एआई के वैश्विक नियमन में भारतीय दर्शन की भूमिका पर बोले डॉ. विवेक त्यागी

ब्राजील में वर्ल्ड कांग्रेस में CCSU के विधि विभागाध्यक्ष ने रखा ‘न्याय, धर्म और एल्गोरिदमिक जस्टिस’ का मॉडल

मेरठ। चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय के विधि विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर एवं विधि अध्ययन विभागाध्यक्ष डॉ. विवेक कुमार त्यागी ने ब्राजील के मिनास गेरैस में आयोजित वर्ल्ड कांग्रेस में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के वैश्विक नियमन में प्राचीन भारतीय न्याय दर्शन की भूमिका पर अपना शोध प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि एआई से जुड़े मौजूदा वैश्विक नैतिक और नियामकीय ढांचे में वास्तविक न्याय, जवाबदेही और संदर्भ आधारित निर्णय के पहलुओं को और मजबूत करने की जरूरत है।

डॉ. त्यागी ने ‘Nyaya, Dharma and Algorithmic Justice: Hindu Legal Philosophy and the Governance of Artificial Intelligence’ विषय पर व्याख्यान दिया। उन्होंने भारतीय विधि दर्शन के धर्मशास्त्र, कौटिल्य के अर्थशास्त्र और न्याय दर्शन में निहित कर्तव्य, प्रमाण, अनुपातिकता और उपचार की अवधारणाओं को एआई गवर्नेंस से जोड़ने का प्रस्ताव रखा।

पांच स्तरों वाला मॉडल किया प्रस्तुत

डॉ. त्यागी ने एआई के नियमन के लिए पांच स्तरीय ढांचा प्रस्तुत किया। इसमें ‘साधारण फ्लोर’ के तहत सत्यनिष्ठा, अहिंसा और भेदभाव रहित निर्णय को सार्वभौमिक आधार बनाने, ‘स्वधर्म कैलिब्रेशन’ के तहत स्वास्थ्य, क्रेडिट स्कोरिंग और आपराधिक न्याय जैसे क्षेत्रों के लिए संदर्भ आधारित नियम बनाने का प्रस्ताव रखा।

इसी तरह ‘प्रमाण रिव्यू’ में एआई के निष्कर्षों की प्रमाण और व्याख्यात्मकता के आधार पर जांच, ‘राजधर्म जवाबदेही’ में मानव एवं संस्थागत निगरानी को अनिवार्य रखने तथा ‘न्याय ऑडिट’ में एआई के वास्तविक प्रभाव की लगातार समीक्षा का सुझाव दिया।

उन्होंने कहा कि प्राचीन ग्रंथों की अवधारणाओं का आधुनिक संदर्भ में उपयोग करते समय ऐतिहासिक सामाजिक असमानताओं को स्पष्ट रूप से अस्वीकार करते हुए उनके विश्लेषणात्मक पक्ष को अपनाया जाना चाहिए। उन्होंने एआई शासन व्यवस्था में बहुलतावादी और व्यापक न्याय दृष्टिकोण की आवश्यकता पर जोर दिया।

वर्ल्ड कांग्रेस में 23 देशों के 127 वक्ता शामिल हुए। कार्यक्रम में प्रो. जॉर्ज इसाक टोरेस मैनरिक (पेरू), प्रो. मार्सियो एडुआर्डो सेनरा नोगुएरा पेड्रोसा मोराइस, डेल्टन रिबेरो, प्रो. मौरिसियो दा कुन्हा साविनो फिलो, प्रो. क्लेडी कैल्गारो (ब्राजील), प्रो. लारिसा सानिकोवा (रूस), प्रो. रॉबर्टो गैरेटो (इटली), प्रो. रुबेन मिरांडा गोंजाल्वेस (स्पेन), प्रो. टार्सिस बैरेटो उलिवेरा (ब्राजील) और प्रो. एडुआर्डो जे.आर. लुगदार (अर्जेंटीना) सहित विभिन्न देशों के शिक्षाविद उपस्थित रहे।

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