आईआईएमटी में प्रथम ज्योतिष महोत्सव का शुभारंभ
जैनाचार्य सौरभ सागर जी महाराज ने दिए आशीर्वचन, देश-विदेश के 100 से अधिक ज्योतिषाचार्यों ने लिया हिस्सा
मेरठ। आईआईएमटी विश्वविद्यालय में भारतीय ज्ञान प्रणाली एवं ज्योतिष विभाग की ओर से आयोजित दो दिवसीय प्रथम ज्योतिष महोत्सव का शनिवार को शुभारंभ हुआ। महोत्सव में देश-विदेश से आए 100 से अधिक ज्योतिषाचार्यों और विशेषज्ञों ने ज्योतिष की विभिन्न विधाओं, वैज्ञानिक एवं व्यावहारिक पक्ष तथा वर्तमान समय में इसकी उपयोगिता पर चर्चा की।
जैनाचार्य 108 श्री सौरभ सागर जी महाराज ने विद्यार्थियों को आशीर्वचन देते हुए कहा कि युवा केवल शिक्षार्थी न बनें, बल्कि विद्यार्थी बनकर अपने पुरुषार्थ को निखारें। उन्होंने कहा कि सफलता के साथ संस्कार और चरित्र निर्माण भी जरूरी है। माता-पिता का सम्मान किए बिना शिक्षा सार्थक नहीं हो सकती। उन्होंने विद्यार्थियों को पढ़ाई के साथ अपने करियर और चरित्र पर भी ध्यान देने की प्रेरणा दी।
कुलाधिपति योगेश मोहनजी गुप्ता ने कहा कि महोत्सव का उद्देश्य ज्योतिष विज्ञान के प्रति लोगों को जागरूक करना और भारतीय ज्ञान परंपरा को विश्व स्तर पर पहचान दिलाना है। उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय ज्योतिष में डिग्री, डिप्लोमा और सर्टिफिकेट पाठ्यक्रम संचालित कर रहा है। उन्होंने ज्योतिष के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान देने वाले व्यक्ति को प्रतिवर्ष पद्म भूषण सम्मान देने का प्रस्ताव भारत सरकार के समक्ष रखने की बात कही।
महोत्सव में नेपाल और श्रीलंका समेत विभिन्न राज्यों से आए विशेषज्ञों ने टैरो, न्यूमरोलॉजी, एस्ट्रोलॉजी और हीलिंग सहित ज्योतिष की विभिन्न विधाओं पर मार्गदर्शन दिया और आगंतुकों को व्यक्तिगत परामर्श भी दिया। इस दौरान कुलाधिपति योगेश मोहनजी गुप्ता और प्रति कुलाधिपति डॉ. मयंक अग्रवाल ने ज्योतिषाचार्यों को सम्मानित किया।
इस अवसर पर कुलपति डा. दीपा शर्मा, ज्योतिष विभाग की डीन आशा त्यागी, पूर्व मंत्री डॉ. नंदकिशोर पुरोहित समेत अनेक गणमान्य लोग मौजूद रहे। मंच संचालन एकता शर्मा ने किया।


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