संवाद की कमी से बिखर रहे परिवार, रिश्तों में बढ़ रही दूरियां

राष्ट्रीय महिला आयोग की सदस्यों ने मेरठ में कहा- अकेलेपन और तनाव से बचने के लिए परिवार में विश्वास, सम्मान और बातचीत जरूरी

मेरठ। परिवार कभी व्यक्ति के लिए सबसे बड़ा सहारा हुआ करता था, लेकिन बदलती जीवनशैली में परिवारों का बिखराव, रिश्तों में बढ़ती दूरी और वैवाहिक विवाद चिंता का विषय बनते जा रहे हैं। संवादहीनता के कारण पति-पत्नी के रिश्तों में तनाव बढ़ रहा है, जिसका असर बच्चों और बुजुर्गों पर भी पड़ रहा है। राष्ट्रीय महिला आयोग की सदस्यों ने मेरठ में परिवार, रिश्ते और समाज से जुड़े मुद्दों पर चर्चा के दौरान संवाद को रिश्तों की मजबूती का अहम आधार बताया।

छोटे मतभेद बन जाते हैं बड़ी वजह

चर्चा में कहा गया कि परिवार अचानक नहीं टूटता। छोटे-छोटे मतभेद, एक-दूसरे की बात न सुनना, गुस्सा, अहंकार और हर स्थिति में खुद को सही मानने की प्रवृत्ति धीरे-धीरे रिश्तों में दूरी पैदा करती है। मोबाइल और सोशल मीडिया का अत्यधिक इस्तेमाल, आर्थिक तनाव और परिवार के लिए समय का अभाव भी रिश्तों पर असर डाल रहा है।

बच्चे घर से सीखते हैं रिश्तों की भाषा

परिवार में बच्चों की परवरिश का भी रिश्तों पर गहरा प्रभाव पड़ता है। बच्चे वही व्यवहार सीखते हैं, जो वे अपने घर में देखते हैं। यदि उन्हें बचपन से सम्मानजनक संवाद और आपसी सहयोग का माहौल मिलता है, तो आगे चलकर उनके स्वस्थ रिश्ते बनाने की संभावना बढ़ती है।

वहीं, युवा पीढ़ी के लिए शिक्षा, करियर और आत्मनिर्भरता भी महत्वपूर्ण प्राथमिकताएं बन गई हैं। ऐसे में विवाह और परिवार की जिम्मेदारियों को लेकर अपेक्षाओं में बदलाव आया है। इसे समझने के लिए विवाह से पहले जीवनसाथी के साथ भविष्य की योजनाओं, जिम्मेदारियों और अपेक्षाओं पर खुलकर बातचीत जरूरी है।

विश्वास और सम्मान से मजबूत होते हैं रिश्ते

एक स्वस्थ परिवार की नींव केवल प्रेम पर नहीं, बल्कि विश्वास, सम्मान, धैर्य, जिम्मेदारी और समान भागीदारी पर टिकी होती है। मतभेद होना स्वाभाविक है, लेकिन गुस्से में निर्णय लेने के बजाय शांतिपूर्वक बातचीत से समाधान तलाशना जरूरी है। एक-दूसरे को सुनना और जरूरत पड़ने पर माफ करना भी रिश्तों को मजबूत बनाता है।

बिना मोबाइल परिवार के साथ बिताएं समय

परिवारों को मजबूत बनाए रखने के लिए रोज कुछ समय बिना मोबाइल के परिवार के साथ बिताने की सलाह दी गई। बच्चों के सामने सम्मानजनक व्यवहार करने, महिलाओं और पुरुषों के अधिकारों व जिम्मेदारियों का सम्मान करने तथा बच्चों में सहानुभूति, जिम्मेदारी और संवाद कौशल विकसित करने पर जोर दिया गया।

परिवार में बातचीत का माहौल बना रहे तो तनाव और गलतफहमियों को समय रहते दूर किया जा सकता है। रिश्तों को बचाने के लिए बड़े बदलावों से पहले एक-दूसरे को सुनने और समझने की आदत विकसित करना जरूरी है।

No comments:

Post a Comment

Popular Posts