आईआईएमटी आयुर्वेदिक महाविद्यालय में संस्कृत सप्ताह का आयोजन, छात्रों ने संस्कृत में किया संवाद
संस्कृत गीत, श्लोक, संवाद और नाटक ने मोहा मन; आईआईएमटी इंजीनियरिंग कॉलेज में संस्कृत अध्ययन केंद्र का भी हुआ उद्घाटन
मेरठ। आईआईएमटी विश्वविद्यालय स्थित आईआईएमटी आयुर्वेदिक महाविद्यालय एवं चिकित्सालय में संस्कृत सप्ताह का आयोजन उत्साह और विविध कार्यक्रमों के साथ किया गया। सप्ताहभर चले आयोजन में विभिन्न बैचों के छात्र-छात्राओं ने प्रतिभाग किया। खास बात यह रही कि सभी कार्यक्रमों का संचालन विद्यार्थियों ने संस्कृत भाषा के माध्यम से स्वयं किया।
संस्कृत में परिचय से हुई शुरुआत
संस्कृत सप्ताह के प्रथम दिन विद्यार्थियों ने संस्कृत भाषा में अपना परिचय देते हुए आपस में सम्भाषण किया। इसके माध्यम से उन्होंने संस्कृत को केवल अध्ययन का विषय न मानकर जीवनोपयोगी भाषा के रूप में प्रस्तुत किया। दूसरे दिन विद्यार्थियों ने विभिन्न प्रकार के संवादों का संस्कृत में प्रस्तुतिकरण किया।
तीसरे दिन भित्तिपत्रिका का निर्माण किया गया, जिसमें संस्कृत के सुभाषित और श्लोकों को प्रमुखता दी गई। चौथे दिन आयोजित संस्कृत गीत प्रतियोगिता में विद्यार्थियों ने संस्कृत गीतों की प्रस्तुतियों से सभी का मन मोह लिया।
रामायण और गीता के पाठ से संस्कृत साहित्य का महत्व बताया
समापन दिवस पर आयोजित सम्पूर्ति कार्यक्रम में केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, नई दिल्ली के संस्कृत अध्यापक डॉ. ईशेन्द्र कुमार पाराशर ने विद्यार्थियों को वाल्मीकि रामायण और श्रीमद्भगवद्गीता का पाठ कराया। उन्होंने इन ग्रंथों के महत्व पर प्रकाश डालते हुए विद्यार्थियों को इनके अध्ययन के लिए प्रेरित किया।
कार्यक्रम में प्राचार्य डॉ. सुजीत कुमार दलाई, डॉ. नीरज शर्मा, डॉ. अंकित शर्मा, डॉ. आदित्य शर्मा, डॉ. वासवी, डॉ. प्रीती, डॉ. चित्रांशु सक्सैना, डॉ. रिण्टो, डॉ. विकास गोठवाल, डॉ. रुची और डॉ. अक्षिता चौधरी सहित आयुर्वेद महाविद्यालय के चिकित्सक एवं गणमान्य अतिथि मौजूद रहे।
इंजीनियरिंग कॉलेज में संस्कृत अध्ययन केंद्र का उद्घाटन
इसी अवसर पर आईआईएमटी इंजीनियरिंग कॉलेज में संस्कृत अध्ययन केंद्र का भी उद्घाटन किया गया। इंजीनियरिंग कॉलेज के निदेशक डॉ. धीरेन्द्र कुमार ने विद्यार्थियों को संस्कृत अध्ययन के लिए प्रेरित किया और इसके महत्व पर जोर दिया।
संस्कृत अध्ययन केंद्र के अंतर्गत मुक्ताकाश बाल अकादमी में संस्कृत बाल केंद्र भी संचालित किया जा रहा है। यहां आयोजित कार्यक्रम में कक्षा एक से आठ तक के विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। बच्चों ने संस्कृत में नाटक और वार्तालाप की प्रस्तुति देकर अतिथियों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
आयोजन के माध्यम से विद्यार्थियों में संस्कृत भाषा के प्रति रुचि बढ़ाने के साथ भारतीय ज्ञान परंपरा, संस्कृति और संस्कृत साहित्य से जुड़ाव को प्रोत्साहित किया गया।


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