तीन महीने से वेतन नहीं, इलेक्ट्रिक बस परिचालकों ने थामा काम

लोहियानगर डिपो में धरने पर बैठे कर्मचारी, बोले- 4.26 रुपये प्रति किमी की तय दर से भुगतान और पूरा बकाया मिलने तक नहीं चलाएंगे बस

मेरठ। करीब तीन महीने से वेतन नहीं मिलने से नाराज इलेक्ट्रिक बसों के परिचालकों ने शुक्रवार को लोहियानगर डिपो में काम बंद कर धरना शुरू कर दिया। परिचालकों ने कंपनी पर लंबे समय से भुगतान में लापरवाही का आरोप लगाते हुए स्पष्ट किया कि जब तक बकाया वेतन का भुगतान नहीं होता और समझौते के अनुसार तय दर से राशि नहीं दी जाती, तब तक वे काम पर नहीं लौटेंगे।

72 दिन इंतजार के बाद भी तय दर से कम भुगतान

परिचालकों का कहना है कि कंपनी के साथ 4.26 रुपये प्रति किलोमीटर की दर से भुगतान का समझौता हुआ था। पहले वे जेएमडी कंपनी के तहत कार्यरत थे, बाद में उन्हें एसएस कंपनी में स्थानांतरित कर दिया गया। इसके बाद से वेतन भुगतान को लेकर लगातार परेशानी बनी हुई है।

आरोप है कि करीब 72 दिन बाद वेतन का भुगतान किया गया, लेकिन 4.26 रुपये प्रति किलोमीटर की तय दर के बजाय लगभग 3.55 रुपये प्रति किलोमीटर के हिसाब से राशि दी गई। इससे परिचालकों में आक्रोश बढ़ गया। उनका कहना है कि लंबे समय तक भुगतान नहीं मिलने के बावजूद उन्होंने बसों का संचालन जारी रखा, लेकिन भुगतान में भी तय दर का पालन नहीं किया गया।

बकाया राशि का हिसाब कर भुगतान की मांग

परिचालकों ने मांग की है कि समझौते के अनुसार 4.26 रुपये प्रति किलोमीटर की दर से पूरा भुगतान किया जाए। अब तक कम दर पर किए गए भुगतान का हिसाब लगाकर बकाया राशि भी दी जाए। उनका कहना है कि वेतन में लगातार देरी से परिवार चलाने में परेशानी हो रही है।

चार्जिंग व्यवस्था को लेकर भी हो चुका है विरोध

परिचालकों के मुताबिक, इससे पहले इलेक्ट्रिक बसों की पर्याप्त चार्जिंग नहीं होने को लेकर भी विरोध किया जा चुका है। उनका आरोप है कि वेतन भुगतान और चार्जिंग व्यवस्था, दोनों समस्याओं का स्थायी समाधान नहीं हुआ है। परिचालकों ने चेतावनी दी कि बकाया वेतन और तय दर से भुगतान सुनिश्चित होने तक हड़ताल जारी रहेगी।

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