पूर्व CM के PA के घर ED की रेड, 32 लाख कैश और 200 ग्राम सोना बरामद
VPDO परीक्षा घोटाले की जांच में बड़ी कार्रवाई; 12 महंगी घड़ियों की कीमत करीब 1.28 करोड़, परिवार के बैंक खातों में मिले 52.16 लाख रुपये भी फ्रीज
देहरादून। उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (UKSSSC) की ग्राम पंचायत विकास अधिकारी (VPDO) परीक्षा-2016 में कथित घोटाले की जांच के सिलसिले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बड़ी कार्रवाई की है। देहरादून सब-जोनल कार्यालय की टीम ने 10 सितंबर को देहरादून में कई ठिकानों पर छापेमारी की। कार्रवाई धनशोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत की गई।
ईडी के अनुसार, जांच 2016 की VPDO परीक्षा में OMR शीट से कथित छेड़छाड़ और उम्मीदवारों से पैसे लेकर परीक्षा परिणाम प्रभावित करने के आरोपों से जुड़ी है।
पूर्व मुख्यमंत्री के PA के घर भी तलाशी
ईडी ने चंदन सिंह जीना के घर की भी तलाशी ली। जीना वर्तमान में उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश सिंह रावत के निजी सहायक (PA) के तौर पर काम कर रहे हैं। इससे पहले वह वर्ष 2009 से 2017 के दौरान रावत के मुख्यमंत्री कार्यकाल में OSD भी रह चुके हैं।
जांच एजेंसी के मुताबिक, VPDO परीक्षा की OMR शीट को UKSSSC की सुरक्षित जगह से कथित तौर पर तत्कालीन सचिव के निजी आवास पर ले जाया गया था। इसी कड़ी में जीना से जुड़े ठिकानों की तलाशी ली गई।
32 लाख रुपये नकद और 200.5 ग्राम सोना
ईडी के मुताबिक, तलाशी के दौरान चंदन सिंह जीना के घर से 32 लाख रुपये की बेहिसाब नकदी बरामद हुई। इसके अलावा करीब 200.5 ग्राम सोना मिला, जिसमें 13 सोने के सिक्के और सात सोने की चेन शामिल हैं।
तलाशी में Rolex, Rado, Piaget, Movado, Tissot और Casio Edifice समेत 12 महंगे ब्रांड की घड़ियां भी मिलीं। ईडी ने इनकी कीमत फिलहाल करीब 1.28 करोड़ रुपये आंकी है। एजेंसी के अनुसार कुछ घड़ियों का मूल्यांकन अभी किया जा रहा है, ऐसे में कुल कीमत बढ़ सकती है।
परिवार के बैंक खाते भी फ्रीज
ईडी ने PMLA की धारा 17(1A) के तहत चंदन सिंह जीना और उनके परिवार के सदस्यों के बैंक खातों को भी फ्रीज किया है। इन खातों में कुल 52.16 लाख रुपये का बैलेंस बताया गया है। जांच के लिए जीना का मोबाइल फोन भी जब्त किया गया।
ईडी का दावा है कि जांच में जीना द्वारा बड़ी रकम नकद खर्च किए जाने की जानकारी सामने आई है। एजेंसी के अनुसार इन रकम के स्रोत का संतोषजनक विवरण नहीं मिला और बरामद नकदी, सोना व अन्य संपत्तियां उनकी ज्ञात आय के स्रोतों से मेल नहीं खातीं।
OMR शीट में कथित तौर पर भरे गए जवाब
जांच एजेंसी के अनुसार, घोटाले में उन OMR शीट के रोल नंबर अलग किए गए थे, जिनमें कम उत्तर भरे गए थे। आरोप है कि इन रोल नंबरों को बाद में निजी कंप्यूटर एजेंसी के कर्मचारियों को दिया गया।
ईडी का कहना है कि कर्मचारियों ने कथित तौर पर पैसे लेकर OMR शीट में उत्तरों के गोले भरे और उनमें बदलाव किया। इसके बाद शीट को दोबारा सील कर दिया गया। एजेंसी के मुताबिक, इस पूरी प्रक्रिया के बदले अवैध रकम बिचौलियों के जरिए पहुंचाई गई।
ईडी की कार्रवाई के बाद अब परीक्षा घोटाले से जुड़े लेनदेन, संपत्तियों और कथित धन के स्रोत की जांच आगे बढ़ाई जा रही है।

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