स्वादिष्ट व्यंजनों से लेकर परिवार की हंसी-मजाक तक, सोनी सब के कलाकारों ने बताया त्योहारों को क्या बनाता है खास
मुंबई, सितंबर 2026। त्योहारों का मौसम करीब आते ही घर-आंगन में रौनक बढ़ने लगती है। स्वादिष्ट पकवान, नए परिधान, सजावट, परिवार के साथ मेल-मिलाप और हंसी-मजाक—ये छोटी-छोटी खुशियां ही त्योहारों को यादगार बनाती हैं। सोनी सब के लोकप्रिय कलाकार मुस्कान बामने, गुलकी जोशी, तोरल रसपुत्रा और मनीष वाधवा ने साझा किया कि त्योहारों के दौरान वे किन खास पलों का सबसे ज्यादा इंतजार करते हैं।
मुस्कान बामने: परिवार के साथ बिताया समय सबसे खास
पुष्पा इम्पॉसिबल में शनाया का किरदार निभा रहीं मुस्कान बामने के लिए त्योहारों का मतलब परिवार के साथ समय बिताना है। वह खास तौर पर अपने कजिन्स के साथ होने वाली मस्ती और बातचीत को पसंद करती हैं।
उन्होंने कहा, “मेरे लिए त्योहारों का मतलब सच में परिवार के साथ समय बिताना है। मुझे सबसे ज्यादा इंतजार रहता है कि सब लोग एक साथ हों, खासकर मेरे कजिन्स। जब हम सब साथ होते हैं तो खूब हलचल होती है। परिवार की छोटी-छोटी बातें और मजाक भी इस समय और खास लगते हैं। साथ होने का वही एहसास मुझे सबसे ज्यादा अच्छा लगता है।”
गुलकी जोशी: त्योहार और लजीज पकवानों का रिश्ता
यादें में डॉ. सृष्टि अग्रवाल की भूमिका निभा रहीं गुलकी जोशी के लिए त्योहारों का सबसे आकर्षक हिस्सा स्वादिष्ट पारंपरिक व्यंजन हैं। मोदक, करंजी और पुरणपोली जैसे पकवानों के साथ परिवार का एक साथ बैठना उन्हें खास खुशी देता है। इसके अलावा उन्हें त्योहारों पर अलग-अलग परिधान पहनना भी पसंद है।
गुलकी ने कहा, “मेरे लिए त्योहारों का सबसे बड़ा आकर्षण स्वादिष्ट पकवान होते हैं। मोदक, करंजी, पुरणपोली जैसे व्यंजन सिर्फ त्योहारों पर ही बनाए जाते हैं और जब पूरा परिवार साथ बैठकर उनका आनंद लेता है, तो उनका स्वाद और भी बढ़ जाता है। मुझे हर बार अलग-अलग परिधान पहनना भी बहुत पसंद है। खाने, अपनों और परिधानों का यह संगम ही इस मौसम को इतना आनंददायक बना देता है।”
तोरल रसपुत्रा: त्योहारों की ऊर्जा करती है आकर्षित
हस्तिनापुर के वीर में कुंती का किरदार निभा रहीं तोरल रसपुत्रा को त्योहारों के दौरान चारों ओर नजर आने वाली सकारात्मक ऊर्जा बेहद पसंद है। तैयार होने, दोस्तों और परिवार से मिलने और लोगों को जश्न के मूड में देखने का अनुभव उनके लिए खास है।
उन्होंने कहा, “मुझे त्योहारों के साथ आने वाली ऊर्जा बहुत पसंद है। हमेशा कुछ न कुछ होता रहता है, चाहे तैयार होना हो, परिवार और दोस्तों से मिलना हो या बस बाहर निकलकर सबको जश्न के मूड में देखना हो। मुझे खास तौर पर सजधज करना और इन मौकों पर कढ़ाईदार कुर्ते और साड़ियां पहनना अच्छा लगता है। यही ऊर्जा इस मौसम को रोमांचक बना देती है।”
मनीष वाधवा: साथ बैठकर बातें करने की यादें रहती हैं हमेशा
हस्तिनापुर के वीर में भीष्म पितामह की भूमिका निभा रहे मनीष वाधवा के लिए त्योहारों की सबसे बड़ी खुशी परिवार के एक साथ होने में है। पत्नी, बच्चों और रिश्तेदारों के साथ बिताए सहज और खुशनुमा पल उन्हें सबसे ज्यादा पसंद हैं।
मनीष वाधवा ने कहा, “मेरे लिए त्योहारों का सबसे अच्छा हिस्सा यही होता है कि मेरी पत्नी, बच्चे और रिश्तेदार सब आसपास हों। जब परिवार एक साथ होता है तो घर का माहौल ही अलग हो जाता है, जिसमें लगातार बातचीत, हंसी-मजाक और निश्चित रूप से ढेर सारे व्यंजन शामिल होते हैं। मुझे वे अनायास पल बहुत पसंद आते हैं, जब सब लोग बस साथ बैठकर बातें कर रहे होते हैं। यही वे यादें हैं, जो जश्न पूरा होने के बाद भी लंबे समय तक साथ रहती हैं।”
त्योहारों को लेकर कलाकारों की ये बातें एक ही खूबसूरत एहसास की ओर इशारा करती हैं—जश्न की असली खुशी महंगे तोहफों या भव्य तैयारियों में नहीं, बल्कि अपनों के साथ बिताए उन छोटे-छोटे पलों में होती है, जो बाद में यादों का हिस्सा बन जाते हैं।
देखिए ‘यादें’, ‘हस्तिनापुर के वीर’ और ‘पुष्पा इम्पॉसिबल’ सिर्फ सोनी सब पर।



No comments:
Post a Comment