अनाज के विभिन्न उपयोगों को समझने के लिए प्रशिक्षण लिया और कॉस्मेटिक उत्पादों पर शोध शुरू किया।



उन्होंने इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मिलेट रिसर्च (आईआईएमआर), हैदराबाद से दो बार प्रशिक्षण प्राप्त किया। इसके बाद करीब 23 महीने तक शोध और प्रयोग कर उत्पादों के फॉर्मूलेशन विकसित किए। मीनाक्षी के मुताबिक, इस उद्यम में शोध और विकास पर काफी पूंजी खर्च हुई है और फिलहाल कारोबार में उनका स्वयं का निवेश लगा है। कंपनी एमएसएमई और स्टार्टअप इंडिया के तहत पंजीकृत है तथा उसका ट्रेडमार्क भी लिया गया है। उनकी माता राधा रानी कंपनी की सह-संस्थापक हैं। महिलाओं के लिए उनकी माता द्वारा किए गए सामाजिक कार्यों से भी मीनाक्षी को प्रेरणा मिली।

ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर देशभर में पहुंच

कंपनी के उत्पाद अपनी वेबसाइट के अलावा अमेजन, फ्लिपकार्ट, मीशो और सरकारी ई-कॉमर्स पोर्टल जीईएम पर उपलब्ध हैं। मीनाक्षी के अनुसार, जम्मू-कश्मीर से कन्याकुमारी तक देश के विभिन्न हिस्सों से ऑनलाइन ऑर्डर मिल रहे हैं। दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित हेल्थ एंड वेलनेस इंटरनेशनल एक्सपो में भी उन्होंने अपने उत्पाद प्रदर्शित किए, जहां उन्हें कारोबार के नए संपर्क बनाने का अवसर मिला। यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो में भी उन्होंने उत्पादों में इस्तेमाल किए जाने वाले पौधों का प्रदर्शन और वितरण किया।

अब वह हर्बल और खाद्य उत्पादों की नई श्रेणी शुरू करने की योजना बना रही हैं। इसके साथ ही अपनी भूमि पर औषधीय पौधों की खेती कर कच्चे माल की उपलब्धता सुनिश्चित करने की दिशा में भी काम करना चाहती हैं।

कृषि अपशिष्ट से पर्यावरण अनुकूल पैकेजिंग का लक्ष्य

मीनाक्षी का अगला लक्ष्य मिलेट्स की बाहरी परत और अन्य कृषि अपशिष्ट का उपयोग कर पर्यावरण के अनुकूल पैकेजिंग विकसित करना है। इसके लिए वह गन्ने के अवशेष और इमली के बीज जैसे प्राकृतिक पदार्थों के साथ प्रयोग कर रही हैं। उनकी योजना ऐसी पैकेजिंग विकसित करने की है, जिसका इस्तेमाल भविष्य में तरल और अर्धतरल उत्पादों के लिए किया जा सके। फिलहाल इस दिशा में शोध और विकास का काम चल रहा है।

मीनाक्षी के मुताबिक, इस पहल में मशीनरी की लागत और बड़े न्यूनतम ऑर्डर जैसी चुनौतियां हैं। इन्हें आगे बढ़ाने के लिए सरकारी सहायता और निवेश की आवश्यकता होगी। उनका प्रयास है कि मिलेट्स का उपयोग भोजन से आगे बढ़ाकर सौंदर्य प्रसाधनों और टिकाऊ पैकेजिंग के क्षेत्र तक पहुंचाया जाए, जिससे कृषि अपशिष्ट का बेहतर उपयोग हो सके और नवाचार के नए अवसर पैदा हों।

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