डिफेंस प्रोजेक्ट्स में देरी पर राजनाथ सिंह ने जताई चिंता
कहा- लागत में होती है वृद्धिबेंगलुरु (एजेंसी)।रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड के सबसे बड़े एयरक्राफ्ट कॉम्प्लेक्स से एक ही मंच से तीन स्वदेशी एविएशन प्लेटफॉर्म सौंपे जाने की सराहना की। इसके साथ-साथ रक्षा मंत्री ने स्वदेशी रक्षा परियोजनाओं में होने वाली देरी पर गंभीर चिंता व्यक्त की। इस दौरान भारतीय वायुसेना को दो एफओसी एलसीए एमके1 ट्रेनर और तीन एचटीटी-40 ट्रेनर विमान, तथा पवन हंस लिमिटेड को चार ध्रुव एनजी नागरिक हेलीकॉप्टर औपचारिक रूप से सौंपे गए।
सराहना के साथ-साथ रक्षा मंत्री ने स्वदेशी रक्षा परियोजनाओं में होने वाली देरी पर गंभीर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि देरी की वजह से लागत में भारी वृद्धि होती है और तकनीक के आउटडेटेड होने का जोखिम बढ़ जाता है। उन्होंने चल रही तकनीकी परियोजनाओं के लिए व्यावहारिक समयसीमा तय करने की बात कही। यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब वायुसेना द्वारा एचएएल को दिए गए 180 तेजस एमके1ए विमानों की डिलीवरी मिसाइल और रडार इंटीग्रेशन की समस्याओं के कारण अटकी हुई है।
इनमें 2021 में 83 जेट और 2025 में 97 फाइटर्स के लिए किए गए 1.1 लाख करोड़ रुपये से अधिक के सौदे शामिल हैं। इस देरी का सीधा असर वायुसेना की लड़ाकू क्षमता पर पड़ रहा है, जहां स्वीकृत 42.5 स्क्वाड्रन के मुकाबले वर्तमान में मात्र 29 स्क्वाड्रन ही सक्रिय रह गए हैं।
नागरिक उड्डयन मंत्री के. राममोहन नायडू और वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह की मौजूदगी में राजनाथ सिंह ने युवा वैज्ञानिकों, इंजीनियरों, डिजाइनरों, टेस्ट पायलट्स और तकनीशियनों से ऐसी तकनीकें विकसित करने की चुनौती स्वीकार करने का आह्वान किया जो आज मौजूद नहीं हैं। उन्होंने कहा कि आने वाले दशक में भारत को वैश्विक एयरोस्पेस तकनीक परिदृश्य में अग्रणी स्थान दिलाना होगा।


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