डॉ. अंजना चक्रपाणि मिश्र की दो नवीन कृतियों का भव्य विमोचन

‘मन अनहद नाद’ और ‘अनकहे से संवाद’ में भाव, संवेदना और समाज की विसंगतियों का चित्रण

इंदौर। वामा साहित्य मंच ‘शब्द शक्ति की संवाहक’ के तत्वावधान में आयोजित गरिमामयी साहित्यिक समारोह में सुप्रसिद्ध साहित्यकार डॉ. अंजना चक्रपाणि मिश्र की दो नवीन कृतियों—काव्य संग्रह ‘मन अनहद नाद’ और आलेख संग्रह ‘अनकहे से संवाद’ का भव्य विमोचन किया गया। साहित्य प्रेमियों और शहर के प्रबुद्धजनों की बड़ी संख्या में मौजूदगी ने समारोह को साहित्यिक गरिमा प्रदान की।

कार्यक्रम का शुभारंभ लेखिका की नातिन अलाइना द्वारा गणेश वंदना तथा लब्धप्रतिष्ठ गायिका आकांक्षा जाचक शेट्टी द्वारा मां सरस्वती वंदना की मधुर प्रस्तुति से हुआ। इसके बाद वामा साहित्य मंच की अध्यक्ष ज्योति जैन ने शब्द-पुष्पों से अतिथियों, साहित्यकारों और उपस्थित साहित्यप्रेमियों का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि डॉ. अंजना चक्रपाणि मिश्र तत्सम शब्दों के माध्यम से समाज की विसंगतियों को उजागर करती हैं। उन्होंने समाज में बिखरे शब्दों को एक माला में पिरोने का कार्य किया है और दोनों कृतियां अत्यंत प्रभावशाली हैं।

परिवार ने साझा की भावनाएं

पारिवारिक पाती के रूप में कनिष्क मिश्र ने कहा कि मां भले ही संस्कृतनिष्ठ शब्दों का प्रयोग करती हैं, लेकिन जब वे उन्हें सुनाती हैं तो वही शब्द बेहद सुंदर लगते हैं। यही उनके मन का ‘अनहद नाद’ है। निष्ठा मिश्र ने इस दिन को विशेष बताते हुए कहा कि मां की रचनाएं पढ़ने में कठिन अवश्य हैं, लेकिन वे उनके प्रयास, जुनून और अनुभवों का उत्सव हैं। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि उनकी कलम की शुरुआत है और अभी उन्हें बहुत कुछ लिखना है।

‘मेरी पुस्तकें मेरा दर्पण हैं’

लेखिका डॉ. अंजना चक्रपाणि मिश्र ने मंचासीन अतिथियों और उपस्थित साहित्यप्रेमियों को नमन करते हुए कहा कि वे सभी को अपना परिवार मानती हैं। उन्होंने कहा, “मेरी पुस्तकें मेरा दर्पण हैं। वे आपको मुझसे रूबरू करवाएंगी। मैं लोगों के सुख-दुख को सोचती हूं, स्वयं को उनकी जगह रखकर महसूस करती हूं और फिर लिखती हूं।”

उन्होंने अपने पिता के आयुर्वेदाचार्य होने और मां के प्रसूति रोग विशेषज्ञ बनने की प्रेरणा का उल्लेख करते हुए कहा कि साधारण परिवेश में पले-बढ़े परिवार ने उन्हें सदैव प्रेरणा दी। पति, पुत्री और पुत्र उनके लेखन में सहयोगी रहे हैं। इसके बाद उन्होंने ‘रजत राग—चंदनियां गुनगुना रही है...’ गीत प्रस्तुत कर सभा को मंत्रमुग्ध कर दिया।

दोनों कृतियां एक-दूसरे की पूरक : डॉ. गरिमा संजय दुबे

दोनों कृतियों पर वरिष्ठ साहित्यकार एवं प्रोफेसर डॉ. गरिमा संजय दुबे ने सारगर्भित चर्चा की। उन्होंने कहा कि लेखन और पठन ऐसी क्रियाएं हैं जो एकांत में घटित होती हैं और यह प्रेम व्यक्ति को अपने भीतर समेट लेता है। लेखिका ने गद्य और पद्य दोनों विधाओं के साथ न्याय किया है, जो अपने आप में कठिन कार्य है।

उन्होंने कहा कि दोनों पुस्तकें संवादों का प्रतिबिंब होने के साथ एक-दूसरे की पूरक हैं। ‘मन अनहद नाद’ की कविताएं स्वयं के मन की तलाश करते हुए पाठक को दूसरों के मन की यात्रा कराती हैं। स्त्रीभाव, राधा-कृष्ण प्रेम और आध्यात्मिकता को लेखिका ने अलग-अलग रंगों में प्रस्तुत किया है।

उन्होंने ‘स्वप्न जो पहले न देखा था’, ‘बिटिया की पहली साड़ी’ सहित नज्म और गजलों का उल्लेख करते हुए कहा कि रजोनिवृत्ति जैसे विषय पर भी लेखिका ने संवेदनशीलता से लिखा है और इसे थकान नहीं, बल्कि मुक्त होने का समय बताया है।

आलेख संग्रह ‘अनकहे से संवाद’ की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि इसमें संस्कृत भाषा, लोक परंपरा, बनारस की आध्यात्मिकता और आधुनिकता का सुंदर समावेश है। ‘नीला लिफाफा’, स्त्री और परिस्थितियों, कबीर चौरा तथा मणिकर्णिका घाट जैसे विषयों पर लिखे आलेख विशेष रूप से प्रभावशाली हैं। उन्होंने कहा कि भाषा की क्लिष्टता वही है, जिसका अर्थ पाठक को पता न हो, इसलिए खूब पढ़ना चाहिए।

लेखिका संवेदनशील और कोमल हृदय की : पद्मा राजेंद्र

वामा साहित्य मंच की संस्थापक अध्यक्ष पद्मा राजेंद्र ने कहा कि यह अवसर उनके लिए स्नेह, प्रसन्नता और गर्व का है। उन्होंने कहा कि डॉ. अंजना चक्रपाणि मिश्र से उनकी पहचान धीरे-धीरे सखी के रिश्ते में बदल गई। वे रिश्तों के सुख-दुख की सारथी हैं। प्रतिभावान, संवेदनशील और कोमल हृदय होने के गुण उनकी पुस्तकों में भी दिखाई देते हैं।

आधुनिकता और परंपरा का संगम हैं अंजना : शैलबाला मार्टिन पाठक

विशिष्ट अतिथि सामान्य प्रशासन विभाग की पूर्व सचिव एवं पूर्व आईएएस श्रीमती शैलबाला मार्टिन पाठक ने डॉ. अंजना को भरोसेमंद सखी बताते हुए कहा कि उनसे मन की बात करना सहज है। उनके व्यक्तित्व में प्रेम, भावना और वात्सल्य के साथ आधुनिकता और परंपरा का सुंदर संगम है। उनकी कविताएं अंतर्मन की अभिव्यक्ति हैं, जो भावनाओं को कलात्मक ढंग से प्रस्तुत करते हुए पाठक को सोचने के लिए विवश करती हैं। उन्होंने ‘संवेदना’ और ‘बनारस की गलियां’ कविताओं का वाचन भी किया।

गायिका आकांक्षा जाचक शेट्टी ने लेखिका को विलक्षण प्रतिभा की धनी बताते हुए कहा कि वे दूसरों के मन की बात समझने की क्षमता रखती हैं। उन्होंने डॉ. अंजना चक्रपाणि मिश्र का रचित चेती गीत भी प्रस्तुत किया।

‘स्त्री लिख रही है, यह हमारे समय की उपलब्धि’

समारोह के मुख्य अतिथि प्रख्यात साहित्यकार एवं शिवना प्रकाशन के सारथी पंकज सुबीर ने दोनों कृतियों की तुलना बेटियों से करते हुए कहा कि गद्य और पद्य की इन पुस्तकों ने उन्हें चौंकाया। उन्होंने विशेष रूप से रजोनिवृत्ति जैसे विषय को उठाने के लिए लेखिका की सराहना की। उन्होंने कहा कि ‘स्त्री बोलने पर’ जैसी रचनाएं शब्दों का शंखनाद हैं और आने वाली स्त्रियों को इन्हें सुनना चाहिए।

उन्होंने कहा कि कविता संग्रह का नाम वे ‘अकेलेपन का उत्सव’ रखते। उनकी कविताएं बड़े समाचार पत्रों और पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित होने योग्य हैं। आलेख संग्रह को भी उन्होंने अलग दृष्टि वाला बताया। उन्होंने भाषा को सरल बनाने, कविता संग्रह को खंडों में बांटने और पुस्तक के शीर्षक के चयन में सावधानी बरतने का सुझाव दिया। उन्होंने ‘ईश्वर जैसा’ और ‘पिता’ कविता का वाचन भी किया। उन्होंने कहा कि “स्त्री लिख रही है, यह हमारे समय की वास्तविक उपलब्धि है।”

साहित्यप्रेमियों ने बढ़ाई समारोह की गरिमा

संपूर्ण कार्यक्रम का कुशल संचालन वरिष्ठ कवयित्री प्रीति दुबे ने किया। अतिथियों का चक्रपाणि दत्त मिश्र, राकेश पाठक, कनिष्क मिश्र, अमर कौर चड्ढा, निष्ठा मिश्र और इंदू मिश्र ने भावभीना स्वागत किया। समारोह में शहर के प्रबुद्धजनों, साहित्यकारों और साहित्य प्रेमियों ने बड़ी संख्या में सहभागिता की। अंत में चक्रपाणि दत्त ने सभी सुधी पाठकों और साहित्य अनुरागियों का आभार व्यक्त किया।

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