नेपाल में रेस्क्यू ऑपरेशन में भारतीय सेना भी जुटी, नेपाली सैनिकों के साथ हाई रिस्क जोन में चला रही अभियान
मलबे और सुरंगों में फंसे लोगों की तलाश में जुटी 24 सदस्यीय भारतीय टनल रेस्क्यू टीम; नेपाल को अब तक 68.5 टन से अधिक राहत सामग्री भेज चुका है भारत
काठमांडू, 2 सितंबर 2026। नेपाल में भीषण आपदा के बाद राहत और बचाव अभियान लगातार जारी है। नेपाली सेना के साथ भारतीय सेना के जवान भी कंधे से कंधा मिलाकर हाई रिस्क जोन में रेस्क्यू ऑपरेशन चला रहे हैं। मलबे और कीचड़ में फंसे लोगों की तलाश के साथ सुरंगों में बचाव अभियान भी चलाया जा रहा है। भारत की ओर से राहत सामग्री के अलावा डॉक्टरों और फॉरेंसिक विशेषज्ञों की टीम भी नेपाल भेजी गई है।
नेपाल में जारी रेस्क्यू अभियान में करीब 20 हजार जवान और 20 से अधिक हेलीकॉप्टर लगाए गए हैं। हजारों लोगों के अब भी लापता होने की बात सामने आ रही है। नेपाल की सेना, पुलिस और सशस्त्र बलों को बड़े पैमाने पर राहत-बचाव कार्य में लगाया गया है।
हाई रिस्क जोन में भारतीय सेना का ऑपरेशन
भारतीय सेना की 24 सदस्यीय टनल रेस्क्यू टीम नेपाल में दो यूनिट में काम कर रही है। चिलिमे और लांगटांग हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट साइटों पर भारतीय सैनिक नेपाली सेना के साथ मिलकर अभियान चला रहे हैं। यहां जमीन के नीचे बेहद जोखिम भरे हालात में लोगों को तलाशने और सुरक्षित निकालने का प्रयास किया जा रहा है।
भारतीय सेना नेपाल को बेली ब्रिज की आपूर्ति में भी मदद कर रही है। भारत अब तक चार खेपों में नेपाल को 68.5 टन से अधिक राहत सामग्री भेज चुका है।
डीएनए प्रोफाइलिंग में भी भारत करेगा मदद
आपदा के बाद नेपाल के सामने बड़ी संख्या में शवों की पहचान और उन्हें सुरक्षित रखने की चुनौती है। नेपाल में शवों को सुरक्षित रखने के लिए पर्याप्त फ्रीजर यूनिट और तत्काल डीएनए जांच के लिए जरूरी किट की कमी बताई जा रही है।
ऐसे में भारत ने मदद के लिए 18-19 फॉरेंसिक विशेषज्ञों और डॉक्टरों की टीम नेपाल भेजी है। यह टीम डीएनए प्रोफाइलिंग समेत शवों की पहचान की प्रक्रिया में नेपाली अधिकारियों की सहायता करेगी।
सुरंगों में रेस्क्यू सबसे बड़ी चुनौती
नेपाल के भौगोलिक हालात राहत-बचाव अभियान में बड़ी चुनौती बने हुए हैं। हिमालयी क्षेत्र में बसे प्रभावित जिलों में चारों ओर पहाड़ और गहरी घाटियां हैं। बाढ़ के बाद पहाड़ी ढलानें अस्थिर हो गई हैं और लगातार भूस्खलन का खतरा बना हुआ है।
रसुवा और नुवाकोट जैसे जिले त्रिशूली और भोटे कोशी नदियों की संकरी घाटियों में बसे हैं। कई जगह सुरंगों में भारी मात्रा में कीचड़ भर गया है, जिससे अंदर फंसे लोगों तक पहुंचना बेहद मुश्किल हो रहा है।
हेलीकॉप्टर उतारने के लिए सुरक्षित जगह नहीं
लांगटांग और चिलिमे में बाढ़ के कारण कई सुरक्षित और पक्के ढांचे नष्ट हो गए हैं। प्रभावित क्षेत्र में हेलीकॉप्टर उतारने के लिए पर्याप्त समतल जमीन उपलब्ध नहीं है। कई स्थानों पर 10 से 15 फीट तक कीचड़ जमा होने की बात सामने आई है।
ऐसे हालात में हेलीकॉप्टरों को हवा में स्थिर रखना पड़ता है और जवानों को रस्सियों के सहारे जमीन तक पहुंचाया जाता है। यह अभियान बेहद जोखिम भरा है।
पहले नेपाल में 14 हेलीकॉप्टरों के जरिए रेस्क्यू अभियान चलाया जा रहा था। अब सेना और निजी ऑपरेटरों के कम से कम 16 से 20 हेलीकॉप्टर राहत-बचाव अभियान में लगाए गए हैं। इसके बावजूद कठिन भौगोलिक परिस्थितियों और लगातार भूस्खलन के कारण बचाव दल के सामने बड़ी चुनौतियां बनी हुई हैं।


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