हाई कोर्ट बेंच पर CM के बयान से पश्चिम यूपी में उबाल, 22 जिलों में अधिवक्ता कार्य से विरत

मेरठ में कचहरी परिसर में निकाला जुलूस, ‘बेंच नहीं तो वोट नहीं’ के नारे; मेरठ बार के फैसले से जिला बार ने खुद को रखा अलग

मेरठ। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में हाई कोर्ट बेंच की स्थापना की मांग को लेकर अधिवक्ताओं का आंदोलन बुधवार को और तेज हो गया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के साथ सोमवार को हुई वार्ता में बेंच की स्थापना को लेकर प्रदेश सरकार के अधिकार क्षेत्र पर दिए गए बयान के बाद हाई कोर्ट बेंच स्थापना केंद्रीय संघर्ष समिति ने पश्चिमी उत्तर प्रदेश के 22 जिलों में न्यायिक कार्य से विरत रहने का आह्वान किया। मेरठ में मेरठ बार एसोसिएशन से जुड़े अधिवक्ताओं ने कचहरी परिसर में जुलूस निकालकर विरोध प्रदर्शन किया और नारेबाजी की।

50 साल से चल रही है बेंच की मांग

अधिवक्ताओं का कहना है कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश में हाई कोर्ट की बेंच स्थापित करने की मांग पांच दशक से अधिक समय से चली आ रही है। सोमवार को मेरठ में मुख्यमंत्री के साथ प्रतिनिधिमंडल की वार्ता में इस मांग को रखा गया। रिपोर्टों के अनुसार मुख्यमंत्री ने बेंच स्थापना को अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर बताते हुए सुप्रीम कोर्ट से संबंधित विषय बताया। इसके बाद अधिवक्ताओं ने आंदोलन जारी रखने का निर्णय लिया।

मंगलवार को मेरठ बार एसोसिएशन की आमसभा में बुधवार को पश्चिमी उत्तर प्रदेश के 22 जिलों में न्यायिक कार्य से विरत रहने का निर्णय लिया गया था। हाई कोर्ट बेंच स्थापना केंद्रीय संघर्ष समिति के अध्यक्ष अनुज शर्मा और संयोजक परवेज आलम के अनुसार बुधवार को मेरठ समेत सभी संबंधित जिलों में विरोध कार्यक्रम आयोजित किए गए।

मेरठ कचहरी में निकाला जुलूस

मेरठ में मेरठ बार एसोसिएशन के अध्यक्ष एवं केंद्रीय संघर्ष समिति के चेयरमैन अनुज शर्मा और महामंत्री एवं समिति के संयोजक परवेज आलम के नेतृत्व में अधिवक्ताओं ने कचहरी परिसर में जुलूस निकाला। इस दौरान बेंच की मांग को लेकर नारेबाजी की गई। अधिवक्ताओं ने न्यायिक कार्य से विरत रहने के निर्णय को सफल बनाने के लिए कचहरी परिसर में निगरानी भी रखी।

कचहरी के विभिन्न प्रवेश द्वारों और प्रमुख स्थानों पर ‘बेंच नहीं तो वोट नहीं’ जैसे नारे लिखे बैनर और पोस्टर भी लगाए गए। मेरठ बार एसोसिएशन की ओर से भाजपा जनप्रतिनिधियों और पदाधिकारियों के कचहरी परिसर में प्रवेश पर रोक संबंधी बैनर लगाए जाने की भी जानकारी सामने आई है।

MP-MLA कोर्ट में पैरवी नहीं करने का भी निर्णय

मेरठ बार एसोसिएशन ने मंगलवार की आमसभा में भाजपा जनप्रतिनिधियों से जुड़े मामलों की MP-MLA कोर्ट में पैरवी नहीं करने और पहले से दाखिल कुछ वकालतनामे वापस लेने का निर्णय भी बताया था। बार पदाधिकारियों के अनुसार आगे केंद्रीय संघर्ष समिति की बैठक में आंदोलन की अगली रणनीति तय की जाएगी।

जिला बार ने किया अलग रुख

वहीं मेरठ जिला बार एसोसिएशन ने मेरठ बार एसोसिएशन के कार्य बहिष्कार के फैसले से खुद को अलग रखा। जिला बार अध्यक्ष रविंद्र कुमार सिंह और महामंत्री प्रशांत गुप्ता के अनुसार मंगलवार शाम प्रबंध समिति, पूर्व अध्यक्षों-पूर्व महामंत्रियों और वरिष्ठ अधिवक्ताओं की बैठक में बुधवार को सामान्य रूप से न्यायिक कार्य करने का निर्णय लिया गया।

जिला बार पदाधिकारियों ने कहा कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश में केंद्रीय संघर्ष समिति के निर्णय अलग स्तर पर लिए जाते हैं, जबकि मेरठ बार एसोसिएशन ने अपनी आमसभा के आधार पर कार्य बहिष्कार का फैसला किया है। इसलिए जिला बार के सदस्य बुधवार को सामान्य रूप से न्यायिक कार्य करते रहे।

आंदोलन आगे बढ़ाने की तैयारी

हाई कोर्ट बेंच की मांग को लेकर अधिवक्ताओं का आंदोलन लंबे समय से चल रहा है। बुधवार के कार्य बहिष्कार के बाद केंद्रीय संघर्ष समिति की अगली बैठक में आगे की रणनीति तय किए जाने की बात कही गई है। इस बीच मेरठ कचहरी में आंदोलन को लेकर अधिवक्ताओं के दो संगठनों के अलग-अलग रुख ने स्थिति को भी चर्चा में ला दिया है।

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