मच्छर भगाने वाला हर तेल त्वचा के लिए सुरक्षित नहीं, सोच-समझकर चुनें रिपेलेंट
डेंगू, मलेरिया और चिकनगुनिया के बढ़ते खतरे के बीच विशेषज्ञों की सलाह—लेबल देखकर ही त्वचा पर लगाएं रिपेलेंट, साफ-सफाई और बचाव के उपाय भी जरूरी
मेरठ। डेंगू, मलेरिया और चिकनगुनिया जैसी मच्छरजनित बीमारियों का खतरा बरकरार है। ऐसे में स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने लोगों से मच्छरों से बचाव के लिए प्रभावी और त्वचा पर सुरक्षित रिपेलेंट का इस्तेमाल करने की अपील की है। विशेषज्ञों का कहना है कि बाजार में उपलब्ध हर मच्छर भगाने वाला तेल त्वचा पर लगाने के लिए सुरक्षित नहीं होता। इसलिए किसी भी उत्पाद का इस्तेमाल करने से पहले उसके लेबल पर दी गई जानकारी को ध्यान से पढ़ना जरूरी है।
प्रसिद्ध स्वास्थ्य विशेषज्ञ डॉ. यश चौधरी ने कहा कि मच्छर का काटना महज परेशानी नहीं, बल्कि गंभीर संक्रमण का कारण बन सकता है। ऐसे में लोगों को भरोसेमंद और प्रमाणित मच्छर रिपेलेंट का इस्तेमाल करना चाहिए। उन्होंने विशेष रूप से स्थानीय या गैर-ब्रांडेड मच्छर भगाने वाले तेलों को त्वचा पर लगाने से पहले सावधानी बरतने की सलाह दी।
उन्होंने कहा कि कई उत्पादों पर स्पष्ट रूप से लिखा होता है कि उनका इस्तेमाल सीधे त्वचा पर नहीं किया जाना चाहिए। ऐसे उत्पादों को त्वचा पर लगाने से जलन अथवा अन्य प्रतिकूल प्रभाव हो सकते हैं। इसलिए वही रिपेलेंट चुना जाना चाहिए, जिस पर त्वचा पर इस्तेमाल की स्पष्ट अनुमति और सुरक्षा संबंधी जानकारी दी गई हो।
विशेषज्ञों के मुताबिक, त्वचा पर लगाने वाले रिपेलेंट चुनते समय उत्पाद की पैकिंग, लेबल और उपयोग संबंधी निर्देशों को जरूर पढ़ना चाहिए। ऐसे उत्पादों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए जिनकी त्वचा पर उपयोग के लिए सुरक्षा का परीक्षण किया गया हो।
मच्छरों से बचाव के लिए केवल रिपेलेंट का इस्तेमाल ही पर्याप्त नहीं है। घर और आसपास सफाई रखने, पानी जमा नहीं होने देने और शरीर को ढकने वाले कपड़े पहनने जैसे उपाय भी जरूरी हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, मच्छरों के संपर्क को कम करना ही डेंगू, मलेरिया और चिकनगुनिया जैसी बीमारियों से बचाव का सबसे प्रभावी तरीका है।
डॉ. यश चौधरी ने कहा कि इलाज से बेहतर बचाव है। सुरक्षित और प्रभावी मच्छर रिपेलेंट का सही इस्तेमाल तथा आसपास स्वच्छता बनाए रखना परिवार को मच्छरजनित बीमारियों के खतरे से बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।


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