विश्व डॉल्फिन दिवस पर जलीय जीवों के संरक्षण का संदेश
WWF ने विद्यार्थियों को समझाया गंगा के पारिस्थिति
क तंत्र में जलीय जीवों का महत्व, चित्रकला प्रतियोगिता में बच्चों ने दिखाई प्रतिभा
मेरठ। विश्व डॉल्फिन दिवस के अवसर पर गंगा व्याख्यान केंद्र में WWF की टीम ने वानिकी प्रशिक्षण संस्थान के प्रशिक्षुओं, एसडी पब्लिक विद्या मंदिर के छात्र-छात्राओं और हस्तिनापुर रेंज के वनकर्मियों के साथ जलीय जीवों की जैव विविधता एवं संरक्षण को लेकर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया। कार्यक्रम में विद्यार्थियों को गंगा नदी के पारिस्थितिक तंत्र और इसमें जलीय जीवों की भूमिका के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई।
कार्यक्रम के दौरान बच्चों को कछुआ संरक्षण केंद्र, हस्तिनापुर वन्यजीव अभयारण्य क्षेत्र में पाए जाने वाले विभिन्न जलीय जीवों और इंटरप्रिटेशन सेंटर में प्रदर्शित जीवों के नमूनों के माध्यम से संरक्षण की जानकारी दी गई। विशेषज्ञों ने बताया कि गंगा में पाई जाने वाली डॉल्फिन, कछुआ और अन्य जलीय प्रजातियां नदी के पारिस्थितिक संतुलन को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। इनके संरक्षण के लिए नदी को स्वच्छ और प्रदूषणमुक्त रखना जरूरी है।
संरक्षण के प्रति बच्चों को किया जागरूक
WWF टीम ने विद्यार्थियों को जलीय जीवों के जीवन, उनके प्राकृतिक आवास और उनके सामने मौजूद चुनौतियों के बारे में बताया। बच्चों को समझाया गया कि वन्यजीव और जलीय जीवों का संरक्षण केवल वन विभाग या संरक्षण संस्थाओं की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि समाज और नई पीढ़ी की भी इसमें महत्वपूर्ण भूमिका है।
चित्रकला प्रतियोगिता में उकेरी जलीय दुनिया
विद्यार्थियों में वन्यजीव और जलीय जीवों के संरक्षण के प्रति रुचि बढ़ाने के लिए चित्रकला प्रतियोगिता भी आयोजित की गई। बच्चों ने डॉल्फिन, कछुए और गंगा नदी की जैव विविधता से जुड़े विषयों पर चित्र बनाए। प्रतियोगिता के माध्यम से विद्यार्थियों ने जलीय जीवों के प्रति अपने भाव और संरक्षण का संदेश रचनात्मक तरीके से प्रस्तुत किया।
कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों को गंगा की जैव विविधता को बचाने और जलीय जीवों के प्राकृतिक आवास को सुरक्षित रखने के लिए जागरूक किया गया। आयोजकों ने कहा कि बच्चों में छोटी उम्र से ही प्रकृति और वन्यजीव संरक्षण की भावना विकसित करना भविष्य में पर्यावरण संरक्षण के लिए महत्वपूर्ण साबित होगा।


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