राम मंदिर के पहले CEO बने पूर्व एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा
ऑपरेशन सिंदूर से लेकर करगिल तक का रहा शानदार सैन्य अनुभव, अब संभालेंगे राम मंदिर की व्यवस्थाएं
अयोध्या। अयोध्या के श्रीराम जन्मभूमि मंदिर को अब पहला चीफ एग्जीक्यूटिव ऑफिसर (CEO) मिल गया है। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने बुधवार को पूर्व एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा के नाम पर मुहर लगा दी। देवरिया निवासी मिश्रा करीब 39 वर्ष तक भारतीय वायुसेना में सेवाएं देने के बाद 30 अप्रैल 2026 को सेवानिवृत्त हुए थे।
पश्चिमी वायु कमान के रह चुके हैं प्रमुख
जितेंद्र मिश्रा ने 6 दिसंबर 1986 को फाइटर पायलट के तौर पर भारतीय वायुसेना में कदम रखा था। तीन हजार घंटे से अधिक उड़ान अनुभव वाले मिश्रा ने 18 से ज्यादा प्रकार के लड़ाकू विमान, परिवहन विमान और हेलीकॉप्टर उड़ाए हैं। वह फाइटर कॉम्बैट लीडर और एक्सपेरिमेंटल टेस्ट पायलट भी रह चुके हैं।
1 जनवरी 2025 को उन्होंने पश्चिमी वायु कमान (WAC) के एयर ऑफिसर कमांडिंग इन चीफ का पद संभाला था। पाकिस्तान से लगती सीमा और पश्चिमी मोर्चे की सुरक्षा के लिहाज से यह वायुसेना की बेहद अहम कमान मानी जाती है।
करगिल युद्ध में निभाई अहम भूमिका
मिश्रा के सैन्य करियर का एक महत्वपूर्ण अध्याय करगिल युद्ध भी रहा। वह उस टीम का हिस्सा थे जिसने मिराज-2000 विमानों पर लेजर गाइडेड बम को ऑपरेशनल किया था। इन हथियारों का इस्तेमाल टाइगर हिल और मुंथो ढालो जैसे महत्वपूर्ण लक्ष्यों पर किया गया था।
वर्ष 2010 में उन्होंने ऑपरेशन गरुड़ के दौरान भारतीय वायुसेना की टीम का नेतृत्व भी किया था।
ऑपरेशन सिंदूर से भी जुड़ा नाम
जितेंद्र मिश्रा का नाम ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भी खास तौर पर चर्चा में रहा। पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत ने 6-7 मई 2025 की दरमियानी रात पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में आतंकी ठिकानों के खिलाफ सैन्य कार्रवाई की थी।
उस समय पश्चिमी वायु कमान की कमान मिश्रा के हाथों में थी। भारत-पाकिस्तान सैन्य घटनाक्रम और ऑपरेशन सिंदूर को लेकर उनकी टिप्पणियां भी सुर्खियों में रहीं। अगस्त 2026 में उन्होंने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान महिला पायलटों के प्रदर्शन और भूमिका पर भी बात की थी।
अब राम मंदिर की बड़ी जिम्मेदारी
वायुसेना में रणनीतिक और प्रशासनिक जिम्मेदारियां संभालने के लंबे अनुभव के बाद अब जितेंद्र मिश्रा को राम मंदिर की व्यवस्थाओं की जिम्मेदारी सौंपी गई है। CEO के रूप में वह मंदिर के संचालन, प्रशासनिक व्यवस्था और विभिन्न गतिविधियों के बेहतर समन्वय में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
राम मंदिर में चढ़ावे की चोरी का मामला सामने आने के बाद मंदिर की व्यवस्थाओं को लेकर भी सवाल उठे थे। ऐसे समय में सैन्य पृष्ठभूमि और प्रशासनिक अनुभव वाले अधिकारी को CEO बनाए जाने को ट्रस्ट के स्तर पर व्यवस्था को अधिक पेशेवर बनाने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।


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