SIR विवाद पर विपक्ष का चुनाव आयोग पर हमला, राहुल बोले- ‘समय आएगा, पकड़ेंगे’

केजरीवाल ने दिल्ली-हरियाणा के चुनाव रद्द करने की मांग की, अखिलेश ने निष्पक्षता पर उठाए सवाल; आयोग बोला- सभी फैसले सर्वसम्मति से हुए

नई दिल्ली। मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर चुनाव आयोग के भीतर कथित मतभेदों की रिपोर्ट सामने आने के बाद राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी, आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल और समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव समेत विपक्ष के कई नेताओं ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। हालांकि, चुनाव आयोग के सूत्रों ने इन खबरों को खारिज करते हुए कहा है कि SIR समेत आयोग के सभी फैसले तीनों चुनाव आयुक्तों की सहमति से लिए गए हैं।

राहुल गांधी बोले- ‘समय आएगा, हम आपको पकड़ेंगे’

राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पर जारी वीडियो में SIR और मतदाता सूची से जुड़े मुद्दों को लेकर चुनाव आयोग पर तीखा हमला बोला। उन्होंने ‘वोट की चोरी’ को देश के लोगों के खिलाफ अपराध बताते हुए कहा कि यह संविधान पर हमला है। राहुल गांधी ने अपने बयान में चुनाव आयोग और अधिकारियों को चेतावनी देते हुए कहा कि “समय आएगा, हम आपको पकड़ेंगे” और इसे ‘राजद्रोह’ बताया।

राहुल के इन आरोपों पर चुनाव आयोग की ओर से कहा गया है कि आयोग के सभी निर्णय सामूहिक रूप से लिए गए हैं।

केजरीवाल ने दिल्ली-हरियाणा के चुनाव रद्द करने की मांग की

AAP संयोजक अरविंद केजरीवाल ने SIR को लेकर सामने आई रिपोर्टों के आधार पर चुनाव आयोग की भूमिका पर सवाल उठाए। उन्होंने दिल्ली और हरियाणा के चुनाव रद्द करने की मांग की। केजरीवाल ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ गिरफ्तारी और देशद्रोह का मुकदमा चलाने की भी मांग की।

अखिलेश बोले- निष्पक्ष संस्था पर सवाल उठना गंभीर

समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भी चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि यदि आयोग के अधिकारियों के स्तर पर लगातार आपत्तियां दर्ज की गई हैं तो यह विचार करने का विषय है कि संस्था किस तरह काम कर रही थी। अखिलेश ने इसे लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए चिंता का विषय बताया।

कांग्रेस नेता और वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने भी चुनाव आयोग के भीतर कथित मतभेदों को लेकर मुख्य चुनाव आयुक्त पर सवाल उठाए और आरोप लगाया कि आयोग की कार्यप्रणाली को प्रभावित किया गया।

रिपोर्ट में 14 बार आपत्ति का दावा

‘द इंडियन एक्सप्रेस’ की रिपोर्ट के अनुसार, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने नवंबर 2025 से अगस्त 2026 के बीच कम से कम 14 बार लिखित आपत्तियां दर्ज कीं। रिपोर्ट में दावा किया गया कि ये आपत्तियां SIR के अलावा नए मतदाताओं के पंजीकरण के लिए फॉर्म-6 में बदलाव, मतदाता सूची से नाम जोड़ने-हटाने, पश्चिम बंगाल में मतदाता संबंधी अपील और चुनावी डेटा तक पहुंच जैसे मुद्दों से जुड़ी थीं।

रिपोर्ट के मुताबिक, दोनों चुनाव आयुक्तों ने कुछ मामलों में यह सवाल भी उठाया कि आयोग के नाम से जारी कुछ फैसले या आदेश उनकी जानकारी अथवा मंजूरी के बिना कैसे जारी हुए। रिपोर्ट में मतदाता सूची के डिजिटल डेटा के केंद्रीकरण को लेकर भी आपत्तियों का उल्लेख किया गया है।

चुनाव आयोग ने रिपोर्ट को किया खारिज

वहीं, चुनाव आयोग के सूत्रों ने इन दावों को खारिज करते हुए कहा कि SIR सहित आयोग के सभी फैसले सर्वसम्मति से लिए गए हैं। आयोग के मुताबिक मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और दोनों चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू व विवेक जोशी की मंजूरी से फैसले हुए हैं।

आयोग के सूत्रों ने यह भी कहा कि किसी मुद्दे पर आयुक्तों की व्यक्तिगत राय अलग हो सकती है, लेकिन आयोग का अंतिम निर्णय सामूहिक और सर्वसम्मत रहा है।

विवाद के केंद्र में SIR और मतदाता सूची

SIR के तहत मतदाता सूची की समीक्षा और संशोधन की प्रक्रिया को लेकर पहले से ही राजनीतिक और कानूनी बहस चल रही है। पश्चिम बंगाल में SIR के दौरान हटाए गए मतदाताओं से संबंधित बड़ी संख्या में अपीलें भी सामने आई हैं। वहीं, दिल्ली में SIR के दौरान जारी ‘लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी’ नोटिसों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने भी चुनाव आयोग से स्पष्टीकरण मांगा है।

ऐसे में चुनाव आयोग के भीतर कथित आपत्तियों की रिपोर्ट और आयोग की ओर से सर्वसम्मति के दावे ने SIR को लेकर राजनीतिक बहस को और तेज कर दिया है।

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