सतत कृषि में जैव-प्रौद्योगिकी की भूमिका पर व्याख्यान
सीसीएसयू में विशेषज्ञ ने समझाई पादप-सूक्ष्मजीव अंतःक्रियाओं की उपयोगिता, रासायनिक कृषि पर निर्भरता घटाने पर जोर
मेरठ। चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय (सीसीएसयू) के जैव प्रौद्योगिकी विभाग में मंगलवार को ‘पादप–सूक्ष्मजीव अंतःक्रियाएं एवं सतत कृषि में जैव-प्रौद्योगिकीय अनुप्रयोग’ विषय पर विशेष अतिथि व्याख्यान आयोजित किया गया। इसमें बीएससी और एमएससी जैव प्रौद्योगिकी के विद्यार्थियों के साथ शोधार्थियों एवं शिक्षकों ने सहभागिता की।
कार्यक्रम की मुख्य वक्ता उज़्बेकिस्तान विज्ञान अकादमी के आनुवंशिकी एवं पादप प्रायोगिक जीवविज्ञान संस्थान की वरिष्ठ वैज्ञानिक प्रो. दिलफुज़ा जब्बोरोवा रहीं। उन्होंने पादपों और सूक्ष्मजीवों के बीच होने वाली अंतःक्रियाओं तथा सतत एवं पर्यावरण-अनुकूल कृषि में उनकी भूमिका पर विस्तार से जानकारी दी।
लाभकारी सूक्ष्मजीव बढ़ाते हैं पादपों की क्षमता
प्रो. जब्बोरोवा ने बताया कि लाभकारी सूक्ष्मजीव पादपों की वृद्धि, पोषक तत्वों की उपलब्धता, मृदा स्वास्थ्य और रोग प्रबंधन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने सूक्ष्मजीवी जैव-संवर्धकों, जैविक रोग नियंत्रण और पादप वृद्धि को प्रोत्साहित करने वाले सूक्ष्मजीवों के उपयोग को टिकाऊ कृषि की दिशा में उपयोगी बताया।
उन्होंने कहा कि इन जैव-प्रौद्योगिकीय उपायों के प्रभावी इस्तेमाल से रासायनिक कृषि-आदानों पर निर्भरता कम करने में मदद मिल सकती है। विद्यार्थियों को इस क्षेत्र के व्यावहारिक पहलुओं के साथ नवीन शोध और भविष्य की संभावनाओं से भी अवगत कराया गया।
80 से अधिक शोध-पत्र प्रकाशित
प्रो. दिलफुज़ा जब्बोरोवा 50 से अधिक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों में सहभागिता कर चुकी हैं और उनके 80 से अधिक शोध-पत्र अंतरराष्ट्रीय शोध पत्रिकाओं में प्रकाशित हो चुके हैं। उन्हें विश्व के शीर्ष दो प्रतिशत वैज्ञानिकों की सूची में भी स्थान मिला है। इसके अलावा वह विभिन्न अंतरराष्ट्रीय शोध पत्रिकाओं में शैक्षणिक संपादक और संपादकीय मंडल की सदस्य के रूप में योगदान दे रही हैं।
कार्यक्रम में विभाग के समन्वयक प्रो. जितेंद्र सिंह, डॉ. प्रदीप कुमार, डॉ. आशु त्यागी, डॉ. ज्ञानिका शुक्ला, डॉ. संगीता बजाज, डॉ. सुप्रिया तोमर और डॉ. विदुषी महाजन मौजूद रहे। शिक्षकों और विद्यार्थियों ने व्याख्यान को शोधपरक बताते हुए कहा कि इससे पादप-सूक्ष्मजीव अंतःक्रियाओं और सतत कृषि के क्षेत्र में नई शोध संभावनाओं को समझने का अवसर मिला। अंत में प्रो. जब्बोरोवा के प्रति आभार व्यक्त किया गया और विद्यार्थियों को कृषि जैव प्रौद्योगिकी के उभरते क्षेत्रों में अनुसंधान के लिए प्रेरित किया गया।


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