ध्वजारोहण के साथ शुरू हुआ कृपाओं की माता महोत्सव, देशभर से पहुंच रहे श्रद्धालु

सरधना के ऐतिहासिक चर्च में विशेष प्रार्थना और पवित्र मिस्सा बलिदान, 8 नवंबर को होगा मुख्य धार्मिक आयोजन

मेरठ। सरधना के ऐतिहासिक चर्च में गुरुवार को ध्वजारोहण के साथ कृपाओं की माता महोत्सव का शुभारंभ हुआ। इस अवसर पर विशेष प्रार्थना, माला विनती और पवित्र मिस्सा बलिदान किया गया। महोत्सव में शामिल होने के लिए मेरठ के अलावा दिल्ली, हरियाणा और देश के विभिन्न हिस्सों से श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। श्रद्धालुओं ने कृपाओं की माता की चमत्कारिक तस्वीर के दर्शन कर परिवार की सुख-समृद्धि और सलामती की कामना की।

प्रार्थना के बाद किए चमत्कारिक तस्वीर के दर्शन

गुरुवार शाम करीब चार बजे मेरठ धर्मप्रांत के धर्माध्यक्ष भास्कर जेसुराज, चर्च प्रबंधक फादर वेलेरियन पिंटो, फादर मार्टिन रावत सहित अन्य धर्मगुरुओं ने विशेष प्रार्थना की। इसके बाद ध्वजारोहण हुआ। श्रद्धालुओं ने चर्च परिसर में जुलूस निकाला और प्रार्थना में भाग लिया। भजनों के बीच माला विनती और पवित्र मिस्सा बलिदान किया गया। धार्मिक अनुष्ठानों के बाद श्रद्धालुओं ने कृपाओं की माता की चमत्कारिक तस्वीर के दर्शन किए।

8 नवंबर को होगा मुख्य आयोजन

फादर मार्टिन रावत ने बताया कि सात नवंबर तक प्रतिदिन शाम चार बजे माला विनती, नौरोजी प्रार्थना और पवित्र मिस्सा बलिदान होगा। सात नवंबर को सुबह आठ और 10 बजे तथा शाम चार बजे हिंदी में पवित्र मिस्सा बलिदान किया जाएगा। शाम छह बजे पंजाबी भाषा में मिस्सा बलिदान और रात आठ बजे प्रार्थना सभा होगी।

आठ नवंबर को सुबह छह और आठ बजे पवित्र मिस्सा बलिदान होगा। सुबह 10 बजे धर्माध्यक्षीय समारोही मिस्सा बलिदान का मुख्य आयोजन किया जाएगा। इसके मुख्य अनुष्ठाता प्रयागराज धर्मप्रांत के धर्माध्यक्ष लुईस मैस्करेन्हास होंगे।

1957 से चली आ रही महोत्सव की परंपरा

सरधना चर्च में कृपाओं की माता महोत्सव की परंपरा वर्ष 1957 से चली आ रही है। वर्ष 1955 में इटली के लैघोर्न के पास स्थित मोंटेनैरो तीर्थस्थान से कृपाओं की माता की प्रसिद्ध तस्वीर की प्रतिकृति सरधना चर्च के लिए मंगवाई गई थी। तस्वीर में माता मरियम बालक यीशु को गोद में लिए हुए हैं। सात नवंबर 1957 को इस तस्वीर को मेरठ से सरधना लाकर चर्च के चैपल में स्थापित किया गया। तभी से हर वर्ष नवंबर में यहां विशेष प्रार्थना और महोत्सव आयोजित किया जाता है।

बेगम समरू ने कराया था चर्च का निर्माण

सरधना का यह चर्च ऐतिहासिक और स्थापत्य कला की दृष्टि से महत्वपूर्ण है। इसका निर्माण बेगम समरू ने कराया था। निर्माण कार्य वर्ष 1809 में शुरू हुआ और चर्च परिसर में मौजूद विवरण के अनुसार, इमारत का निर्माण काल 1822 दर्शाया गया है। वर्ष 1961 में पोप जॉन 23वें ने इसे माइनर बसिलिका का दर्जा प्रदान किया था। ऐतिहासिक महत्व और कृपाओं की माता की चमत्कारिक तस्वीर के कारण यह चर्च देशभर के श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र बना हुआ है।

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