मास्को के अंतरराष्ट्रीय मंच पर गूंजा मेरठ का शोध, एआई और कॉपीराइट की चुनौतियों पर बोले आशीष कौशिक

विज्ञान कूटनीति सम्मेलन में CCSU के सहायक प्रोफेसर ने दिया ऑनलाइन व्याख्यान, जेनेरेटिव एआई, डेटा स्क्रैपिंग और कॉपीराइट कानून के बीच संतुलन पर रखे विचार

मेरठ। चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय (सीसीएसयू) के विधि अध्ययन संस्थान के सहायक प्रोफेसर आशीष कौशिक ने मास्को में आयोजित उच्च स्तरीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन ‘विज्ञान कूटनीति: नए भू-राजनीतिक संदर्भ में’ में ऑनलाइन माध्यम से अपना व्याख्यान प्रस्तुत किया। उनके व्याख्यान का मुख्य केंद्र जेनेरेटिव एआई, डेटा स्क्रैपिंग और कॉपीराइट कानून से जुड़े उभरते कानूनी सवाल रहे।

मास्को चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री में आयोजित सम्मेलन का संयुक्त आयोजन रूसी अकादमी ऑफ साइंसेज के वैज्ञानिक सूचना संस्थान, चीन राजनीतिक विज्ञान एवं कानून विश्वविद्यालय तथा रूसी अंतर्राष्ट्रीय मामलों की परिषद ने किया। सम्मेलन में विभिन्न देशों के अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों, नीति निर्माताओं, कानूनी विद्वानों और उद्योग प्रतिनिधियों ने वैज्ञानिक सहयोग, तकनीकी शासन और वैश्विक कानूनी ढांचे पर विचार-विमर्श किया।

एआई के दौर में कॉपीराइट पर उठाए सवाल

सहायक प्रोफेसर आशीष कौशिक ने अपने व्याख्यान में जेनेरेटिव एआई के प्रशिक्षण में इस्तेमाल होने वाले डेटा, डेटा स्क्रैपिंग और कॉपीराइट संरक्षण के बीच उत्पन्न हो रहे कानूनी तनाव को रेखांकित किया। उन्होंने अमेरिका, यूरोप और भारत में अपनाए जा रहे अलग-अलग नियामक दृष्टिकोणों का उल्लेख करते हुए स्पष्ट शोध छूट, डेटासेट में पारदर्शिता और मानकीकृत लाइसेंसिंग व्यवस्था की आवश्यकता पर जोर दिया।

उन्होंने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता के विकास के साथ ऐसे कानूनी ढांचे की जरूरत है, जो नवाचार को बढ़ावा देने के साथ रचनाकारों और उनके बौद्धिक संपदा अधिकारों की भी रक्षा कर सके। एआई मानव ज्ञान और रचनात्मक संसाधनों का विस्तार करे, इसके लिए तकनीकी विकास और कानूनी संरक्षण के बीच संतुलन जरूरी है।

वैश्विक सहयोग पर हुआ मंथन

सम्मेलन में सहयोगात्मक अनुसंधान, तकनीकी शासन और सीमा पार कानूनी ढांचे को वर्तमान भू-राजनीतिक परिस्थितियों में वैज्ञानिक सहयोग के प्रभावी माध्यम के रूप में विकसित करने पर चर्चा हुई। पर्यावरण संरक्षण, बहुध्रुवीय सहयोग, वैश्विक डिजिटल गवर्नेंस और वाणिज्यिक नवाचार जैसे विषय भी चर्चा के केंद्र में रहे।

सम्मेलन के समापन पर प्रतिभागियों ने वैज्ञानिक अनुसंधान को व्यावहारिक व्यावसायिक क्षमताओं से जोड़ने तथा अंतरराष्ट्रीय शोध में टिकाऊ और न्यायसंगत भागीदारी के लिए प्रभावी तंत्र विकसित करने पर जोर दिया। रूस, चीन, भारत और अन्य साझेदार देशों के प्रतिनिधियों ने वैश्विक शांति, अंतरराष्ट्रीय कानून और मानवीय प्रगति के लिए वैज्ञानिक अनुसंधान एवं सहयोग के महत्व को रेखांकित किया।

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