अग्रसेन कॉलेज कन्या पीजी कालेज का मामला
यह है गुरुओं का सम्मान चतुर्थ श्रेणी से भी कम है वेतनमान
वाराणसी। हर साल पांच सितंबर को शिक्षक दिवस धूमधाम से मनाए जाने की परंपरा है। गुरुओं को सम्मानित भी किया जाता है, लेकिन वाराणसी में एक महाविद्यालय ऐसा भी है जहां के शिक्षक शर्मसार होने को मजबूर हैं। जी हां यह मामला वाराणसी के अग्रसेन कन्या महाविद्यालय का है। इस महाविद्यालय में स्ववित्तपोषित योजनांतर्गत कार्यरत शिक्षकों की हालत चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों से भी बदतर बना दी गई है।
दरअसल महाविद्यालय के इन शिक्षकों एवं कर्मचारियों का माह जुलाई व अगस्त, 2026 दो माह का वेतन उनके खाते में रक्षाबंधन से एक दिन पूर्व 27 जुलाई को स्थानांतरित किया गया। लेकिन खाते में वेतन की धनराशि देखकर सभी लोग सकते में आ गए। नाम न छापने की शर्त पर शिक्षकों ने बताया कि कला, मानविकी एवं सामाजिक विज्ञान संकाय के शिक्षकों के खाते में कुल 4 हजार की धनराशि आयी अर्थात 2 हजार रुपये प्रति माह की दर से। जबकि उन्हीं विभागों के प्रयोगशाला सहायकों को 9 हजार प्रतिमाह की दर से सैलरी आई। इसके साथ ही चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों को 7 हजार प्रतिमाह के हिसाब से वेतन की धनराशि का अंतरण हुआ है। कमोवेश यही स्थिति विज्ञान व वाणिज्य संकाय के शिक्षकों व कर्मचारियों का भी है।
महाविद्यालय के प्रबंधक और प्राचार्य की ओर से की जा रही इस उपेक्षा से कालेज के कई शिक्षक डिप्रेशन में हैं। इससे कालेज की शिक्षण व्यवस्था चरमरा गई है। वाराणसी के अत्यंत प्राचीन एवं प्रतिष्ठित श्री काशी अग्रवाल समाज द्वारा संचालित श्री अग्रसेन कन्या पी. जी. कॉलेज कभी पूर्वांचल के अग्रणी शिक्षण संस्थानों में शुमार था। लेकिन वर्तमान प्राचार्य प्रो. मिथिलेश सिंह एवं प्रबंधक डॉ. मधु अग्रवाल के कार्यभार ग्रहण करने के बाद से ही कॉलेज को ग्रहण लग गया है और कॉलेज निरंतर पीछे जा रहा है।
एक ओर वाराणसी के अन्य अनुदानित महाविद्यालयों में प्रवेश के लिए होड़ लगी है, वहीं दूसरी ओर अग्रसेन कॉलेज अपनी बदहाली के आंसू बहा रहा है। अपनी पूरी एनर्जी केवल शिक्षकों/कर्मचारियों से लड़ने में बिता रहा है।


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