थप्पड़ से डर नहीं लगता साहब...!
- ललिता जोशी
राजधानी हमेशा ही सुर्खियों में रहती है । लोकतन्त्र में जनता के प्रतिनिधि जनता को जवाबदेह होते हैं । चुनाव में खड़े होने वाले उम्मीदवार अपने राजनीतिक दल के चुनावी घोषणा पत्र के अनुसार जनता से वादे करते हैं और अपनी पार्टी के चुनाव चिन्ह पर चुनाव के मैदान में अपना प्रचार करते हैं । जनता अपनी समझ और पार्टी की विचारधारा को देखकर अपना मतदान अपनी पसंद के उस उम्मीदवार को वोट देते हैं जिससे उन्हें काम की उम्मीद होती है । विजयी उम्मीदवार को अपने वादों के अनुसार अपने क्षेत्र में विकास कार्य करना पड़ता है ।
अभी हाल ही एक नेता जी को जब सड़क निर्माण की घटिया गुणवत्ता को दिखाया तो विधायक जी को गुस्सा आ गया । गुस्सा आना तो लाजिमी था । विधायक जी के गाल टमाटर की तरह लाल हो गए, जीभ में मिर्ची लग गई ,सीने में जलन और आँखों में गुबार भर गया । विधायक जी की इंद्रियाँ जब संज्ञा शून्य हो गई तो उन्होने वीडियो बनाने वाले को ही थप्पड़ जड़ दिया । एक राजनीतिक दल का दूसरे राजनीतिक दल से मतभेद होता हैऔर होना भी चाहिए । मतभेद होते हैं, होने भी चाहिए तभी तो लोक कल्याण के काम ईमानदारी से होंगे ।
आजकल हो ये रहा है कि आज हाइवे या फलाइओवर का उदघाटन होता है और कल उसमे गड्ढे हो जाते हैं। आम आदमी के टैक्स के पैसे से बनने वाली ये सार्वजनिक संपतियों का रखरखाव आम जनता से वसूले गए टोल टैक्स से ही किया जाता है लेकिन कष्ट झेलती भी आम जनता है । जिन लोगों को इस टोल से छूट मिलती है वो वी आई पी ही होते हैं तो इन वीआईपियों के लिए उनकी यात्रा के समय सब एकदम से चकाचक और रेशमी कपड़े की तरह हाइवे और फ्लाईओवर बना दिये जाते हैं लेकिन जो जनता इस का प्रयोग रोजाना करती है उसे तो टूटे -फूटे गड्ढे युक्त फ्लाईओवर और हाइवे मिलते हैं ।ये घटनायें आए दिन होती ही रहती हैं और सोशल मीडिया में इनकी सब रील दिखाई देती रहती हैं । वैसे एक बात तो है मोबाइल की शक्तिका अंदाजा हम उन खबरों से लगा सकते हैं जो दुर्घटना के तुरंत बाद कुछ सेंकड़ों में वाइरल हो जाती हैं ।इसका जवाब देना भरी पड़ता है सरकार को । ऐसे नेताओं की बदमिजाजी और बददिमागी कुछ ही सेकंडस में जंगल में आग की तरह फैल जाती है ।
अभी एक घटिया सड़क निर्माण के बारे में चयनित प्रतिनिधि को उसकी गुणवत्ता के बारे में बताया और दिखाया गया तो जनप्रतिनिधि जी को इतना गुस्सा आया कि उन्होने रील बनाने वाले आम आदमी को एक थप्पड़ जड़ दिया वो भी सरेआम भरे बाजार । अब लोगों को थप्पड़ से डर नहीं लगता । आम जनता अब अपने चयनित प्रतिनिधियों से काम का हिसाब मांगती है । अपने खून -पसीने की कमाई से जनता टैक्स का भुगतान करती है और उससे जो सार्वजनिक संपत्तियाँ बनाई जाती हैं वो टिकाऊ हो न कि दिखाऊ हो । अपने देश में ऑल वेदर रोड ,फ्लाई ओवर, एक्सप्रेस वे तो बनते बाद में हैं ढहते पहले हैं और दुर्घटनाग्रस्त होता है आम आदमी। कभी - कभी इन दुर्घटनाओं में आम आदमी अपनी जान से ही हाथ धो बैठते हैं । लोग अब तो नेताओं से सवाल पूछते हैं । जब जवाब देते नहीं बनता है तो अपना संतुलन खो बैठा नेता उस आम आदमी को ही थप्पड़ मारता है जिसके वोट से वो अपनी जीत हासिल करता है।
मतदान के समय तो नेता जी को आम आदमी भगवान नज़र आता है ।तब जनता को नेता जी अर्श पर बैठा देते हैं और जीत के बाद नेता जी अर्श पर और जनता फर्श पर । चुनाव जीतने के बाद यही मतदाता अपनी समस्याओं के समाधान के लिए इधर से उधर दौड़ लगता है और खुद ही मसोस कर रह जाता है । सवाल पूछो तो जवाब और समाधान में ऐसा थप्पड़ जिसकी गूंज सारा देश सुनता है और देखता भी है। अब जनता जाग रही है । इसीलिए उसे थप्पड़ से डर नहीं लगता है...।
(मुनिरका एन्कलेव, दिल्ली)





No comments:
Post a Comment