मकान वैध या अवैध? मेडा के चक्कर लगा रहे लोग, बुलडोजर के डर से बढ़ी बेचैनी
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद कार्रवाई की आशंका, जोन-ए के 16,726 भवनों का री-सर्वे; अब बी, सी और डी जोन की बारी
उल्देपुर के बाद जोन-ए में 16,726 भवनों का री-सर्वे, लोग पूछ रहे- कहीं हमारे घर पर तो नहीं चलेगा बुलडोजर
मेरठ। उल्देपुर मामले में सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद कार्रवाई की आशंका ने लोगों की बेचैनी बढ़ा दी है। जोन-ए, बी, सी और डी में रहने वाले लोग अपने मकानों की स्थिति जानने के लिए मेरठ विकास प्राधिकरण (मेडा) कार्यालय पहुंच रहे हैं। लोग अधिकारियों से जानकारी कर रहे हैं कि उनका मकान वैध है या अवैध और कहीं वह प्रस्तावित कार्रवाई के दायरे में तो नहीं आएगा।
बुलडोजर चलेगा या लगेगी सील, यही चिंता
लोगों के बीच सबसे बड़ा सवाल कार्रवाई के दायरे को लेकर है। कई लोग मेडा कार्यालय पहुंचकर यह जानकारी ले रहे हैं कि उनके मकान पर ध्वस्तीकरण या सीलिंग की कार्रवाई की आशंका है या नहीं। कार्रवाई कब और किन क्षेत्रों में होगी, इसे लेकर भी लोगों में असमंजस बना हुआ है।
16,726 भवनों का दोबारा सर्वे
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुपालन में मेडा ने जोन-ए में 16,726 भवनों का दोबारा सर्वे शुरू किया है। प्राधिकरण के अनुसार, इसके बाद जोन-बी, सी और डी में भी सर्वे कराया जाएगा। री-सर्वे के बाद भवनों की स्थिति को लेकर तस्वीर अधिक स्पष्ट होने की उम्मीद है।
न्यायिक आयोग के निर्देशन में कार्रवाई की तैयारी
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुपालन के लिए मेडा की ओर से 35 लाख रुपये जमा किए जाने की जानकारी दी गई है। अब न्यायिक आयोग के निर्देशन में उल्देपुर में अवैध कॉलोनियों के संबंध में कार्रवाई की तैयारी चल रही है। प्राधिकरण को नौ दिसंबर को अदालत में कार्रवाई की रिपोर्ट भी प्रस्तुत करनी है।
कार्रवाई होगी या नहीं, असमंजस बरकरार
उल्देपुर गांव में कार्रवाई को लेकर स्थानीय लोगों के बीच अभी भी असमंजस है। कुछ लोग लगातार मेडा कार्यालय पहुंचकर संभावित कार्रवाई के क्षेत्र और समय की जानकारी ले रहे हैं। पिछले दिनों इस मुद्दे को लेकर विरोध प्रदर्शन भी हुए हैं। मेडा उपाध्यक्ष संजय कुमार मीना का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुपालन में कार्रवाई की जाएगी।
ग्रामीणों और संघर्ष समिति के बीच बातचीत
उल्देपुर के ग्रामीणों और संयुक्त मेरठ बचाओ संघर्ष समिति के बीच भी मामले को लेकर बातचीत चल रही है। लोगों में अपने मकानों को लेकर चिंता बनी हुई है। जिलाधिकारी पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि मामले का समाधान आंदोलन के बजाय कानूनी प्रक्रिया के माध्यम से ही निकलेगा। अब लोगों की नजर मेडा के री-सर्वे और न्यायिक आयोग के निर्देशन में होने वाली अगली कार्रवाई पर टिकी है।

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